GST Slab New Changes: 12% GST स्लैब जल्द होगा खत्म? जानें मिडिल क्लास को क्या-क्या फायदे?
GST Slab New Changes: गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST) को लागू हुए 8 साल पूरे हो चुके हैं। 1 जुलाई 2017 को देश में इसे लागू किया गया था। केंद्र सरकार जल्द ही इसमें बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है।
खबर है कि 12% GST स्लैब को पूरी तरह खत्म किया जा सकता है। इससे मिडिल और लोअर क्लास के लिए रोजमर्रा की जरूरतों की चीजें सस्ती हो सकती हैं। आइए जानते हैं कि इस बदलाव से क्या फायदे होंगे और किन सामानों पर असर पड़ेगा?

12% GST स्लैब खत्म होने का क्या मतलब?
GST काउंसिल मौजूदा चार स्लैब (5%, 12%, 18%, 28%) को घटाकर तीन स्लैब (5%, 18%, 28%) करने पर विचार कर रही है। 12% स्लैब में आने वाले ज्यादातर सामान 5% टैक्स ब्रैकेट में शिफ्ट हो सकते हैं, जबकि कुछ को 18% में ले जाया जा सकता है। इस प्रस्ताव पर जीएसटी काउंसिल की 56वीं बैठक में फैसला हो सकता है, जो जुलाई 2025 की शुरुआत में होने की संभावना है।
कौन-कौन से सामान हो सकते हैं सस्ते?
12% स्लैब में शामिल कई रोजमर्रा की चीजें सस्ती हो सकती हैं। इनमें शामिल हैं:-
- पैकेज्ड फूड: नमकीन, बिस्किट, मिठाई आदि।
- फुटवियर: 1,000 रुपये तक के जूते-चप्पल।
- डेयरी प्रोडक्ट्स: कॉन्डेंस्ड मिल्क, पनीर आदि।
- घरेलू सामान: स्टेशनरी, छोटे इलेक्ट्रॉनिक्स, और अन्य गृहस्थी उत्पाद।
- सेवाएं: 7,500 रुपये तक के होटल रूम और गैर-इकोनॉमी एयर टिकट।
इनमें से ज्यादातर को 5% टैक्स स्लैब में लाने की योजना है, जिससे इनकी कीमतें कम होंगी। हालांकि, कुछ सामान जैसे गैर-इकोनॉमी एयर टिकट 18% स्लैब में जा सकते हैं।
मिडिल और लोअर क्लास को कैसे फायदा?
- सस्ती होंगी जरूरी चीजें: रोजमर्रा की वस्तुओं पर टैक्स 12% से घटकर 5% होने से मध्यम और निम्न आय वर्ग की जेब पर बोझ कम होगा।
- बचत बढ़ेगी: उदाहरण के लिए, अगर 1,000 रुपये की नमकीन पर पहले 120 रुपये टैक्स लगता था, अब यह घटकर 50 रुपये हो सकता है।
- पारदर्शिता और आसानी: टैक्स सिस्टम सरल होने से कारोबारियों को कम जटिलता का सामना करना पड़ेगा, जिसका फायदा उपभोक्ताओं को मिल सकता है।
उदाहरण: क्या-क्या सस्ता होगा?
| वस्तु/सेवा | वर्तमान टैक्स | संभावित नया टैक्स |
|---|---|---|
| पैकेज्ड फूड (नमकीन, बिस्किट) | 12% | 5% |
| फुटवियर (1,000 रुपये से कम) | 12% | 5% |
| होटल रूम (7,500 रुपये से कम) | 12% | 5% या 18% |
| एयर टिकट (गैर‑इकोनॉमी) | 12% | 18% |
सरकार और कारोबारियों को क्या फायदा?
- सरल टैक्स सिस्टम: 12% स्लैब हटने से टैक्स ढांचा आसान होगा, जिससे कारोबारियों को क्लासिफिकेशन और अनुपालन में आसानी होगी।
- राजस्व में संतुलन: सरकार का दावा है कि यह बदलाव राजस्व-तटस्थ (revenue-neutral) होगा, यानी राज्यों और केंद्र को टैक्स आय पर असर नहीं पड़ेगा।
- वैश्विक मानकों के अनुरूप: मध्यस्थ सेवाओं पर टैक्स नियमों में बदलाव से भारतीय कर प्रणाली अंतरराष्ट्रीय मानकों के करीब आएगी।
कब लागू होगा यह बदलाव?
GST काउंसिल की अगली बैठक जुलाई 2025 में हो सकती है। अगर सभी राज्य सहमत होते हैं, तो मार्च 2026 तक नया टैक्स ढांचा लागू हो सकता है।
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