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Google Pay ने यूजर्स को दिया तगड़ा झटका, अब पेमेंट करना पड़ेगा महंगा, जानें कितने देने होंगे एक्स्ट्रा चार्ज?

Google Pay Payment Charges: अगर आप भी डिजिटल पेमेंट के लिए गूगल पे का यूज करते हैं, तो यह खबर आपके लिए है। हाल ही में गूगल पे ने एक नया नियम लागू किया है। अब अगर आप क्रेडिट या डेबिट कार्ड से बिजली, गैस जैसे बिल भरते हैं, तो आपको थोड़ा ज्यादा पैसा देना होगा। यानी अब गूगल पे से बिल पेमेंट करना आपकी जेब पर भारी पड़ेगा!

google pay

क्रेडिट या डेबिट कार्ड से पेमेंट पर देना होगा एक्स्ट्रा चार्ज (Google Pay Extra Charges)

गूगल पे की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार, कंपनी ने बिल की रकम का 0.5% से 1% तक एक्स्ट्रा चार्ज लेना शुरू कर दिया है, और इस पर जीएसटी भी लगेगा। लेकिन अच्छी बात यह है कि अगर आप यूपीआई (UPI) से जुड़े बैंक खाते से पेमेंट करते हैं, तो आपको कोई एक्स्ट्रा पैसा नहीं देना होगा। इससे उन लोगों पर ज्यादा असर पड़ेगा जो कार्ड से बिल भरते हैं।

कंपनियों की बढ़ती लागत और मुनाफे की कोशिश

इस बदलाव को डिजिटल पेमेंट कंपनियों के बीच एक आम बात के तौर पर देखा जा रहा है। कंपनियां चाहती हैं कि यूपीआई से होने वाले ज़्यादा पेमेंट से उन्हें फायदा हो। जानकारों का कहना है कि यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि डिजिटल पेमेंट के बढ़ते इस्तेमाल के बीच कंपनियां अपना काम अच्छे से चला सकें। बता दें कि गूगल पे का यूपीआई मार्केट के लगभग 37% हिस्से पर कब्ज़ा करता है। कंपनी ने जनवरी 2025 में 8.26 ट्रिलियन रुपये का लेन-देन किया, जो सिर्फ फोनपे से पीछे है।

अन्य कंपनियों द्वारा लागू शुल्क

गूगल पे के अलावा, फोनपे और पेटीएम जैसी बड़ी पेमेंट कंपनियों ने भी ऐसे ही नियम लागू किए हैं। फोनपे पानी और गैस के बिलों पर कार्ड से पेमेंट करने पर एक्स्ट्रा चार्ज लेता है, जबकि पेटीएम यूपीआई रिचार्ज और बिल पेमेंट पर 1 रुपये से 40 रुपये तक का प्लेटफॉर्म चार्ज लेता है।

यूपीआई लेन-देन की लागत और सरकारी नियम

यूपीआई से होने वाले लेन-देन को चलाने में कंपनियों को काफी खर्चा आता है। 2024 में, यूपीआई लेन-देन का कुल खर्चा लगभग 12,000 करोड़ रुपये था, जिसमें 4,000 करोड़ रुपये 2,000 रुपये से कम के छोटे लेन-देन के लिए थे। डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए, सरकार ने 2020 से 2,000 रुपये से कम के यूपीआई लेन-देन पर कोई एक्स्ट्रा चार्ज नहीं लगाने का आदेश दिया है। 2,000 रुपये से ज़्यादा के लेन-देन पर 1.1% का मर्चेंट चार्ज लगता है।

भारत में बढ़ा यूपीआई का क्रेज

इन बदलावों के बावजूद, भारत में यूपीआई का इस्तेमाल बहुत तेज़ी से बढ़ रहा है। जनवरी 2025 में, यूपीआई से 16.99 बिलियन लेन-देन हुए, जिनकी कुल रकम 23.48 ट्रिलियन रुपये थी। यह दिसंबर 2024 की तुलना में 1.55% ज़्यादा और रकम में 1% ज़्यादा है, और हर साल लेन-देन की संख्या 39% बढ़ रही है।

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