कोरोना रोकने के लिए टीचर 2 महीनों तक फैलाता रहा पानी, बिल देख स्कूल के उड़े होश
नई दिल्ली, 22 अप्रैल: दुनियाभर में कोरोना के मामलों में लगातार बढ़ोत्तरी देखने को मिल रही है। कोरोना वायरस का ज़्यादा प्रभाव ना हो इसलिए दुनिया के कई देशों ने स्कूलों में छुट्टी दे दी गई है। वहीं जहां स्कूल चल रहे हैं, वह स्कूलों की ओर से बचाव के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं। वहीं जापान में एक बेहद की हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। एक स्कूल का पानी बिल 20 लाख रुपए से अधिक आया है। एक पीछे एक टीचर की गलती सामने आई है।

कोरोनो वायरस संक्रमण को रोकने के लिए नल खुला छोड़ दिया
पूल रखरखाव के प्रभारी शिक्षक द्वारा कोरोनो वायरस संक्रमण को रोकने के लिए नल खुला छोड़ दिया। जिसका नतीजा ये हुआ कि स्कूल के ऊपर करीब 20 लाख रुपये का बिल हो गया। स्कूल के शिक्षक को लगा कि पानी बहने से कोरोना वायरस का असर नहीं होगा। इसलिए शिक्षक ने स्कूल के नल को खुला छोड़ दिया। मामला ये हुआ कि नल से पानी जून से लेकर सितंबर तक बहता रहा।

इस चक्कर में करीब 4 हज़ार टन पानी कर दिया बर्वाद
स्थानीय शिक्षा बोर्ड के अधिकारी अकीरा कोजिरी ने बताया कि,, सामान्य तौर पर, क्लोरीन और फ़िल्टरिंग मशीनें पूल के पानी की गुणवत्ता को बनाए रखती हैं, "लेकिन शिक्षक के दिमाग में ऐसा अजब गजब आईडिया आया कि नया पानी डालने से कोविड को रोकने में मदद मिलेगी। इस चक्कर में करीब 4 हज़ार टन पानी का इस्तेमाल सिर्फ 2 महीने में हुआ। इस वजह से स्कूल के ऊपर 20 लाख रुपये से अधिक का बिल आ गया।

स्थानीय प्रशासन जुर्माने के तौर मांग रहा है इतनी रकम
रिपोर्ट्स के मुताबिक स्कूल के अन्य स्टाफ सदस्यों ने कभी-कभी चालू नल को देखा तो उसे बंद कर दिया, लेकिन वह टीचर फिर उसे शुरू कर देता था। कोजिरी ने बताया कि, केवल दो महीनों में अनुमानित 4,000 टन अतिरिक्त पानी का उपयोग किया गया। जो पूल को 11 बार भरने के लिए पर्याप्त था। मध्य जापान के कानागावा प्रान्त के योकोसुका में स्थानीय अधिकारी अब शिक्षक और दो पर्यवेक्षकों से 35 लाख येन (27,000 डॉलर) के बिल का आधा भुगतान करने की मांग कर रहे हैं। स्कूल के कारण शहर के पानी की बर्बादी हुई है। ऐसे में ये तकलीफदेह है।












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