कौन हैं जनसुराज के अध्यक्ष उदय सिंह? अब BJP ने प्रशांत किशोर के नेता पर लगाया गंभीर आरोप, बदला चुनावी माहौल
Bihar Election 2025 (Uday Singh): बिहार की राजनीति में इस वक्त सबसे ज्यादा सुर्खियां जनसुराज और उसके संस्थापक प्रशांत किशोर बटोर रहे हैं। आरोप-प्रत्यारोप का दौर अब इतना तेज हो गया है कि हर दिन नए-नए खुलासे हो रहे हैं। प्रशांत किशोर ने हाल ही में डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी और मंत्री अशोक चौधरी पर गंभीर आरोप लगाए थे। इसके जवाब में बीजेपी ने पलटवार करते हुए अब जनसुराज के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय सिंह उर्फ पप्पू सिंह पर ही निशाना साध दिया है। ऐसे में आइए जानते हैं कौन हैं उदय सिंह और क्या है पूरा मामला?
बीजेपी का पलटवार: "उदय सिंह सबसे बड़े उम्र चोर"
बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता दानिश इकबाल ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर जनसुराज अध्यक्ष उदय सिंह पर बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने लिखा- "2004 में लोकसभा चुनाव लड़े तो पप्पू सिंह 44 साल के थे। लेकिन 2009 में वही नेता अचानक 57 साल के हो गए। आखिर पांच साल में 13 साल कैसे बढ़ गए? कौन सा शिलाजीत लिया था?"

दानिश इकबाल ने तंज कसते हुए कहा कि जब प्रशांत किशोर डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी को "उम्र चोर" कह रहे थे, उसी वक्त उनके बगल में सबसे बड़े उम्र चोर यानी उदय सिंह बैठे थे। बीजेपी ने यहां तक मांग कर डाली कि चुनाव आयोग को इस 'उम्र घोटाले' की जांच कर उदय सिंह को जेल भेजना चाहिए।
🔵 जनसुराज की सफाई
बीजेपी के आरोपों पर जनसुराज की तरफ से भी तुरंत प्रतिक्रिया आई। पार्टी नेता और पूर्व विधायक किशोर मुना ने कहा- "बीजेपी नेताओं को शायद चुनावी प्रक्रिया का ज्ञान नहीं है। नामांकन पत्र में वही उम्र लिखी जाती है जो वोटर लिस्ट में होती है। अगर कोई गड़बड़ी हुई है तो वह वोटर लिस्ट की वजह से है।"
इसके साथ ही जनसुराज ने बीजेपी पर पलटवार करते हुए कहा कि "पीके (प्रशांत किशोर) ने अपने हर एक रुपए का हिसाब दिया है। अब बीजेपी को चाहिए कि वह अपने फंडिंग का हिसाब सार्वजनिक करे।"
🔵 कौन हैं उदय सिंह? (who is Uday Singh)
बात अब उदय सिंह की करें तो वे कोई नए चेहरे नहीं हैं। उदय सिंह उर्फ पप्पू सिंह बिहार की राजनीति में एक बड़ा नाम हैं। वे पूर्णिया लोकसभा सीट से बीजेपी के टिकट पर दो बार सांसद रह चुके हैं। 2004 और 2009 में उन्होंने जीत दर्ज की थी।
लेकिन 2014 और 2019 में किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया। नरेंद्र मोदी लहर के बावजूद 2014 में हार गए। इसके बाद उन्होंने बीजेपी छोड़ कांग्रेस का दामन थाम लिया। कांग्रेस में रहते हुए भी उन्हें 2019 और 2024 दोनों लोकसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा।

🔵 कांग्रेस छोड़कर जनसुराज का दामन थामा
2024 चुनाव के बाद कांग्रेस ने उन्हें नजरअंदाज कर दिया। इसी से आहत होकर उन्होंने पार्टी छोड़ दी। इसके बाद लंबे समय तक वे किसी राजनीतिक दल से जुड़े नहीं।
मई 2025 में प्रशांत किशोर ने उन्हें अपनी पार्टी जनसुराज का सदस्य बनाया और जल्द ही राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित कर दिया। इस कदम से पीके ने साफ कर दिया कि वह बिहार की राजनीति में बड़े चेहरों को साथ लाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
🔵 परिवार का सियासी बैकग्राउंड
उदय सिंह ऐसे परिवार से आते हैं, जिसकी जड़ें राजनीति और नौकरशाही दोनों में गहरी हैं। उनके पिता टीपी सिंह इंडियन सिविल सर्विस (ICS) के अधिकारी थे। उनकी मां माधुरी सिंह पूर्णिया से दो बार सांसद रह चुकी हैं।
उनके बड़े भाई एनके सिंह रिटायर्ड IAS अफसर हैं और राज्यसभा सांसद भी रह चुके हैं। वे अब भाजपा से जुड़े हुए हैं। उनकी बहन श्यामा सिंह पूर्व सीएम सत्यनारायण सिन्हा की बहू हैं। श्यामा सिंह के पति निखिल कुमार रिटायर्ड IPS हैं और राज्यपाल भी रह चुके हैं।

🔵 क्यों बढ़ी सियासी गर्मी?
दरअसल, बिहार चुनाव नजदीक आते ही हर पार्टी दूसरे को घेरने में लगी है। प्रशांत किशोर लगातार बीजेपी नेताओं पर करप्शन और अन्य मामलों में हमला बोल रहे हैं। वहीं, बीजेपी अब उनके सहयोगियों पर निशाना साध रही है ताकि पीके की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए जा सकें।
उदय सिंह पर उम्र में गड़बड़ी के आरोप ने न सिर्फ जनसुराज को असहज कर दिया है, बल्कि पूरे बिहार की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। सवाल यह है कि क्या यह आरोप चुनावी हवा को बदलेगा या यह भी महज आरोप-प्रत्यारोप की लंबी लड़ाई का हिस्सा है?












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