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Gold Silver Price: गोल्ड सिल्वर ETF में मची तबाही! 20% क्रैश,निवेशकों को बड़ा झटका,आम आदमी को क्या लेना-देना?

Gold Silver Price ETF: सोना और चांदी की कीमतों में आई तेज गिरावट अब सिर्फ सर्राफा बाजार तक सीमित नहीं रही। इसका सीधा असर गोल्ड और सिल्वर ETF पर भी दिखने लगा है। सोमवार 2 फरवरी को हालात ऐसे रहे कि कई सिल्वर ETF एक ही दिन में 18 से 20 प्रतिशत तक टूट गए। शेयर बाजार पहले से दबाव में है और ऐसे समय में कीमती धातुओं से जुड़े ETF का इस तरह लुढ़कना निवेशकों के लिए दोहरा झटका साबित हुआ।

सोना-चांदी में अचानक इतनी बड़ी गिरावट क्यों आई?(Gold Silver Price Crash Reasons)

सोमवार (2 फरवरी) सुबह मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर कीमती धातुओं में बिकवाली का दबाव साफ नजर आया। अप्रैल एक्सपायरी वाला गोल्ड फ्यूचर्स करीब 3 प्रतिशत गिरकर 1,43,335 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। गौर करने वाली बात यह है कि पिछले 29 जनवरी को ही सोने ने 1,93,096 रुपये प्रति 10 ग्राम का ऑल-टाइम हाई बनाया था। वहां से अब तक इसमें करीब 26 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है।

Gold Silver Price ETF

चांदी की हालत इससे भी ज्यादा खराब रही। मार्च एक्सपायरी वाला सिल्वर फ्यूचर्स 6 प्रतिशत टूटकर 2,49,713 रुपये प्रति किलो पर आ गया। यह अपने हालिया रिकॉर्ड 4,20,048 रुपये प्रति किलो से करीब 41 प्रतिशत नीचे है। मई एक्सपायरी वाला सिल्वर फ्यूचर्स भी 2,65,502 रुपये प्रति किलो तक फिसल गया।

ETF में गिरावट इतनी तेज क्यों हुई। (Gold Silver ETF Fall)

  • सोने और चांदी की कीमतें जैसे ही टूटीं, ETF में भारी बिकवाली शुरू हो गई। जिन सिल्वर ETF में बीते महीनों में जबरदस्त तेजी आई थी, वही अब निवेशकों पर सबसे भारी पड़े। एडलवाइस सिल्वर ETF करीब 20 प्रतिशत गिरकर लोअर सर्किट पर पहुंच गया। एक्सिस सिल्वर ETF में भी लगभग इतनी ही गिरावट दर्ज की गई।
  • यूटीआई सिल्वर ETF, डीएसपी सिल्वर ETF, आदित्य बिड़ला सन लाइफ सिल्वर ETF और कोटक सिल्वर ETF जैसे फंड भी करीब 20 प्रतिशत तक टूट गए। मिराए एसेट, मोतीलाल ओसवाल और एचडीएफसी सिल्वर ETF में 19 प्रतिशत तक की गिरावट देखने को मिली। वहीं आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल, निप्पॉन इंडिया, एसबीआई और टाटा सिल्वर ETF भी 18 प्रतिशत तक फिसल गए।
  • गोल्ड ETF भी इस दबाव से नहीं बच पाए। आदित्य बिड़ला सन लाइफ और मोतीलाल ओसवाल गोल्ड ETF 9 प्रतिशत से ज्यादा टूटे। आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल और मिराए एसेट गोल्ड ETF में करीब 8 प्रतिशत की गिरावट रही।

गोल्ड और सिल्वर ETF क्या होते हैं और आम आदमी से इनका क्या लेना-देना है?

  • गोल्ड और सिल्वर ETF दरअसल ऐसे निवेश विकल्प होते हैं, जिनके जरिए कोई भी व्यक्ति बिना सोना या चांदी खरीदे, उनकी कीमतों में निवेश कर सकता है। ETF शेयर बाजार में ट्रेड होते हैं और इनकी कीमत सीधे सोने या चांदी के भाव से जुड़ी होती है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि आम आदमी को गहने या सिक्के रखने की झंझट नहीं रहती, न ही चोरी या स्टोरेज का डर होता है।
  • आज बहुत से लोग शादी, भविष्य की जरूरतों या महंगाई से बचाव के लिए ETF के जरिए धीरे-धीरे निवेश करते हैं। जब सोने-चांदी की कीमतें बढ़ती हैं तो ETF का मूल्य भी बढ़ता है और गिरावट आने पर नुकसान भी होता है। इसलिए गोल्ड-सिल्वर ETF की चाल यह बताती है कि आम निवेशकों की बचत और निवेश पर बाजार में चल रही उठापटक का सीधा असर पड़ रहा है।
  • ETF में आई गिरावट का असर सीधे उन लोगों पर पड़ता है जिन्होंने गोल्ड या सिल्वर ETF के जरिए निवेश किया है। इसके अलावा इसका संकेत यह भी है कि फिजिकल गोल्ड और सिल्वर के दामों में आगे और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। शादी या निवेश के लिए खरीदारी करने वालों के लिए यह मौका भी हो सकता है और जोखिम भी।

