राजा की गंदी निगाहों से बचाने के लिए महिलाएं बनवाती हैं ब्लाउज जैसा टैटू, पढ़ें अनोखी प्रथा

नई दिल्ली। इन दिनों टैटू बनाना एक फैशन है। लोग शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर टैटू बनवाते हैं। कोई हाथ-पैर पर तो कोई आंख के भीतर टैटू बनवा रहा है, लेकिन आपको बता दें कि टैटू बनवाने की प्रथा आज से नहीं बल्कि सदियों से चलती आ रही है। आज वो फैशन बन गया है, पहले के वक्त वो जरूरत थी। महिलाएं अपनी सुरक्षा, अपनी पहचान के लिए अपने शरीर के अलग-अलग अंगों पर टैटू, जिसे गोदना कहा जाता था बनवाती थी। जो पहले जरूरत थी अब वो प्रथा बन गई। छत्तीसगढ़ की आदिवासी महिलाएं अपने शरीर के हिस्सों पर गोदना गुदवाती है। ऐसा करना उनकी परंपरा है, लेकिन ये प्रथा पहले उनकी जरूरत थी। इस प्रथा के पीछे एक अनोखी कहानी है....

 ब्लाउट की तरह गोदना

ब्लाउट की तरह गोदना


छत्तीसगढ़ की आदिवासी महिलाएं अपने शरीर पर गोदना गुदवाती थी, ताकि वो खुद को राजा की गंदी निगाहों से बचा सके। महिलाएं अपने और अपनी बेटियों के शरीर पर छाती और पीठ पर ब्लाउज के डिजाइन का गोदना गुदवाती थी, ताकि राजा की कुदृष्टि उनपर न पड़े और उनकी इज्जत बच जाए।

राजा से बचने के लिए गोदना

राजा से बचने के लिए गोदना

छत्तीसगढ़ के बैगा जनजाति की लड़कियां जैसे ही 10 साल की उम्र पार करती है उनके शरीर पर गोदना गुदवा दिया जाता है। कहा जाता है कि उनका एक राजा हैवान था। वो रोज अलग-अलग महिलाओं को हवस का शिकार बनाता था और उनके साथ संबंध बनाने के बाद पहचान के लिए उनके शरीर पर गोदना गुदवा देता था। राजा की इस हरकत से खुद को बचाने के लिए महिलाओं ने राजा के तरीके को ही अपना हथियार हना दिया और अपनी बेटियों और बहूओं के शरीर पर गोदना गुदवना शुरू कर दिया, ताकि राजा की नजरें उनपर न पड़े।

 दर्द सहकर बनवाती है गोदना

दर्द सहकर बनवाती है गोदना

यहां माना जाता है कि जिस महिला के शरीर पर गोदना है उस घर में पुरूष का प्रवेश वर्जित है। अगर गलती से कोई पुरूष प्रवेश कर जाता है तो वो पूरे जीवन सांभर का शिकार नहीं कर पाता है। गोदना गुदवाने के लिए महिलाएं और लड़कियां असीम पीड़ा सहती है। लड़कियों के पैर, जांघ, दर्दन, पीठ, छाती और फिर चेहरे पर गोदना गोदा जाता है। उम्र के मुताबिक शरीर के हिस्सों का चयन किया जाता है।

 आज भी है प्रथा

आज भी है प्रथा


छत्तीसगढ़ के बैजा जनजाति की महिलाएं आज भी अप नी इस प्रथा को लेकर चल रही है। यहां 12 से 20 साल के बीच लड़कियों के शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर गोदना बनाया जाता है। गांव की बुजुर्ग महिलाएं उन बच्चियों की मदद करती है। माना जाता है कि जो लड़की यहां गोदना नहीं गुदवाती उसे मरने के बाद स्वर्ग में भगवान के जहां तेज

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