बदल जाएगा 93 साल पुराना ये बैंक, खाताधारकों पर होगा सीधा असर
नई दिल्ली। बैंकिंग सेक्टर में एक के बाद एक विलय हो रहे हैं। पहले देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया(SBI)में 6 बैंकों का विलय हुआ। उसके बाद बैंक ऑफ बड़ौदा(Bank Of Baroda) में विजया बैंक(Vijaya Bank)और देना बैंक(Dena Bank) का विलय हुआ और बैंक ऑफ बड़ौदा देश की तीसरा सबसे बड़ा बैंक बन गया। अब एक और विलय की शुरुआत हो रही है। अब तमिलनाडु के 93 साल पुराने लक्ष्मी विलास बैंक के विलय होने जा रहा है। जानकारी के मुताबिक लक्ष्मी विलास बैंक का विलय मुंबई की हाउंसिंग फाइनेंस कंपनी इंडियाबुल्स(IndiaBulls) में होने जा रही है।

93साल पुराने इस बैंक का विलय
तमिलनाडु की बैंक लक्ष्मी विलास बैंक इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस में विलय होने जा रहा है। इस विलय से न केवल लक्ष्मी विलास बैंक के खाताधारकों को लाभ होगा बल्कि इस फैसले का असर इंडियाबुल्स के ग्राहकों को भी होगा। ग्राहकों और निवेशकों पर उसका सीधा असर होगा। इस विलय का ग्राहकों को फायदा होगा। लक्ष्मी विलास बैंक के बोर्ड ने इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस के साथ विलय को मंजूरी दे दी है। इस विलय के शर्तों के मुताबिक लक्ष्मी विलास बैंक के 100 शेयरों के बदले इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस के 14 शेयर मिलेंगे।

इस विलय से होगा क्या फायदा
अगर लक्ष्मी विलास बैंक का विलय इंडियाबुल्स में हो जाता है तो इससे लक्ष्मी विलास बैंक के ग्राहकों को आसानी से लोन मिलेगा। इस बैंक की 569 शाखाएं,1046 एटीएम, 3600 कर्मचारी है। विलय के बाद ये इंडियाबुल्स का हिस्सा बन जाएंगे। इस विलय से बैंक के ब्रांचों और एटीएम की संख्या बढ़ जाएगी। इतना ही नहीं चूंकी बैंक की ब्याज दर और इंडियाबुल्स की ब्याज दर में अंतर हैं इसलिए अनुमान है कि नए ग्राहकों के लिए ब्याज दर अलग हो सकती है।

बढ़ेगा खाताधारकों का काम
इस विलय के बाद खाताधारकों के अकाउंट में जमा पैसे पूरी तरह से सुरक्षित रहेंगे, लेकिन मर्जर के बाद उनका पेपरवर्क थोड़ा बढ़ जाएगा। उन्हें एक बार फिर से केवाईसी(KYC) करवाना पड़ सकता है। उन्हें अपना एटीएम, पासबुक, चेकबुक बदलवाना होगा। इस विलय से लक्ष्मी विलास बैंक की बैलेंसशीट में सुधार आएगा। बैंक के सीएआर में सुधार होगा। वहीं इस विलय से इंडियाबुल्स को दक्षिण भारत में पकड़ बनाने में मदद मिलेगी।












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