'दो बार मौत को करीब से देखा फिर भी, एक बार किडनैपिंग हुई...' गौतम अडानी ने खोला बड़ा राज
भारत के शीर्ष अरबपति उद्योगपति गौतम अडानी ने खुलासा किया है कि कैसे नवंबर 2008 में 26/11 के मुंबई आतंकवादी हमलों के दौरान वह ताज होटल ताज में फंस गए थे और उनकी जान बाल-बाल बची।

उद्योगपति और दुनिया के सबसे तीसरे अमीर आदमी गौतम अडानी ने खुलासा किया है दो बार उनकी जान जाते-जाते बची है। शनिवार (7 जनवरी) को भारत के सबसे प्रतिष्ठित टेलीविजन शो ''आप की अदालत'' में उद्योगपति गौतम अडाणी ने 26/11 के हमले की भयानक घटना को याद किया और कहा कि इस अटैक में उनकी जान जाते-जाते बची है। उन्होंने कैसे नवंबर 2008 में 26/11 के मुंबई आतंकवादी हमलों के दौरान वह होटल ताज से निकलने में सफल हुआ। गौतम अडानी ने एक किडनैपिंग का भी जिक्र किया।

'मैं ताज होटल में आतंकी हमले के वक्त दोस्तों के साथ...'
गौतम अडानी ने बताया कि जब 26 नवंबर 2008 को मुंबई के ताज होटल में जब हमला हुआ था तो वह उस वक्त अंदर होटल में दोस्तों के साथ मौजूद थे। गौतम अडानी ने कहा, ''जब पहली राउंड में फायरिंग हुई थी तो उसे मैने अपनी आंखों से देखा था। हमले के 10 घंटे तक मैं उसी होटल में था।''

'मेरे दुबई से दोस्त आए हुए थे...'
गौतम अडानी ने घटना को याद करते हुए कहा, '' मैं ताज होटल में अपने दुबई स्थित दोस्तों के साथ एक बिजनेस मीटिंग कर रह था। मेरे दोस्त दुबई से मुंबई आए हुए थे। हमारी मीटिंग चल रही थी। बिल देने के बाद मैं होटल से बाहर निकलने वाला था, जब मेरे कुछ दोस्तों ने मुझसे एक और बैठक के लिए कहा। मैं दोबार मीटिंग के लिए बैठ गया था। रेस्तरां जहां हमने रात का खाना पूरा किया था। हमने बाद में, हमने एक कप कॉफी के साथ बैठक फिर से शुरू की।''

'होटल के कर्मचारी हमे किचन में ले गए...'
गौतम अडानी ने कहा जैसे ही हमने कॉफी के साथ दूसरी बैठक शुरू की। अप्रत्याशित रूप से, मुझे पता चला कि होटल पर आतंकवादियों ने हमला किया था। कुछ मिनटों के बाद, होटल के कर्मचारी मुझे पीछे के दरवाजे से रसोई में ले गए। इस बात को याद करना मेरे लिए बहुत मुश्किल है। असल में ताज होटल के स्टाफ बहुत ही समर्पित हैं।''

'जब मेरी किडनैपिंग हुई...'
गौतम अडानी ने इसी इंटरव्यू में बताया था कि 90 के दशक में उनका अपहरण हुआ था, जिसका सदमा उन्हें बहुत तेज लगा था। उन्होंने कहा कि हर किसी की जिंदगी में कुछ वक्त ऐसा आता है, जिसे हमें भूलकर आगे बढ़ना चाहिए। गौतम अडानी ने कहा, '' मैंने जिंदगी में दो बार मौत को सामने से देखा और ये भगवान का आशीर्वाद है कि मैं बाल-बाल बच गया।''

'उस रात भी मैं अच्छी तरह सो नहीं पाया '
गौतम अडानी ने कहा, ''मेरा स्वभाव है कि हर परिस्थिति के हिसाब से खुद को जल्दी से जल्दी ढाल सकूं। जो हमारे हाथ में नहीं है, उसके लिए हमें चिंता नहीं करनी चाहिए।'' गौतम अडानी ने कहा, ''अपहरणकर्ताओं ने मुझे पकड़ने के अगले दिन छोड़ दिया था, लेकिन उस रात भी मैं अच्छी तरह सो नहीं पाया था।''












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