गौतम अडानी के खिलाफ याचिकार्ता का सुप्रीम कोर्ट में बड़ा दावा
अडानी ग्रुप को लेकर हिंडनबर्ग रिपोर्ट में जिस तरह के आरोप लगाए गए उसकी वजह से कंपनी को काफी नुकसान उठाना पड़ा। इस पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है।
अडानी-हिंडनबर्ग केस को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान कोर्ट को इस बात की जानकारी दी गई कि इस मामले में सेबी भी शामिल था। याचिकाकर्ता ने कहा कि सेबी का एक सदस्य का अडानी ग्रुप से संबंध था, जोकि हितों के टकराव की श्रेणी में आता है।

याचिकाकर्ता अनामिक जयसवाल की ओर से दायर एफिडेविट में कहा गया है कि अडानी ग्रुप मामले की जांच में हितों का टकराव है क्योंकि सेबी का एक कर्मचारी भी इसमे शामिल है जोकि सिरिल श्रॉफ की बेटी हैं और उनकी शादी करन अडानी से हुई है, जोकि अडानी ग्रुप के चेयरपर्सन गौतम अडानी के बेटे हैं।
बता दें कि शिरिल श्रॉफ सिरिल अमरचंदानी मंगलदास लॉ फर्म में एमडी हैं। वह सेबी की कॉर्पोरेट गवर्नेंस कमेटी के सदस्य हैं, जोकि इंसाइडर ट्रेडिंग से जुड़े अपराधों को देखती है।
यह भी आरोप लगाया है कि सेबी ने अडानी ग्रुप को फायदा पहुंचाने के लिए सेबी एक्ट में कई बदलाव किए। इस मामले में सेबी ने ना सिर्फ आंखें मूंद ली बल्कि इस मामले में अडानी ग्रुप को लाभ पहुंचाने के लिए एक्ट में भी बदलाव किए।
याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया है कि डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस की ओर से जनवरी 2014 में अलर्ट जारी किया गया था लेकिन उसे भी सेबी ने नजरअंदाज किया। बोर्ड ने इस जानकारी को ना सिर्फ कोर्ट से छिपाया है बल्कि डीआरआई की ओर से दी गई किसी भी जानकारी की जांच कभी नहीं की।
वहीं सेबी ने अपनी स्टेटस रिपोर्ट में कहा है कि जो 24 जांच इस मामले में की गई है उसमे 22 पूरी हो चुकी है जबकि 2 की जांच बाकी है।












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