बाबा Vs बाबा: अपने ही पुराने साथी के खिलाफ कोर्ट पहुंचे बाबा रामदेव, कॉपीराइट के उल्लंघन का है मामला
नई दिल्ली। योगगुरु बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि आयुर्वेद जहां एफएमसीजी मार्केट में तेजी से अपनी जगह मजबूत करने में जुटी हुई है, वहीं बाबा के ही पूर्व पार्टनर ने उनकी टेंशन बढ़ा दी है। इसके खिलाफ बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि आयुर्वेद कोर्ट पहुंची है। ईटी में छपी रिपोर्ट के मुताबिक पतंजलि आयुर्वेद ने कंपनी के पूर्व पार्टनर रहे स्वामी करमवीर की कंपनी को ट्रेडमार्क का कथित तौर पर उल्लंघन करने के मामले में कोर्ट में घसीटा है।

कल्पामृत आयुर्वेद के खिलाफ याचिका
पतंजलि आयुर्वेद ने दिल्ली हाईकोर्ट में स्वामी करमवीर की कंपनी कल्पामृत आयुर्वेद के खिलाफ याचिका दायर की है। पतंजलि आयुर्वेद का कहना है कि महर्षि पतंजलि परिवार की यूनिट कल्पामृत आयुर्वेद योगगुरु स्वामी करमवीर की अगुवाई में संचालित है। ईटी में छपी रिपोर्ट के मुताबिक कल्पामृत आयुर्वेद की ओर से पेश किए गए कई ऐसे उत्पाद हैं जिनका नाम, लोगो और पैकेजिंग पतंजलि आयुर्वेद के प्रोडक्ट्स जैसी ही है। ऐसे में पतंजलि आयुर्वेद ने कल्पामृत आयुर्वेद पर ट्रेडमार्क, कॉपीराइट के कथित तौर पर उल्लंघन के खिलाफ में याचिका दायर की है। इस मामले में अगली सुनवाई 7 मई को होगी।

स्वामी करमवीर रहे हैं बाबा रामदेव के पूर्व पार्टनर
कल्पामृत आयुर्वेद यूनिट का संचालन स्वामी करमवीर करते हैं। जानकारी के मुताबिक स्वामी करमवीर, योगगुरु बाबा रामदेव के पुराने पार्टनर रह चुके हैं। 'दिव्य योग मंदिर ट्रस्ट' की स्थापना बाबा रामदेव, करमवीर और आचार्य बालकृष्ण ने साथ मिलकर की थी। अब इस ट्रस्ट का नाम पतंजलि योगपीठ हो गया है। पतंजलि आयुर्वेद का आरोप है कि कल्पामृत आयुर्वेद उनके प्रोडक्ट्स की पैकेजिंग की बिल्कुल कॉपी करके अपने उत्पाद मार्केट में उतार रहा है।

पतंजलि आयुर्वेद ने लगाए कई गंभीर आरोप
कंपनी के मुताबिक इससे पतंजलि की साख पर असर पड़ रहा है। कंपनी ने जिन प्रोडक्ट्स पर सवाल खड़े किए हैं उनमें टूथपेस्ट, शैम्पू, जूस और मसाले शामिल हैं। पतंजलि आयुर्वेद के प्रवक्ता एसके तिजारावाला ने बताया कि कल्पामृत अपने कई उत्पाद में महर्षि पतंजलि परिवार के प्रोडक्ट्स की पैकेजिंग और कॉपी कर रहा है। पतंजलि की तरह ही कल्पामृत आयुर्वेद हरे और केसरिया रंग के लोगो का इस्तेमाल कर रहा है। उन्होंने कहा कि ये लोगो बिल्कुल पतंजलि की तरह नजर आ रहा है।

कल्पामृत कंपनी का कानूनी नोटिस मिलने से इंकार
एसके तिजारावाला ने बताया कि योगगुरु बाबा रामदेव ने पतंजलि नाम का रजिस्ट्रेशन 25 साल पहले ही करा लिया था। स्वामी करमवीर ने बाद में ट्रस्ट से इस्तीफा दे दिया था। हमारी शुरुआत 2006 में हुई जबकि स्वामी करमवीर की कंपनी ने 2015-16 में शुरू किया। कोर्ट के दस्तावेजों के मुताबिक पतंजलि ने मार्च 2017 में कल्पामृत कंपनी को कानूनी नोटिस भेजा था, हालांकि कल्पामृत फर्म के प्रवक्ता ने बताया कि उन्हें कोर्ट से किसी भी तरह का नोटिस नहीं मिला है। हमें इस मामले की कोई जानकारी भी नहीं है।
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