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Bihar News: राजधानी पटना में है 'तालाबों का गांव', हर परिवार के पास है अपना तालाब, वजह है ख़ास

Village of Ponds In Bihar: केंद्र और राज्य सरकार भूजल स्तर सुधारने के मकसद से कई अभियान चला रही है। वहीं बिहार में एक ऐसा गांव भी है जहां ग्रामीणों की पहल से भूजल स्तर मेंटेन रहने में काफी कारगर साबित हो रहा है।

Village Of Pond In Bihar Mahadevpur Gaon Masaudhi Block News In Hindi

Bihar Pond Village: पटना से करीब 40 किलोमीटर की दूरी पर महादेवपुर गांव (मसौढ़ी प्रखंड) स्थित है। इस गांव में सौ बीघा से ज्यादा ज़मीनों पर ग्रामीणों ने तालाब खुदवाया है। ग़ौरतलब है कि इस गांव लगभग सभी परिवार के पास अपना तालाब है।

स्थानीय लोग गांव में तालाब को अपनी खुशहाली की वजह मानते हैं। ग्रामीणों की मानें तो तालाब की वजह से गांव में भूगर्भ जल की समस्या नहीं होती है। इसके साथ ही गांव के युवा तालाब की वजह से ही आत्मनिर्भर बन रहे हैं।

मसौढ़ी प्रखंड के अंतर्गत आने वाले गांव महादेवपुर को ही 'तालाबों का गांव' का गांव कहा जाता है। स्थानीय लोगों का दावा है कि देशभर में ये एक इकलौता गांव है, जहां सैकड़ो तालाब मौजूद है। तालाब के साथ-साथ गांव में तमाम तरह की आधुनिक सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।

ग्रामीणों ने बताया कि कोरोना काल के दौरान महादेवपुर गांव (तालाबों का गांव) के लोगों पर भी असर पड़ा। कई लोगों के रोज़गार छिन गए। ज़िंदगी गुज़र बसर करने के लिए गांव के युवाओं ने कोरोना काल में ही तालाब खोदकर विकल्प के तौर मछली पालन का व्यवसाय किया।

महादेवपुर गांव में 10 साल से भी ज्यादा समय से लोग मछली पालन का व्यवसाय कर रहे हैं। कोरोन काल में रोज़गार जाने के बाद गांव लौटे युवाओं ने मछली पालन के लिए नए तालाब खोदने शुरू किए। जिसके पास जितनी ही ज़मीन थी, उसमें ही तालाब खोदना शुरू किया।

मछली पालन के व्यवसाय से मुनाफा होने के बाद, गांव में ऐसी स्थिती हो गई कि लोगों ने खेतों की ज़मीन पर भी छोटा सा ही सही तालाब खुदवा लिया। ऐसा करते-करते गांव में 150 से ज्यादा छोटे बड़े तालाब हो गए। पारंपरिक खेती को छोड़ ग्रामीणों ने मछली पालन को तरजीह दी।

मछली पालन की वजह से ग्रामीणों की आमदनी में इज़ाफा हुआ और गांव में खुशहाली आई। इसी वजह से गांव के लोग तालाब को शुभ मानते हैं। इसके साथ ही उनका कहना है कि तालाबों की वजह से पर्यावरण संरक्षण में भी काफी मदद मिली है। गर्मी के मौसम में पशुओं और पक्षियों की प्यास बुझाने में भी तालाब मददगार साबित हो रहा है।

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