'मदद दे रहे या भीख, ड्रामा करने में माहिर हैं तेज प्रताप', तेजू भैया का 'राजा स्टाइल' देख क्यों भड़की पब्लिक

Tej Pratap Yadav: बिहार के शाहपुर में बाढ़ पीड़ितों की मदद करने पहुंचे तेज प्रताप यादव एक बार फिर अपने अंदाज को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गए हैं। रविवार 3 अगस्त को वे शाहपुर विधानसभा क्षेत्र के जवनिया गांव में राहत सामग्री लेकर पहुंचे थे, जहां बाढ़ से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है।

तेज प्रताप राहत लेकर पहुंचे तो जरूर, लेकिन जिस तरह से वे गाड़ी के ऊपर सिंहासन जैसे स्टाइल में बैठकर राहत सामग्री को भीड़ में फेंकते नजर आए, उसने सोशल मीडिया पर बवाल खड़ा कर दिया। लोग कहने लगे कि यह राहत वितरण कम, किसी 'राजा की दरबार' जैसी तस्वीर ज्यादा लग रही थी।

Tej Pratap Yadav

सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे दिखावटी और अपमानजनक बताया। कई लोगों ने सवाल उठाया कि क्या जरूरतमंदों की मदद इस तरह की जमीनी संवेदना से परे होकर की जानी चाहिए?

तेजू भैया का 'राजा स्टाइल' पड़ गया भारी!

तेज प्रताप यादव, जो कभी बिहार सरकार में मंत्री रह चुके हैं और लालू यादव के बड़े बेटे हैं, हाल ही में यह ऐलान कर चुके हैं कि वे आगामी विधानसभा चुनाव महुआ से लड़ेंगे। उन्होंने कहा था कि उनकी जीत, उनके पिता लालू यादव की जीत मानी जाएगी। राजनीतिक मंशा और जनसेवा के इरादे को शायद तेज प्रताप दिखाना चाह रहे थे, लेकिन 'राजा स्टाइल' में राहत वितरण की यह तस्वीरें अब सोशल मीडिया पर भारी पड़ रही हैं।

सोशल मीडिया पर लोग बोले- ऐसे मदद फेंक कर कौन देता है?

एक यूजर ने लिखा,

''तेज प्रताप यादव शाहपुर में बाढ़ पीड़ितों की मदद करने गए। लेकिन ऐसे मदद की जाती है? तेज प्रताप जी गाड़ी के ऊपर सिंहासन जमाकर बैठे हैं और मदद सामग्री को लोगों की भीड़ में फेंक रहे हैं। ऐसे कितने लोगों को मदद मिलेगी फेंककर?''

एक अन्य यूजर ने कहा,

''तेज प्रताप यादव बाढ़ प्रभावित लोगों की बीच पहुंचकर राहत सामग्री का वितरण कर रहे हैं क्या ऐसे ही गरीबो को सामग्री वितरित कि जाती है। ऐसे तो कुत्ते को भी कोई फेंक के नहीं देता।'

एक यूजर ने कहा,

''ये मदद करने का नया तरीका आया है। तेज प्रताप यादव शाहपुर में बाढ़ पीड़ितों की मदद करने का ड्रामा करने गए है। ये ड्रामा करने में माहिर हैं।''

एक यूजर ने लिखा,

''तेज प्रताप यादव शाहपुर में बाढ़ पीड़ितों की मदद करने गए। लेकिन ऐसे मदद की जाती है? तेज प्रताप जी गाड़ी के ऊपर सिंहासन पर एक राजा की तरह जमाकर बैठे हैं और मदद सामग्री को लोगों की भीड़ में फेंक रहे हैं।''

तेज प्रताप यादव का चुनावी ऐलान और तेजस्वी पर सीधी चुनौती

बिहार की सियासत में इन दिनों फिर से तेज प्रताप यादव ने हलचल मचा दी है। तेज प्रताप यादव ने खुद को लालू यादव की असली राजनीतिक विरासत का वारिस बताया है। उन्होंने कहा, ''उस नकली आदमी पर भरोसा मत करना जो बच्चों की तरह रोता है, मेरी रगों में लालू यादव का खून बहता है। अगर आप मुझे वोट देंगे तो यह जीत लालू यादव की मानी जाएगी।"

इस बयान के जरिए तेज प्रताप ने अपने छोटे भाई तेजस्वी यादव पर निशाना साधा और संकेत दे दिया कि वे अब पूरी तरह बगावती मोड में हैं।

महुआ से निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान

तेज प्रताप यादव ने एलान किया है कि वह महुआ से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ेंगे। जनसभा में उन्होंने महुआ के विकास कार्यों का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने सड़क निर्माण से लेकर मेडिकल कॉलेज तक के वादे पूरे किए हैं। उनके मुताबिक, मेडिकल कॉलेज बनने से महुआ की पहचान और संपत्ति की कीमतों दोनों में इजाफा हुआ है। तेज प्रताप ने आगे कहा कि वे महुआ को जिला बनाने की दिशा में काम करेंगे ताकि स्थानीय लोगों को रोजगार मिल सके और पलायन रुके।

तेज प्रताप ने साफ किया कि वे अब किसी भी राजनीतिक पार्टी के बैनर तले चुनाव नहीं लड़ेंगे। उन्होंने खुद को जनता का सच्चा सेवक बताते हुए कहा कि अब उन्हें किसी पार्टी की जरूरत नहीं है।

उनका यह कदम न सिर्फ आरजेडी के लिए मुश्किलें बढ़ा रहा है बल्कि पूरे बिहार चुनाव के समीकरण बदल सकता है। तेज प्रताप का निर्दलीय मैदान में उतरना न केवल वोटों का बंटवारा करेगा, बल्कि विपक्षी दलों को अप्रत्याशित फायदा भी पहुंचा सकता है। तेज प्रताप के इस बगावती तेवर ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले चुनावों में यादव परिवार की आंतरिक सियासत खुलकर सामने आने वाली है।

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