Budget 2025: मिडिल क्लास टैक्स को लेकर चाहती है ये 5 बड़े बदलाव, क्या निर्मला सीतारमण उम्मीदों को करेंगी पूरा?
Budget 2025: देश का आम बजट पेश होने में कुछ ही दिन बाकी है। जैसे-जैसे बजट पेश होने के दिन नजदीक आ रहे हैं, देश का मिडिल क्लास टैक्स को लेकर सरकार से कुछ बदलाव चाहता है। एक्सपर्ट ने सरकार से इनकम टैक्स, ईवी और क्रिप्टो जैसे टैक्स के अलावा होम, कार और एजुकेशन लोन पर लगने वाले टैक्स पर ध्यान केंद्रित करते हुए कई सिफारिशें पेश की हैं।
इस लेख में हम टैक्स के उन बदलावों की बात करेंगे, जो इस बजट में आम जनता सरकार से चाहती है। इसमें सबसे बड़ा बदलाव मिडिल क्लास इनकम टैक्स स्लैब को लेकर चाहता है। इसके अलावा होम लोन, NPC, HRA जैसी चीजों में भी बदलाव की उम्मीद है। आइए जानें आम जनता किन 10 बड़े बदलावों की उम्मीद...इस बजट में कर रही है?

🔴 1. इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव
एक्सपर्ट के मुताबिक मिडिल क्लास टैक्सपेयर्स के लिए इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव करके सरकार को राहत देने पर सोचना चाहिए। एक्सपर्ट का मानना है कि इनकम टैक्स के तहत छूट सीमा बढ़ाकर मुद्रास्फीति को संबोधित करना चाहिए। कई टैक्सपेयर्स ₹10 लाख की सीमा की उम्मीद कर रहे हैं।
🔴 2. न्यू टैक्स रिजीम में होम लोन के लिए कुछ फायदा
एक्सपर्ट ने सुझान दिया है कि सरकार को न्यू टैक्स रिजीम के तहत लाभ देकर होम लोन को प्रमोट करना चाहिए।
🔴 3. घर खरीदने वालों को धारा 24(बी) के तहत होम लोन पर हाई इंटरेस्ट रेट को कम करके उनको लाभ दिया जा सकता है। एक्सपर्ट के मुताबिक भुगतान किए गए पूरे ब्याज के लिए कटौती की अनुमति दी जानी चाहिए, या 2 लाख रुपये की वर्तमान सीमा को बढ़ाकर 3 लाख रुपये किया जाना चाहिए।🔴 4. एनपीएस कटौती
एक्सपर्ट के मुताबिक एनपीएस कटौती सीमा को ₹50,000 से बढ़ाकर ₹1,00,000 करने पर विचार करना चाहिए।
🔴 5.टियर-2 शहरों के लिए HRA में छूट
एक्सपर्ट के मुताबिक टियर-2 शहरों में रहने वाले टैक्सपेयर्स के लिए 50% एचआरए छूट श्रेणी का विस्तार करने की सिफारिश की गई है।
Budget 2025 Key expectations: बजट से क्या है उम्मीद?
- बजट 2025 में कृषि क्षेत्र यानी एग्रीकल्चर बजट पर अधिक ध्यान दिए जाने की उम्मीद है।
- बजट 2025 में रोजगार और युवाओं पर ज्यादा फोकस किया जाएगा। इसके अलावा महिलाओं के लिए भी बड़े ऐलान हो सकते हैं।
- कुछ टैक्स सुधार भी हो सकते हैं, जैसे कि ओल्ड टैक्स रिजीम को खत्म करना और प्रति वर्ष ₹10 लाख से कम आय वालों के लिए जीरो टैक्स लागू करना।
- बढ़ती मुद्रास्फीति के आंकड़ों के कारण राजकोषीय समेकन और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाना एक और प्रमुख विषय होगा।












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