Mankind Pharma IPO: एक कॉलेज ड्रॉपआउट, जिसने देश में खड़ी कर दी चौथी सबसे बड़ी फार्मा कंपनी
Mankind Pharma IPO: आज से बाजार में मैनकाइंड फार्मा का आईपीओ आ रहा है। इस कंपनी की खासियत यह है कि यह देश की चौथी सबसे बड़ी फार्मा कंपनी है और इसके उत्पाद लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हैं।

Mankind Pharma IPO: आज देश की चौथी सबसे बड़ी फार्मा कंपनी मैनकाइंड फार्मा का आईपीओ ईश्यू हो गया है। मैनकाइंड फार्मा के पक्ष में एक बड़ी बात यह है कि यह अपना तकरीबन 97 फीसदी उत्पाद भारत में ही बेचता है।
लिहाजा कंपनी को ना तो एफडीए का डर है, ना ही 487 का भय है, ना ही इस कंपनी पर छापेमारी का डर है। कंपनी के एमडी और प्रमोटर राजीव जुनेजा (Rajeev Juneja) कंपनी के भविष्य को लेकर काफी सकारात्मक हैं।
अन्य फार्मा कंपनियों से अलग
लिहाजा इस कंपनी में निवेश करना काफी फायदे का सौदा हो सकता है। दरअसल अमेरिका का एफडीए काफी सख्त है, जिसकी वजह से भारत की अन्य फार्मा कंपनियों सिप्ला, सन फार्मा से काफी अलग है। कंपनी के कोफाउंडर और एमडी राजीव जुनेजा की बात करें तो इनका सफर काफी दिलचस्प रहा है।
कॉलेज ड्रॉपआउट
राजीव जुनेजा ने बताया कि इस कंपनी की शुरुआत मेरे बड़े भाई रमेश जुनेजा भाई ने की थी, वह लोकल लैब में काम करते थे। मैं कॉलेज ड्रॉपआउट हूं, इसलिए मेरी क्वालिफिकेशन प्रोफाइल में नहीं लिखी है। मैंने अपनी पढ़ाई पूरी नहीं की थी, लेकिन डॉक्टरों, लैब टेक्निशियन के साथ काम करने का अनुभव मेरे काम आया है।
भाई के साथ शुरू की कंपनी
मैंने अपने भाई के साथ 9 साल मेडिकल लैब में काम किया। मेरे भाई ने कहा कि अगर सीखना है तो सुबह 8 बजे घर से निकल जाओ और रात 9 बजे से पहले मत आना। शुरुआत में मैंने बहुत संघर्ष किया। झाड़ू लगाने से लेकर हर काम किया।
पैसा कम तो दिमाग अधिक चलता था
राजीव जुनेजा खुद बताते हैं कि मैनकाइंड की जब शुरुआत हुई थी तो हमारे पास पैसा बहुत कम था, जिसकी वजह से हमारा दिमाग अधिक चलता था। हमने गांव और छोटे शहरों से इसकी शुरुआत की, यहां पर बड़ी कंपनियां नहीं थी। हमने एक बार में पूरे देश में लॉन्च नहीं किया।
हम खुद बनाते हैं अपने अधिकतर उत्पाद
हमने कीमतों के दम पर बाजार में जगह बनाई। हमने सस्ती कीमतों पर बेहतरीन उत्पाद मुहैया कराए। 27 फैक्ट्रियों में अपने उत्पाद खुद बनाते हैं। हमारे प्लांट एफडीए से स्वीकृत हैं। हम अमेरिका में सिर्फ वही उत्पाद भेजते हैं जो बनाने में मुश्किल हैं, खुद से बना सकते हैं। हमारा पहले दिन की ओर से ध्यान भारत की ओर रहा है।
हमारा कोई प्रतियोगी नहीं
हम थोड़ी अलग कंपनी हैं, लिहाजा हम किसी को अपना प्रतियोगी नहीं मानते हैं। हमारी आर एंड डी भी है, हमने डायडोडिस्ट्राइन हार्मोन की आरएंडडी की है। इसे क्रैक करने में हमे 9 साल लगे। हमने इसे दो साल पहले लॉन्च किया। हमारी कंपनी की पहुंच देश के 80 फीसदी डॉक्टरों तक है।
बिक्री के मामले में चौथे पायदान पर
जुनेजा ने कहा कि सबसे अधिक सब्सक्रिप्शन हमारी दवाओं का भारत में होता है, लेकिन कमाई के मामले में चौथे पायदान पर है। इसकी वजह है कि हम हर व्यक्ति तक कम कीमत में पहुंचना चाहते हैं। हम हमेशा कैश रिच रहे हैं, कभी उधार नहीं लिया।
लगातार बढ़ाया मुनाफा
कंपनी के अधिकतर उत्पाद देश में मार्केट लीडर हैं। शुरुआत में कंपनी की सेल 1 करोड़ थी, बाद में दूसरे साल में यह 10 करोड़ हो गई। 2000 में कंपनी की सेल 50 करोड़, 2007 में 500 करोड़ रुपए की सेल हमने की थी।
20 हजार कर्मचारी
मैनकाइंड रियल स्टेट में भी काम करती है। कंपनी में 20 हजार लोग काम करते हैं। इनको लेकर ही इसकी शुरुआत की गई है। कंपनी की सेल लगातार बढ़ती रही है, हम हमेशा कैश रिच रहे हैं। उधार वाले लोगों की संख्या बढ़ने की वजह यह है कि हमने कोरोना काल में लोगों को अधिक सप्लाई की ताकि उत्पाद की बाजार में सप्लाई कम ना हो।
80 फीसदी बाजार में उपलब्ध
मैनकाइंड फार्मा कंपनी के वाइस चेयरमैन और एमडी राजीव जुनेजा ने कहा कि हमारी कंपनी की यात्रा की शुरुआत 1995 में शुरू हुई है, आज 80 फीसदी बाजार में हम मौजूद हैं। हमारे 75 फीसदी उत्पाद हम खुद ही बनाते हैं, ताकि हमारे ग्राहक सस्ते दाम पर और अच्छी गुणवत्ता के उत्पाद को हासिल कर सके।
क्रॉनिक सेगमेंट पर ध्यान
राजीव जुनेजा का कहना है कि पिछले 4-5 साल में हमारा ध्यान क्रोनिक सेगमेंट पर रहा है। पिछले 17 साल में हम इस सेगमेंट में 34 फीसदी तक पहुंच गए हैं। हमारे 15 हजार से अधिक कर्मचारी मार्केट में काम कर रहे हैं। हम फील्ड से आते हैं, हम हर चीज को फील्ड के नजरिए से देखते हैं। हम लंबी अवधि के लिए सोचते हैं। हमने 50 लाख की कैपिटल से कंपनी की शुरुआत की थी।
मार्केट लीडर प्रोडक्ट
एमडी राजीव जुनेजा का कहना है कि हमारे जितने भी ब्रांड हैं, वो काफी लोकप्रिय है, मार्केट में 13 फीसदी कंडोम हमारी कंपनी के हैं, प्रेगा न्यूज की बात करें तो यह मार्केट लीडर है, इसके पास 80 फीसदी मार्केट शेयर है। कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स अनवान्टेड 72 का बाजार में शेयर 60 फीसदी है।












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