Women Empowerment: चौथी कक्षा तक की पढ़ाई, 12 साल की उम्र में हुई शादी, मिली ये उपाधि
इंसान के अंदर अगर कुछ करने का जज़्बा हो तो वह हर मुश्किल कामों के आसानी से हल कर सकता है। कुछ करने का जुनून हो तो वह नामुमकिन को भी मुमकिन कर देता है। कुछ इसी तरह की कहानी 34 वर्षीय महिला जया देवी की है, जिन्होंने...
Women Empowerment: बिहार में महिलाएं पुरुषों से कम नहीं हैं, इस बात को मुंगेर ज़िला की रहने वाली जया देवी ने साबित कर दिखाया है। शुरुआती ज़िंदगी में मुश्किलों से जूझने वाली जया देवी आज बिहार की महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। उन्हें लोग 'पर्यावरण का पहरेदार' और 'ग्रीन लेडी ऑफ बिहार' की संज्ञा देते हैं। नक्सल प्रभावित जिला मुंगेर से ताल्लुक रखने वाली महिला जया देवी के संघर्ष की कहानी बहुत ही दिलचस्प है। उन्होंने कि किस तरह से बंगलवा गांव (धरहरा प्रखंड) से पूरे राज्य भर में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। आइए जानते हैं चौथी कक्षा तक पढ़ाई करने वाली महिला के ग्रीन लेडी ऑफ बिहार बनने तक का सफर। जया देवी ने सिर्फ बिहार में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी अपने देश का नाम रोशन किया है। वह दक्षिण कोरिया में आयोजित युवा कार्यकर्ता प्रशिक्षण कार्यक्रम में देश का प्रतिनिधित्व भी कर चुकी हैं।

जया देवी की 12 साल की उम्र में हुई शादी
इंसान के अंदर अगर कुछ करने का जज़्बा हो तो वह हर मुश्किल कामों के आसानी से हल कर सकता है। कुछ करने का जुनून हो तो वह नामुमकिन को भी मुमकिन कर देता है। कुछ इसी तरह की कहानी 34 वर्षीय महिला जया देवी की है, जिन्होंने शुरुआती ज़िंदगी में काफी परेशानियों का सामना किया लेकिनआज वह कई महिलाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत हैं। जया देवी बचपन से ही पढ़ने की शौकीन थी लेकिन गांव में बच्चियों के तालीम दिलाने पर ज़ोर नगीं दिया जाता था। लड़कियों की कम उम्र में शादी करवा दी जाती थी। इस वजह से जया देवी चौथी कक्षा तक ही तालीम हासिल कर पाई, वहीं 12 वर्ष में ही उनकी शादी करवा दी गई।

‘ग्रीन लेडी ऑफ बिहार’ जया देवी
'ग्रीन लेडी ऑफ बिहार' जया देवी की शादी गांव के ही लड़के के साथ करवा दी गई, जिसके बाद कमाने के लिए उनके पति मुम्बई चले। इसी दौरान जया देवी के पिता की मौत हो गई तो वह अपने मां के घर चली गई। जया देवी का परिवार बढ़ता गया, जिंदगी के हालात सुधरते गए, इन सब चीज़ों के बाद जया देवी ख़ुद को मुकम्मल नहीं मान रही थीं। वह अपने समाज के लिए कुछ नया और अलग करना चाहती थी। उस वक्त नक्सलियों काप्रभाव ग्रामीण क्षेत्रों में काफी था, इस वजह से गलत चीज़ों के खिलाफ कोई आवाज नहीं उठाता था। जया देवी को लगा कि अगर बुराइयों के खिलाफ़ आवाज नहीं उठाई गई तो युवती और महिलाओं के साथ ज़्यादती होती रहेगी।

जया देवी ने किया महिलाओं को जागरुक
जया देवी ने इसी सोच के साथ स्वयं सहायता समूह के काम करने की प्रक्रिया की टेरेनिंग ली। 15 दिनों की ट्रेनिंग के बाद जया देवी ने गांव की बच्चियों और महिलाओं को बचत करने की जानकारी दी। शुरुआत में उन्होंने हर रोज़ एक मुट्ठी अनाज बचाने के लिए महिलाओं को जागरूक किया। जया की बातों से प्रभावित होकर उनके साथ कई और महिलाएं जुड़ने लगी। इसके बाद सभी ने हर सप्ताह पांच रुपये बचाने का फ़ैसला लिया। इससे कामयाबी मिलने के बाद जया देवी ने काम का दायरा बढ़ाते हुए गांव में साक्षरता अभियान की शुरुआत की।

जया ने किसानों को भी पहुंचाई मदद
शिक्षा प्रसार अभियान के लिए उन्होंने स्थानीय लोगों के बच्चों से पुरानी किताबों को इकट्ठा किया। इसके बाद ज़रूरतमंद बच्चों के पुरानी किताबें बांटनी शुरू की। इस काम में स्थानीय लोगों ने उनकी काफी मदद की। इससे गांव के लोग शिक्षा हासिल करने के प्रति जागरुक हुए। इसके बाद जया देवी ने किसानों की बेहतरी के लिए कदम उठाए। उन्होंने देखा की सूखे की वजह से किसानों के फसल हर साल बर्बाद हो रहे हैं। इससे निजात के लिए उन्होंने एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट डिपार्टमेंट के लोगों से बारिश के पानी को स्टोर करवाने की सलाह दी। इसके साथ ही उन्होंने बंजर जमीन पर पेड़ भी लगवाए। वहीं उन्होंने 'रेन वाटर हार्वेस्टिंग' की ट्रेनिंग ली और ग्रामीणों को भी पानी बचाने का प्रशिक्षण दिया। जया देवी ने कई योजनाओं के तहत कई गावों में बारिश का पानी स्टोर करने के लिए तालाब, चेक डैम और पत्थर-मिट्टी के बांध भी बनवाए। इससे किसानों का काफी फायदा पहुंचा।

कई अवार्डों से हो चुकी हैं सम्मानित
जया देवी बिहार के मुंगेर ज़िला के छोटे गांव लेकर राष्ट्रीय स्तर तक पहचान बनाने के संघर्ष की कहानी तो आपने पढ़ ली। अब उनकी उपलब्धियों के बारे में जान लेते हैं। 'ग्रीन लेडी आफ बिहार' जया देवी को लोग 'पर्यावरण का पहरेदार' भी बुलाते हैं। साल 2016-17 का नेशनल लीडरशिप अवार्ड जया को पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने सम्मानित किया था। दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित समारोह सम्मानित होने के बाद भारत सरकार की तरफ से जया को राष्ट्रीय युवा पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है। इसके अलावा दक्षिण कोरिया में आयोजित युवा कार्यकर्ता प्रशिक्षण कार्यक्रम में वह भारत का प्रतिनिधित्व भी कर चुकी हैं।
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