जानिए UPS कैसे OPS, NPS से है अलग, किसमे है ज्यादा फायदा
केंद्र सरकार ने नई पेंशन सेवा UPS (Unified Pension Scheme) यानि एकीकृत पेंशन योजना का ऐलान किया है। इस योजना के तहत जिन कर्मचारियों ने 25 वर्ष की सेवा पूरी की है, उन्हें आखिरी 12 सैलरी के मूल वेतन का औसतन 50 फीसदी पेंशन आजीवन दी जाएगी।
केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत यूपीएस पुरानी पेंशन योजना (OPS) की तरह है और यह 1 अप्रैल, 2025 से प्रभावी होगी। यूपीएस में कर्मचारी अपने वेतन का 10% योगदान देंगे, जबकि सरकार 18.5% जोड़ेगी। जो लोग 2004 के बाद सेवा में शामिल हुए हैं, वो भी राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) से यूपीएस में स्विच कर सकते हैं।

अटल सरकार का फैसला पलटा
गौर करने वाली बात है कि 21 वर्ष पहले अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने ही न्यू पेंशन स्कीम की शुरुआत की थी। लेकिन अब मोदी सरकार ने उसे पलटते हुए ओपीएस लाने का ऐलान किया है।
ओपीएस और एनपीएस वालों को भी मिलेगा विकल्प
पहले कर्मचारियों को ओल्ड पेंशन स्कीम और न्यू पेंशन स्कीम में से एक को चुनने का विकल्प मिलता था, इसी तरह से अब कर्मचारियों को न्यू पेंशन स्कीम और यूपीएस में से एक को चुनने का विकल्प मिलेगा।
यूपीएस का सबसे बड़ा लाभ यह है कि कर्मचारियों को महंगाई बढ़ने के हिसाब से डियरनेस हाइक मिलेगी। जबकि कर्मचारी की मृत्यु होने पर परिवार को तत्काल 60 फीसदी की सुरक्षा गारंटी मिलेगी। साथ ही उन्हें ग्रैच्युटी और एक मुश्त सुपरएनुएशन भी मिलेगा।
यूपीएस (Unified Pnsion Scheme)
आखिरी के 12 महीनों के मूल वेतन का 50 फीसदी पेंशन मिलेगा
सेवा के 25 वर्ष पूरे होने जरूरी हैं।
अगर 25 वर्ष पूरे नहीं किए हैं तो पेंशन उसी हिसाब से बनेगी
कर्मचारी की मृत्यु होने पर परिवार को पेंशन का 60 फीसदी त्वरित मिलेगा
10 साल की नौकरी पूरी की तो न्यूनतम 10,000 रुपए की पेंशन जरूर मिलेगी
कर्मचारी का योगदान 10 फीसदी
सरकार का योगदान 18.5 फीसदी
एनपीएस (National Pension Scheme)
कर्मचारी अपने अनुसार योगदान दे सकते हैं, बाजार के पर्फॉरमेंस के आधार पर मिलता है लाभ
कर्मचारी मूल वेतन और डीए का 10 फीसदी योगदान देते हैं
सरकार 14 फीसदी का योगदान देती है
कोई भी कर्मचारी एनपीएस में न्यूनतम 500 रुपए से अकाउंट खोल सकता है
टियर 1 में मैंडेटरी अकाउंट होता है, जिसमे रिटायर होने के बाद टैक्स लाभ मिलता है
टियर 2 वैकल्पिक अकाउंट है, जिसमे कर्मचारी अपने अनुसार पैसे निकाल सकते हैं, लेकिन इसपर टैक्स लाभ नहीं मिलता
ओपीएस (Old Pension Scheme)
आखिरी सैलरी के आधार पर मासिक पेंशन मिलता है
कर्मचारियों को पेंशन में योगदान नहीं देना होता है
रिटायरमेंट के बाद आखिरी सैलरी का 50 फीसदी पेंशन मिलती है
पेंशन पूरी तरह से केंद्र सरकार वहन करती है
सिर्फ उन कर्मचारियों के लिए है जो 1 जनवरी 2004 से पहले नौकरी में शामिल हुए
महंगाई भत्ते में बदलाव के चलते समय-समय पर पेंशन में बदलाव होता है।
पेंशन पर कोई टैक्स नहीं
किस पेंशन स्कीम में है फायदा
अगर तीनों ही स्कीम की तुलना करें तो तीनों ही अलग-अलग फायदे और नुकसान के साथ आती हैं। ऐसे में यह कर्मचारी पर निर्भर करता है कि वह किस वर्ष सेवा में आया और वह कब रिटायर होने वाला है।
पुरानी पेंशन स्कीम का फायदा यह है कि उसमे कर्मचारी को पेंशन में कोई योगदान नहीं देना होता है, पूरा खर्च खुद केंद्र सरकार वहन करती है, जिसकी वजह से सरकार पर काफी बोझ पड़ता है। हालांकि सरकार के लिहाज से यह काफी खर्चीली योजना है लेकिन कर्मचारियों के लिहाज से उनके लिए काफी फायदेमंद है।












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