मिलिए देश के 'स्‍टाइलिश और 'रॉकस्‍टार' आरबीआई गर्वनर रघुराम राजन से

रिजर्व बैंक के सबसे कम उम्र के गर्वनर 52 वर्षीय रघुराज राजन ने सितंबर 2013 में जब रिजर्व बैंक के गर्वनर का जिम्‍मा संभाला था तो उस समय रुपया डॉलर के मुकाबले 61 रुपए के स्‍तर तक आ गया था। साल 2012 में देश वापस लौटने वाले रघुराम राजन को एक अमेरिकी न्‍यूजपेपर ने रॉकस्‍टार का खिताब दिया था। खुद को एक आम आदमी का हिस्‍सा मानने वाले रघु आज युवाओं के स्‍टाइल आइकन बनकर उभरे हैं।

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के 23वें गर्वनर के तौर पर अपना कार्यभार संभालने वाले रघुराम शायद देश के पहले ऐसे गर्वनर हैं जिन्‍हें लेकर युवाओं में लोकप्रियता काफी ज्‍यादा है। ज्‍यादातर युवा उनके काम करने के अंदाज से काफी प्रेरित हैं।

दुनिया का अग्रणी इंजीनियरिंग संस्‍थान मैसाच्‍यूसेट्स इंस्‍टीट्यूट ऑफ टेक्‍नोलॉजी, एमआइटी, ने रघु को पीएचडी करने का ऑफर दिया था। रघु ने संस्‍थान को जवाब दिया कि वह एक गरीब भारतीय नागरिक हैं और उनके पास इतने पैसे नहीं है कि वह यहां पर पीएचडी की पढ़ाई कर सकें। उन्‍होंने साफ कह दिया कि अगर उनकी पीएचडी को फंड किया जाएगा वह तभी आएंगे। एक हफ्ते बाद एमआईटी ने उन्‍हें चिट्ठी लिखकर इंफॉर्म किया कि संस्‍थान के पास एक स्‍कॉलरशिप प्रोग्राम है और संस्‍थान चाहता है कि रघु इसका हिस्‍सा बनें। आज हम आपको रघु की जिंदगी के कुछ ऐसे पहलुओं के बारे में तस्‍वीरों के जरिए रुबरु करवाने की कोशिश कर रहे हैं जिनके बारे में आप शायद ही जानते हों।

स्‍टाइलिश रघुराम राजन

स्‍टाइलिश रघुराम राजन

रघुराम राजन का खुद को ड्रेस्‍डअप करने का तरीका देश के फैशन डिजायनरों और युवाओं को काफी पसंद आता है। फैशन डिजायनरों के मुताबिक रघु भले ही किसी डिजायनर की मदद न लेते हों लेकिन जिस तरह से वह सूट, शर्ट और टाई को मैच करते हैं वह वाकई काबिल-ए-तारीफ है।

 वाशिंगटन में मिला रॉकस्‍टार का टाइटल

वाशिंगटन में मिला रॉकस्‍टार का टाइटल

गर्वनर बनने के कुछ दिनों बाद ही रघु अपनी पहली यूएस विजिट पर गए और यहां पर उन्‍हें रॉकस्‍टार का टाइटल दिया गया। एक समारोह के बाद एक अमेरिकी न्‍यूजपेपर ने उन्‍हें यह खिताब दिया।

बनना है हिन्‍दी का मास्‍टर

बनना है हिन्‍दी का मास्‍टर

भोपाल में जन्‍म लेने वाले रघु ने कई बार इस बात को स्‍वीकार किया है कि वह 7वीं कक्षा से हिन्‍दी की पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन वह अपनी राष्‍ट्रीय भाषा में बेहद कमजोर हैं। रघु कोशिश कर रहे हैं कि वह जल्‍द से जल्‍द हिन्‍दी के मास्‍टर बन जाएं।

देश के लिए आए वापस

देश के लिए आए वापस

रघुराम राजन साल 2012 में अमेरिका से भारत लौटे हैं। उनकी मानें तो उन्‍होंने अपनी जिंदगी और अपने करियर का एक दौर अमेरिका में बिता लिया है और अब वह अपने देश के लिए अपना कर्तव्‍य पूरा करना चाहते हैं। रघु को उम्‍मीद है कि वह देश को तरक्‍की के रास्‍ते पर जल्‍द से जल्‍द लेकर आएंगे।

मैं सुपरमैन नहीं हूं

मैं सुपरमैन नहीं हूं

रिजर्व बैंक की कमान संभालने के बाद रघु से देश को काफी उम्‍मीद थीं। इस पर रघु ने कहा कि उनसे लोगों को काफी उम्‍मीदें हैं लेकिन वह कोई 'सुपरमैन' नहीं हैं।

शिकागो यूनि‍वर्सिटी के प्रोफेसर रघुराम

शिकागो यूनि‍वर्सिटी के प्रोफेसर रघुराम

एमआईटी से पीएचडी करने वाले रघुराम राजन ने यूनि‍वर्सिटी ऑफ शिकागों में प्रोफेसर के तौर पर भी अपनी सेवाएं दी हैं। वह यहां के छात्रों के बीच एक लोकप्रिय प्रोफेसर के तौर पर मशहूर थे।

देखा था गर्वनर बनने का सपना

देखा था गर्वनर बनने का सपना

बकौल रघुराम राजन जिस समय वह आईआईएम अहमदाबाद से एमबीए की पढ़ाई कर रहे थे, उसी समय उन्‍होंने एक दिन आरबीआई का गर्वनर बनने का सपना देखा था और वह पूरे समय अपने सपने के बारे में सोंचते थे।

फैमिली सबसे अहम

फैमिली सबसे अहम

रघुराम मानते हैं कि उनके काम के बाद उनकी फैमिली सबसे अहम हैं। दो रघुराम ने आईआईएम में पढ़ाई के दौरान क्‍लासमेट राधिका पुरी से शादी की। वह एक बेटी और एक बेटे के पिता हैं।

किताबों के लिए मिला है पुरस्‍कार

किताबों के लिए मिला है पुरस्‍कार

रघुराम राजन ने फॉल्‍ट लाइंस: हाउ हिडेन फ्रैक्‍चर्स स्टिल थ्रेटन द वर्ल्‍ड इकॉनमी नामक एक किताब लिखी है और इसके लिए उन्‍हें फाइनेंशियल टाइम्स -गोल्‍डमैन सैक्‍स की ओर से वर्ष 2010 में बेस्‍ट बिजनेस बुक का प्राइज दिया गया है।

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