IRCTC होटल घोटाले की पूरी कहानी: कैसे फंसा लालू परिवार? कितनी हो सकती है सजा, कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित
IRCTC Hotel Scam Case: भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (IRCTC) होटल घोटाले में आज 29 मई को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा है। कोर्ट इस मामले पर फैसला 23 जुलाई 2025 को सुनाएगी। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और बेटे तेजस्वी यादव इस मामले में आरोपी हैं। बिहार विधानसभा चुनाव से पहले ये मुद्दा गरमा सकता है।
इस केस की जांच सीबीआई (CBI) ने की है। CBI के मुताबिक, जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे, तब रेलवे के पुरी और रांची स्थित BNR होटल को IRCTC को ट्रांसफर किया गया था, इनका मेंटेंनस इम्प्रूव करने के लिए लीज पर देने की प्लानिंग थी। इसके लिए टेंडर विनय कोचर की कंपनी मेसर्स सुजाता होटल्स को दिए गए थे, इसके टेंडर प्रॉसेस में जालसाजी की गई। इस पूरे मामले पर 17 जुलाई 2017 को CBI ने लालू समेत 5 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कराई थी। इसमें दोषी पाए जाने वालों को 7 साल तक की सजा हो सकती है। ऐसे में आइए जानें IRCTC घोटाला की पूरी कहानी?

What is IRCTC Hotel Scam Case: क्या है आईआरसीटीसी होटल स्कैम केस?
🔴 IRCTC होटल घोटाला भ्रष्टाचार मामले में राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव और अन्य पर आरोप हैं। सीबीआई के मुताबिक जब लालू प्रसाद यादव 2005-2006 में रेल मंत्री थे, उन्होंने रांची और पुरी स्थित IRCTC के दो BNR होटलों को एक निजी कंपनी कोचर बंधुओं को लीज पर दिलवाया। आरोप है कि इसके बदले में पटना में एक प्रमुख स्थान पर स्थित तीन एकड़ जमीन लालू परिवार के करीबी लोगों के नाम पर ट्रांसफर किया गया।
🔴 7 जुलाई 2017 को सीबीआई ने लालू यादव सहित कुल पांच लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। इस जांच के तहत उनके 12 ठिकानों पर छापेमारी भी की गई थी। एफआईआर में यह दावा किया गया है कि जिस दिन कोचर बंधुओं ने डिलाइट मार्केटिंग कंपनी लिमिटेड (DMCL) के पक्ष में जमीन का सौदा किया, उसी दिन रेलवे बोर्ड ने IRCTC को पत्र भेजकर कोचर की कंपनी को होटल सौंपने के फैसले की सूचना दी।
🔴 इस प्रक्रिया में टेंडर को विनय कोचर की कंपनी मेसर्स सुजाता होटल्स को दिया गया। सीबीआई का आरोप है कि यह टेंडर प्रक्रिया में कई घोटाले किए गए थे। उस समय IRCTC के मैनेजिंग डायरेक्टर पीके गोयल ने यह प्रक्रिया पूरी की थी।
जमीन सौदे में भारी गड़बड़ी: CBI के गंभीर आरोप
🔴 25 फरवरी 2005 को कोचर बंधुओं ने पटना के बेली रोड स्थित 3 एकड़ जमीन सरला गुप्ता की कंपनी मेसर्स डिलाइट मार्केटिंग कंपनी लिमिटेड (DMCL) को सिर्फ 1.47 करोड़ रुपये में बेच दी। जबकि उस समय इस जमीन की बाजार कीमत करीब 1.93 करोड़ रुपये थी।
🔴 इस जमीन को कृषि भूमि (एग्रीकल्चर लैंड) बताकर सर्कल रेट से भी काफी कम दाम पर बेचा गया। आरोप है कि इस सौदे में स्टैम्प ड्यूटी की हेराफेरी भी की गई, जिससे सरकार को राजस्व का नुकसान हुआ।
🔴 2010 से 2014 के बीच यही जमीन, जो उस समय बेनामी संपत्ति मानी गई, लालू यादव के परिवार से जुड़ी कंपनी लारा प्रोजेक्ट्स को मात्र 65 लाख रुपये में ट्रांसफर कर दी गई। उस वक्त जमीन की सर्कल रेट के मुताबिक कीमत करीब 32 करोड़ रुपये थी।












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