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आप भी नारायण मूर्ति की तरह गिफ्ट करना चाहते हैं ‘शेयर’, जान लीजिए किस तरह से लगता है टैक्स

समय के साथ-साथ निवेश का ही गिफ्ट देने का भी तरीका बदला है। समय से आगे की सोचने वाले लोग अब अपने करीबियों को गिफ्ट में महंगी हार के बदले अच्छी कंपनी के शेयर गिफ्ट करना पसंद करते हैं। आपने हाल में इससे जुड़ी एक खबर भी पढ़ी होगी जिसमें एक चार महीने का बच्चा 240 करोड़ से अधिक के शेयर का मालिक बन गया।

हम बात एकाग्र मूर्ति की कर रहे हैं जो कि मशहूर उद्यमी नारायणमूर्ति के पोते हैं। पिछले सप्ताह आईटी कंपनी इन्फोसिस के संस्थापक एनआर नारायण मूर्ति ने अपने चार महीने के पोते एकाग्र रोहन मूर्ति को कंपनी के 15 लाख शेयर गिफ्ट किये थे। इनकी कीमत करीब 240 करोड़ रुपये है।

Narayana Murthy s Grandson Gets Infosys Shares

एनआर नारायण मूर्ति सिर्फ अकेले नहीं हैं जिनके पोते के पास शेयर हैं। इन्फोसिस के ही सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि ने अपने पोते तनुष नीलेकणि को 0.09 फीसदी शेयर और शिबुलाल के पोते-पोती मिलन शिबुलाल और निकिता शिबुलाल के पास 0.19-0.19 फीसदी शेयर हैं। इसी तरह, जनवरी 2024 में विप्रो के संस्थापक अजीम प्रेमजी ने अपने पास मौजूद विप्रो के 1.02 करोड़ इक्विटी शेयर अपने दो बेटों रिशद प्रेमजी और तारिक प्रेमजी को उपहार के रूप में गिफ्ट किये थे।

इन उदाहरणों से इतर संभव है कि आपने भी अपने पार्टनर या परिवार के किसी सदस्य को गिफ्ट में शेयर दिया हो, या फिर ऐसा करने की सोच रहे हों... तो आइए जानते हैं कि गिफ्ट में शेयर देने के मामले में टैक्स के नियम किस तरह से लागू होते हैं...

आयकर कानून के मुताबिक, एक वित्त वर्ष में 50 हजार रुपये तक के गिफ्ट पर टैक्स से छूट है। आसान भाषा में कहें तो एक साल के भीतर मिले सारे गिफ्ट की कुल कीमत 50 हजार से कम है तो आपको टैक्स नहीं देना होता।

50 हजार रुपये से ज्यादा के गिफ्ट मिलने पर तोहफों की कुल रकम पर टैक्स भरना होगा। ये जानना जरूरी है कि जिसे गिफ्ट मिलता है टैक्स उसे भरना होता है। जैसे आपको एक साल के भीतर भीतर 60 हजार रुपये की नकद उपहार में मिलती है, तो आपको न सिर्फ 10 हजार बल्कि पूरे 60 हजार पर टैक्ट देना होगा।

हालांकि इससे जुड़ी एक अहम चीज ये है कि ये टैक्स तभी लगता है जब आप गैर-रिश्तेदारों से 50 हजार से अधिक मूल्य की नकद राशि या संपत्ति लेते हैं। आयकर कानून के तहत 'रिलेटिव' की कैटेगरी में आने वालों लोगों से मिले गिफ्ट पर कोई टैक्स नहीं है, चाहे गिफ्ट की कीमत कुछ भी हो

इसका मतलब है कि अगर आप अपने परिवार के किसी सदस्य को शेयर गिफ्ट करते हैं तो उन्हें कोई टैक्स नहीं देना होगा। पत्नी के अलावा भाई-बहन, माता-पिता, पत्नी के माता-पिता समेत प्रत्यक्ष वंशज/पूर्वज भी 'रिश्तेदार' की श्रेणी में आते हैं। प्रत्यक्ष पूर्वजों में माता-पिता, दादा-दादी और परदादा-परदादा जैसे रक्त संबंधी शामिल होते हैं, जबकि प्रत्यक्ष वंशजों में बच्चे, पोते-पोतियां आदि शामिल होते हैं।

वसीयत या विरासत में मिली संपत्ति पर भी टैक्स नहीं देना होता है। हालांकि कुछ मामलों में परिवार के सदस्यों को भी टैक्स देना पड़ता है। जैसे आपने किसी को शेयर गिफ्ट किया। लेकिन कुछ समय के बाद वे इन शेयर को बेच देते हैं या डिविडेंड से उन्हें कमाई होती है तो उन्हें टैक्स देना होगा।

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि विवाह ही एकमात्र अवसर है जिस पर प्राप्त उपहारों पर कर नहीं लगता है। किसी अन्य अवसर पर प्राप्त उपहार पर कराधान लगता है। शादी में दिए गए गिफ्ट की वैल्यू को लेकर कोई लिमिट नहीं है। कोई भी व्यक्ति कितनी भी वैल्यू का गिफ्ट दूल्हा-दुल्हन को दे सकता है और ये पूरी तरह से टैक्स फ्री होता है।

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