कोरोना काल में बैंकों ने MSME सेक्टर को दिया 1.30 लाख करोड़ रुपये का लोन: वित्त मंत्रालय
नई दिल्ली। वित्त मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि बैंकों ने एमएसएमई सेक्टर के लिए इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ईसीएलजीएस) के तहत लगभग 1,30,491 करोड़ रुपये के ऋण को मंजूरी दी है। कोरोना महामारी के कारण हुई आर्थिक मंदी के चलते एमएसएमई सेक्टर को भारी नुकसान पहुंचा है। हालाँकि, इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम के तहत 23 जुलाई तक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के लिए 82,065 करोड़ रुपये का लोन दिया गया है।

यह योजना वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा मई में घोषित 20 लाख करोड़ रुपये के भारत-अभियान के सबसे बड़े राजकोषीय घटक है। इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम के नए आंकड़े वित्त मंत्रालय द्वारा जारी किए गए हैं। इसमें सभी 12 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, 22 निजी क्षेत्र के बैंकों और 23 गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों द्वारा वितरित की गई राशि को शामिल किया गया है।
वित्त मंत्री ने एक ट्वीट में कहा कि, 23 जुलाई 2020 तक सार्वजनिक बैंको और निजी बैंकों द्वारा 100 प्रतिशत आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना के तहत कुल राशि 1,30,491.79 करोड़ रुपये स्वीकृत की गई है, जिसमें से 82,065.01 करोड़ रुपये पहले ही वितरित किए जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि, ईसीएलजीएस के तहत सार्वजनिक बैंको द्वारा स्वीकृत ऋण राशि बढ़कर 71,818.16 करोड़ रुपये हो गई, जिसमें से 47,631.41 करोड़ रुपये का वितरण 23 जुलाई तक किया जा चुका है।
वहीं, निजी क्षेत्र के बैंकों ने 58,673 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की है और 34,433 करोड़ रुपये का वितरण किया है। वित्तमंत्री सीतारमण ने कहा कि, 20 जुलाई 2020 की तुलना में स्वीकृत ऋणों की संचयी राशि में 2,909.19 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है और सार्वजनिक बैंकों और निजी क्षेत्र के दोनों बैंकों द्वारा वितरित ऋणों की संचयी राशि में 4,451.95 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है।












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