वियाग्रा बैन होने से 'बौखलाए' पाकिस्तानी, अब छिपकली और बिच्छू का कर रहे इस्तेमाल, जानिए क्यों?
पाकिस्तान में आर्थिक मंदी के बीच भी कई ऐसे कारोबार हैं, जो चरम है। कामोत्तेजक दवाईयों के बैन के बाद देश में अब नए और देसी नुस्खों के कारोबार में तेजी देखी गई है।

Aphrodisiac Lizard Oil use in Pakistan: वियाग्रा बैन होने के बाद पाकिस्तान में कामोत्तेजक दवाओं का कारोबार तेज हो गया है। आर्थिक मंदी की मार झेल रहे देश में विपरीत परिस्थितियों के बावजूद पाकिस्तान में यौन क्षमता बढ़ाने वाली दवाओं की मांग कम नहीं हुई है। ऐसे में वहां अब वैकल्पिक देशी नुस्खों पर जोर है। छिपकली की एक खास प्रजाति के चर्बी के तेल की मांग पिछले दिनों की तुलना में काफी बढ़ी है।
पाकिस्तान में मंहगाई के बीच लोग खाने पीने की चीजें खरीद पाना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में छिपकली और बिच्छू की कीमत बढ़ गई है। हालांकि इन्हें मारने पर सरकार ने प्रतिबंध लगाया है। इसके बावजूद लोग 10 हजार रुपए का फाइन भरकर इन जीवों को पकड़कर मार रहे हैं और उनकी चर्बी से तेल निकालने का काम किया जा रहा है, वजह सिर्फ एक है कि छिपकली की चर्बी के तेल से बनने वाली कामोत्तेजक दवा की मांग सबसे अधिक है।
600-1200 रुपए में एक शीशी
इस तेल की मार्केट में बिक्री बहुत है। कीमत 600-1200 रुपए की शीशी है, जिसमें महज 100 से 150 एमएल तेल ही आता है। यौन क्षमता के अलावा भी इसे कई चीजों के इलाज में प्रयोग किया जाता है। छिपकली के तेल को जॉइंट पेन, बैक पेन और बाल झड़ने में भी कारगर बताया जाता है।
नीम हकीम का कारोबार बढ़ा
पाकिस्तान में मंहगाई के बीच उचित इलाजा का भी संकट है। ऐसे में लोग नीक हकीम के चक्कर में पड़ रहे हैं। यहां वियाग्रा बैन के बाद देसी नुस्खे कई अहमित बढ़ी है। देश के प्रमुख शहरों में इस कारोबार से जुड़े लोगों को जबरदस्त फायदा भी मिला है। छिपकली की चर्बी और बिच्छू के डंक को मिलाकर यौन शक्तिवर्धक तेल बनाया जाता है। दावा किया जाता है कि इसके सिर्फ पांच बूंद के इस्तेमाल से जादू जैसा असर दिखता है।












Click it and Unblock the Notifications