अल्ट्रासाउंट कराने गई गर्भवती ने डॉक्टर्स को किया हैरान! महिला के बच्चे के पेट में भी मिला बच्चा
Embryo in pregnant lady womb: जन्म देना और जन्म लेना दोनों ही इस संसार के नियम हैं। ऐसे में जन्म देना कोई हैरान करने वाला मामला नहीं है। महिलाओं का शरीर प्रकृति ने कुछ इस तरह से ही बनाया है कि वे अपने शरीर से एक और जिंदगी बना सकें। ये कुदरत का एक खूबसूरत नियम है। मगर कई बार जन्म लेने से जुड़े ऐसे हैरान कर देने वाले मामले सामने आते हैं, जिनपर यकीन कर पाना एक बार को मुश्किल ही हो जाए।
मामला है मध्यप्रदेश का, जहां एक महिला ने एक बच्चे को जन्म दिया। मगर बच्चे के पेट में भी कोई बच्चा पल रहा था। है ना काफी हैरान करने वाली बात। मगर ये सच है। असामान्य से इस मामले में महिला ने अपने नौवें महीने में अल्ट्रासाउंट करवाया तो पता चला कि नवजात के अंदर एक और भ्रूण है।

अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, नवजात शिशु को अब जिला अस्पताल के विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (एसएनसीयू) में एक्सपर्ट्स की देखरेख में रखा गया है। इस असाधारण स्थिति को ठीक करने के लिए सर्जरी की जा रही है। बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के रेडियोलॉजी विभाग के अध्यक्ष और प्रोफेसर डॉ. पीपी सिंह ने इस स्थिति को सुलझाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने बताया कि केसली की एक गर्भवती महिला ने उनके क्लिनिक में जांच करवाने के लिए संपर्क किया, जिसके बाद ये मामला सामने आया
मेडिकल कॉलेज में जांच के दौरान महिला के गर्भ में एक और बच्चा या टेराटोमा (एक प्रकार का ट्यूमर जिसमें ऊतक या अंग घटक होते हैं) का पता चला। इसके कारण मेडिकल टीम ने सलाह दी कि प्रसव मेडिकल कॉलेज में ही कराया जाए ताकि अधिक बारीकी से निगरानी की जा सके। हालांकि, आशा कार्यकर्ता के साथ पहुंची महिला ने सामान्य प्रसव के लिए केसली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लौटने का फैसला किया।
डॉ. सिंह ने बताया कि अल्ट्रासाउंड में शुरू में भ्रूण के पेट में गांठ दिखी थी, जिससे भ्रूण के भ्रूण अवस्था में होने की संभावना बढ़ गई थी। डॉपलर इमेजिंग से गांठ में रक्त की आपूर्ति का पता चलने पर इसकी पुष्टि हुई, जिससे पता चला कि वास्तव में बच्चे के अंदर एक और भ्रूण पल रहा था।
सागर जिले से सामने आया यह मामला चिकित्सा साइंस की जटिलताओं और आश्चर्यों को उजागर करता है। भ्रूण में भ्रूण की स्थिति इतनी दुर्लभ है कि प्रत्येक मामला मानव विकास और गर्भावस्था के दौरान होने वाली विसंगतियों के बारे में अहम जानकारी प्रदान करता है।
चिकित्सा समुदाय नवजात शिशु की स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा है, क्योंकि स्थिति नाजुक है। ये मामला न केवल भ्रूण में भ्रूण पर चिकित्सा के क्षेत्र में काफी कुछ सीखने पर बात करता है बल्कि ऐसे दुर्लभ मामलों की पहचान करने और उनका समाधान करने के बारे में भी सोचने पर मजबूर करता है।
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