Anil Ambani: 40 हजार करोड़ केस में अनिल अंबानी को झटका, बॉम्बे HC ने हटाई रोक, बैंक कर सकेंगे ‘फ्रॉड’ घोषित
Anil Ambani Bombay High Court: रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी को 40 हजार करोड़ रुपये के कथित बैंक धोखाधड़ी मामले में बड़ा झटका लगा है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने 23 फरवरी को वह अंतरिम राहत आदेश रद्द कर दिया,जिसके तहत बैंकों को उनके खातों को 'फ्रॉड' घोषित करने की कार्रवाई से रोका गया था। अब संबंधित बैंक दोबारा प्रक्रिया शुरू कर सकेंगे।
मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम अंखड़ की डिवीजन बेंच ने दिसंबर 2025 में सिंगल बेंच द्वारा दिए गए स्टे ऑर्डर को "अवैध और त्रुटिपूर्ण" करार देते हुए खारिज कर दिया। यह अपील तीन सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और ऑडिट फर्म BDO इंडिया एलएलपी ने दायर की थी। अंबानी के वकीलों ने फैसले पर रोक लगाने की मांग की ताकि वे सुप्रीम कोर्ट जा सकें, लेकिन हाईकोर्ट ने यह मांग ठुकरा दी।

क्या था पूरा विवाद? (Fraud Classification Row)
दिसंबर 2025 में सिंगल बेंच ने इंडियन ओवरसीज बैंक, IDBI बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा को अनिल अंबानी और रिलायंस कम्युनिकेशंस के खातों को फ्रॉड घोषित करने से रोक दिया था। अदालत ने माना था कि फॉरेंसिक ऑडिट में कानूनी खामियां हो सकती हैं और RBI के अनिवार्य दिशा-निर्देशों का पालन नहीं हुआ।
अनिल अंबानी ने दलील दी थी कि BDO एलएलपी ऑडिट करने के योग्य नहीं थी, क्योंकि उसके साइन करने वाले चार्टर्ड अकाउंटेंट नहीं थे। उनका कहना था कि यह एक अकाउंटिंग कंसल्टेंसी फर्म है, ऑडिट फर्म नहीं।
बैंकों का पक्ष (Banks Appeal)
बैंकों ने हाईकोर्ट में कहा कि फॉरेंसिक ऑडिट पूरी तरह वैध है और उसमें फंड की हेराफेरी व दुरुपयोग के गंभीर निष्कर्ष दर्ज हैं। उन्होंने सिंगल बेंच के आदेश को "पर्वर्स" बताते हुए इसे रद्द करने की मांग की थी। अब डिवीजन बेंच के फैसले के बाद बैंक कानून के तहत आगे की कार्रवाई कर सकेंगे।
सुप्रीम कोर्ट और SIT (Investigation Update)
इसी महीने की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने जांच में देरी पर नाराजगी जताई थी। कोर्ट ने ED को विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का निर्देश दिया, ताकि कथित 40,000 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच तेज हो सके।
पिछले हफ्ते अनिल अंबानी ने अदालत को भरोसा दिलाया था कि वे बिना अनुमति देश नहीं छोड़ेंगे और ED व CBI की जांच में पूरा सहयोग करेंगे। अब हाई कोर्ट के ताजा फैसले के बाद मामला फिर निर्णायक मोड़ पर है। अगर बैंक खातों को आधिकारिक रूप से 'फ्रॉड' घोषित करते हैं, तो इससे कानूनी और कारोबारी दोनों स्तर पर असर पड़ सकता है।












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