सरकार ने बदला FDI नियम तो चीन के निवेशकों ने भारत को लेकर लिया बड़ा फैसला

नई दिल्ली। चीनी उद्यम पूंजी निवेशक भारत की नई विदेशी प्रत्यक्ष निवेश नीति के बारे में तेजी से चिंतित हो रहे हैं, क्योंकि पिछले महीने सरकार ने आदेश दिया था कि भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देशों के सभी निवेशों को निवेश से पूर्व सरकार की स्वीकृति अनिवार्य होगी।

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मामले पर दो निवेशकों ने बताया कि देश में सौदा प्रवाह पहले से ही प्रभावित है। कुछ निवेशकों ने अपनी टर्म शीट को भी वापस ले लिया है। नाम न छापने की शर्त पर निवेशकों ने कहा कि वे पॉलिसी में बदलाव पर सरकार से स्पष्टीकरण की प्रतीक्षा कर रहे थे।

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दरअसल, वित्त मंत्रालय ने गत 22 अप्रैल को विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत नीति में बदलाव को अधिसूचित किया। पिछले कुछ वर्षों में प्रमुख उद्यम पूंजी फर्म मसलन शुनवेई कैपिटल, फोसुन आरजेड कैपिटल, सीडीएच इनवेस्टमेंट, हिलहाउस कैपिटल और मोर्निंगसाइड वेंचर्स ने एशिया के तीसरे सबसे बड़े अर्थव्यवस्था क्षेत्र, जहां वे सबसे बड़े ट्रेडरर के रूप में उभरे हैं, सौदों को पक्का करने के लिए अपने स्थानीय कार्यालयों बनाए हैं और निवेश पेशेवरों को काम पर रखा है।

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गौरतलब है उद्यम पूंजी निवेशक के अलावा भारत में अलीबाबा ग्रुप और टेनसेंट होल्डिंग्स जैसे दैत्याकार चीनी इंटरनेट से बड़ी रकम आती है, जिन्होंने भारत के सबसे सफल स्टार्टअप्स में से कुछेक में लाखों डॉलर का निवेश किया है, जिसमें पेटीएम, ओला, बायजू और ड्रीम 11 के नाम प्रमुख हैं। लेकिन FDI नियमों ने उनके नए और पुराने दोनों ही निवेश अब सरकार के दायरे में आएगा।

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कई भारतीय स्टार्टअप में सीधे या बिचौलियों के माध्यम से निवेश कर चुके चीनी उद्यम पूंजी फर्मों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा कि वे देश के नीति निर्माताओं से मामले पर अधिक स्पष्टता की प्रतीक्षा कर रहे थे। भारत में एक चीनी वीसी फंड में वरिष्ठ कार्यकारी ने कहा कि इस बिंदु पर उत्तर की तुलना में अधिक प्रश्न हैं।

उनमें से कुछ निवेशकों ने अनिश्चितताओं के कारण अपनी टर्म शीट वापस ले ली है। ऐसी परिस्थितियों में हम अपने एलपी (लिमिटेड पार्टनर्स) या हम हमारी निवेश समितियों को कैसे डील करते हैं?

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वेंचर कैपिटलिस्ट अधिक निवेश-अनुकूल परिदृश्य के लिए बुलावे की प्रतीक्षा कर रहे हैं और इंगित किया है कि यदि स्थिति नहीं बदलती है या यदि सौदे फास्ट ट्रैक नहीं होते हैं, तो पूंजी को अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं में मोड़ा जा सकता है।

एक दूसरे निवेशक ने कहा कि इंडोनेशिया और फिलीपींस जैसे देश उनके लिए पहले से ही निवेश स्थल हैं, लेकिन उन पर मध्यम से लेकर दीर्घकालिक के लिए अधिक ध्यान केंद्रित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि FDI की यह नीति काफी असहज प्रतीत होती है।

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उल्लेखनीय है चीनी निवेशकों ने पिछले दो वर्षों में भारत के डिजिटल ईको सिस्टिम में लगभग 600 करोड़ रुपए का निवेश किया है, क्योंकि वे अपनी पूंजी को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ते हुए उपभोक्ता बाजार में लगाना चाहते हैं।

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