'हम नीतीश को पीएम बनाना चाहते थे', अखिलेश यादव की ये बात बिहार CM ने सुन ली तो हो जाएंगे परेशान!
Akhilesh Yadav ON Nitish Kumar: ''हमने तो कभी नीतीश कुमार जी को प्रधानमंत्री बनाना चाहा था, लेकिन अब देखिए -उन्हें मुख्यमंत्री पद से भी रिटायर कर दिया जाएगा। भाजपा उन्हें साइडलाइन करने की तैयारी में है।'' समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव का ये बयान सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। कई सोशल मीडिया यूजर ने लिखा है कि अगर खुद नीतीश कुमार अखिलेश यादव का ये बयान देख लेंगे तो परेशान हो जाएंगे।
अखिलेश यादव ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि उनकी पार्टी आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) को पूरा समर्थन देगी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, "हम आदरणीय लालू प्रसाद यादव जी और तेजस्वी यादव जी का बिहार चुनाव में पूरा साथ देंगे। उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने जो घोटाले किए हैं, उन्हें बिहार की जनता के सामने लाया जाएगा। सच्चाई सबके सामने रखी जाएगी।"

नीतीश पर भी साधा निशाना, बोले -BJP कर देगी रिटायर
अखिलेश यादव ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लेकर भी बड़ा दावा कर डाला। उन्होंने कहा कि बीजेपी का कोई इरादा नहीं है कि वह नीतीश कुमार को दोबारा मुख्यमंत्री बनाएगी। उन्होंने कहा, ''वो लोग नीतीश कुमार जी के चेहरे और नाम का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन उन्हें फिर से मुख्यमंत्री नहीं बनाएंगे। हमने तो कभी उन्हें प्रधानमंत्री बनाना चाहा था, लेकिन अब देखिए -उन्हें मुख्यमंत्री पद से भी रिटायर कर दिया जाएगा। भाजपा उन्हें साइडलाइन करने की तैयारी में है।''
'भगवा कपड़े पहन लेने से कोई योगी या बाबा नहीं बनता'
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर बिना नाम लिए तंज कसते हुए अखिलेश ने कहा, "सिर्फ भगवा वस्त्र पहन लेने से कोई योगी या बाबा नहीं बन जाता। असली पहचान विचार और आचरण से होती है।''
साथ ही बीजेपी की धार्मिक विचारधारा को लेकर भी हमला बोला। उन्होंने कहा, ''जो लोग अन्याय करते हैं, भेदभाव फैलाते हैं, और बच्चों का राजनीति में इस्तेमाल करते हैं -वे खुद को सनातनी नहीं कह सकते।''
अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि बीजेपी जनता का ध्यान असली मुद्दों से भटका रही है। उन्होंने कहा, ''वे मूल समस्याओं पर चर्चा नहीं करना चाहते। लेकिन जनता इंतजार कर रही है। 2027 में उत्तर प्रदेश का चुनाव ऐसा होगा जैसा पहले कभी नहीं हुआ।''
अखिलेश यादव के इस सीएम नीतीश पर दिए बयान के कई राजनीतिक मायने हैं, जो ना सिर्फ बिहार बल्कि राष्ट्रीय राजनीति को भी प्रभावित कर सकते हैं। आइए समझते हैं इस बयान के पीछे की रणनीति और संदेश।
1. नीतीश कुमार के जनाधार को कमजोर करने की कोशिश
अखिलेश यादव यह संकेत दे रहे हैं कि नीतीश कुमार अब बीजेपी के लिए सिर्फ एक चेहरा हैं, लेकिन असल सत्ता में उनकी भूमिका खत्म हो चुकी है। इससे वह JDU समर्थक वोटरों में यह संदेश देना चाह रहे हैं कि,नीतीश अब सिर्फ "नाम के सीएम" हैं, बीजेपी उन्हें अब "रिटायर" करने की तैयारी में है, और JDU की प्रासंगिकता कम होती जा रही है। इससे JDU के वोटरों का मनोबल टूट सकता है और वे RJD गठबंधन की ओर झुक सकते हैं।
2. BJP को "मित्रघाती" दिखाने की रणनीति
अखिलेश यादव यह दिखाना चाहते हैं कि बीजेपी अपने सहयोगियों का सम्मान नहीं करती और जब जरूरत खत्म हो जाती है तो उन्हें किनारे कर देती है -जैसा उन्होंने शिवसेना, अकाली दल या पासवान की पार्टी के साथ किया। इस तर्क से वह बिहार के मतदाताओं को आगाह कर रहे हैं कि "अब नीतीश कुमार भी बीजेपी के निशाने पर हैं।"
3. महागठबंधन को मजबूत संदेश
यह बयान RJD और सपा के गठजोड़ को मजबूत दिखाने की भी कोशिश है। यह साफ संदेश है कि विपक्षी दल अब सिर्फ केंद्र की भाजपा सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि राज्यों में भाजपा गठबंधन की रणनीति और चालबाजियों को भी चुनौती देंगे।
4. नीतीश कुमार की छवि पर सीधा प्रहार
"प्रधानमंत्री बनाना चाहते थे, अब मुख्यमंत्री से भी रिटायर"-इस लाइन से अखिलेश ने नीतीश कुमार की राजनीतिक यात्रा और महत्वाकांक्षा पर व्यंग्य किया है। इससे यह जताने की कोशिश है कि नीतीश अब "फेल हो चुके नेता" हैं, उनकी कोई राजनीतिक विश्वसनीयता नहीं बची है,
और बिहार में उनका प्रभाव खत्म हो रहा है।
5. आगामी गठबंधनों की जमीन तैयार करना
यह बयान आगे चलकर JDU के भीतर असंतोष पैदा करने और कुछ नेताओं को विपक्ष की ओर खींचने की कोशिश भी हो सकती है। जब किसी पार्टी को कमजोर दिखाया जाता है, तो उसमें टूट की संभावना बढ़ जाती है।
अखिलेश यादव का यह बयान सिर्फ एक राजनीतिक तंज नहीं, बल्कि एक रणनीतिक हमला है-जिसका मकसद बीजेपी-जेडीयू गठबंधन में दरार दिखाना, महागठबंधन को मजबूत करना और बिहार चुनाव को एक "नीतीश बनाम तेजस्वी" नहीं, बल्कि "जनता बनाम भाजपा" की लड़ाई में तब्दील करना है।












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