निवेशकों को अब क्या करना चाहिए। (Gold Silver ETF Strategy)

बोनांजा के रिसर्च एनालिस्ट अभिनव तिवारी का मानना है कि यह गिरावट किसी बड़े ट्रेंड रिवर्सल का संकेत नहीं है। इसे ओवरबॉट बाजार के ठंडा होने की प्रक्रिया के तौर पर देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक लॉन्ग टर्म में सोना और चांदी अब भी मजबूत बने हुए हैं। केंद्रीय बैंकों की खरीद, चांदी में सप्लाई की कमी और वैश्विक तनाव आगे चलकर इन धातुओं को सहारा दे सकते हैं।

मिराए एसेट इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स इंडिया के फंड मैनेजर सिद्धार्थ श्रीवास्तव का कहना है कि चांदी में आई बहुत तेज तेजी के बाद करेक्शन जरूरी था। वे निवेशकों को सलाह देते हैं कि पोर्टफोलियो में कीमती धातुओं का वजन संतुलित रखें और जल्दबाजी में फैसले न लें। फिलहाल रिस्क-रिवॉर्ड के लिहाज से सोना, चांदी के मुकाबले बेहतर विकल्प दिखता है।

निवेशकों को अब क्या करना चाहिए? (Gold Silver ETF Strategy)

मनकंट्रोल के मुताबिक बोनांजा के रिसर्च एनालिस्ट अभिनव तिवारी का मानना है कि यह गिरावट किसी बड़े ट्रेंड रिवर्सल का संकेत नहीं है। इसे ओवरबॉट बाजार के ठंडा होने की प्रक्रिया के तौर पर देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक लॉन्ग टर्म में सोना और चांदी अब भी मजबूत बने हुए हैं। केंद्रीय बैंकों की खरीद, चांदी में सप्लाई की कमी और वैश्विक तनाव आगे चलकर इन धातुओं को सहारा दे सकते हैं।

एक अन्य एक्सपर्ट का कहना है कि चांदी में आई बहुत तेज तेजी के बाद करेक्शन जरूरी था। वे निवेशकों को सलाह देते हैं कि पोर्टफोलियो में कीमती धातुओं का वजन संतुलित रखें और जल्दबाजी में फैसले न लें। फिलहाल रिस्क-रिवॉर्ड के लिहाज से सोना, चांदी के मुकाबले बेहतर विकल्प दिखता है।

अमेरिका से आई खबरों ने बाजार को क्यों डराया? (Global Factors Impact)

एक बड़ी वजह अमेरिका से आई खबरें भी रहीं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा केविन वॉर्श को फेडरल रिजर्व का अगला चेयरमैन बनाए जाने के ऐलान के बाद बाजार में चिंता बढ़ गई। केविन वॉर्श को ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख रखने वाला माना जाता है। आशंका है कि अगर अमेरिका में ब्याज दरें ऊंची रहीं तो सोना और चांदी जैसी गैर-ब्याज देने वाली संपत्तियों की चमक फीकी पड़ सकती है।

इसके अलावा CME ग्रुप द्वारा गोल्ड और सिल्वर फ्यूचर्स पर मार्जिन बढ़ाने के फैसले ने भी गिरावट को तेज कर दिया। इससे ट्रेडर्स पर अतिरिक्त पूंजी डालने का दबाव बढ़ गया और बिकवाली और तेज हो गई।

निवेश से पहले क्या सावधानी जरूरी है? (Investment Disclaimer)

सोना और चांदी लंबे समय के निवेश माने जाते हैं। मौजूदा गिरावट डराने वाली जरूर है, लेकिन फैसला लेने से पहले अपनी जरूरत, निवेश अवधि और जोखिम क्षमता को समझना बेहद जरूरी है। किसी भी तरह के निवेश से पहले सर्टिफाइड फाइनेंशियल एक्सपर्ट की सलाह लेना समझदारी होगी।

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