बिहार में शराबबंदी की खुली पोल : सरकारी अस्पताल के प्रभारी का शराब पीते वीडियो वायरल, मचा हड़कंप
बिहार में लगातार चरमराती स्वास्थ्य सेवाएं और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की हालत किसी से भी छुपी नहीं है। आए दिन तरह तरह की घटनाएं सोशल मीडिया और मीडिया के जरिये सामने आती रहती हैं जो बिहार प्रशासन के दावों की पोल खोलकर रख देती हैं। स्वास्थ्य सेवाओं की इस दुर्दशा के लिए जितनी जिम्मेदार सरकार है उतने ही जिम्मेदार सरकारी कर्मचारी भी हैं। इन दिनों बिहार में एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमे तिलौथू प्रखंड के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ दयानंद प्रसाद का शराब पीते नजर आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि इनकी किसी मसले पर एक व्यक्ति से बात हो रही थी और जब बात नहीं बनी तो उसने डॉक्टर साहब का वीडियो वायरल कर दिया है। लेकिन इस वायरल वीडियो की वन इंडिया पुष्टि नहीं करता है।

शराब पीते नजर आ रहे हैं डॉक्टर साहब
दरअसल पूरा मामला बिहार के तिलौथू प्रखंड स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का है। यहाँ के प्रभारी डॉ दयानंद प्रसाद का शराब पीते वीडियो मंगलवार शाम से वायरल हो गया है। वीडियो देखकर यह जानकारी लगती है कि किसी ने उन्हें पार्टी में बुलाया और बकायदा शराब का इंतजाम भी किया। साथ में शराब वगैरह का भी इंतेज़ाम किया गया। वीडियो में खूब मजे लेकर डॉक्टर साहब पीते नजर आ रहे हैं और फ़ोन पर किसी से बात भी कर रहे हैं। फ़ोन पर बात करते हुए कहते हैं 'कि हम बहुत जरूरी काम से कहीं पर हैं, बहुत दूर हैं और आप अपने आप देख लीजिये। साथ ही कुछ रुपए के लेनदेन की बात भी चल रही है। जानकारी अनुसार किसी मसले पर डॉक्टर साहब की एक व्यक्ति से बातचीत चल रही थी और जब बात नहीं बनी तो उस शख्स ने यह वीडियो वायरल कर दिया गया।

पहले भी लगे हैं कई आरोप
बता दें कि यह पहली बार नहीं है कि इनपर इस तरह के आरोप लगें हैं। अक्सर इन पर पैसे लेने देने के आरोप लगते रहते हैं। ग्रामीण चिकित्सकों के रजिस्ट्रेशन का मामला हो या फिर निजी अस्पताल की जांच और उसके रजिस्ट्रेशन का मामला हो, हर मामले में यह बहती गंगा में हाथ धोते नजर आए हैं। लेकिन इस बार शराब के साथ इनकी तस्वीर वायरल हुई है। अब इन पर विभागीय कार्रवाई तो निश्चित है। हाल ही में एक स्वास्थ्य विभाग के बड़े अधिकारी पर कार्रवाई हुई है और उन्हें बर्खास्त भी किया गया है। यह वीडियो वायरल होने के बाद तिलौथू प्रखंड के साथ ही स्वास्थ्य महकमे में भी हलचल मच गई है। प्रखंड वासियों का कहना है कि एक न एक दिन गलती का अंजाम तो भुगतना ही पड़ता है। ये अक्सर शराब का सेवन करते थे। आशा कार्यकर्ताओं ने भी इनके खिलाफ कई बार आवेदन दिया है और हड़ताल भी की है। अब यह देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी क्या कार्रवाई करते हैं।

असफल है शरबबंदी
अब बात करें की बिहार जैसे राज्य में जहाँ शराब पर पूरी तरह बैन लगा हुआ है, वहां पर इस तरह के शिक्षित और अधिकारी पद पर विराजमान लोग ही जब कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं तो पूरे बिहार के हाल को बखूबी समझा ही जा सकता है। नीतीश कुमार ने पूर्व में एक बार कहा था कि शराबबंदी की मांग देश के अन्य राज्यों में भी होने लगेगी। निश्चित रूप से इसकी कामयाबी देश-दुनिया में भी यह अध्ययन का विषय बनेगा। वही सुशील कुमार मोदी ने कहा था कि नोटबंदी से भी ज्यादा कठिन निर्णय शराबबंदी है। नोटबंदी में तो एक बार सर्जिकल स्ट्राइक किया गया, लेकिन शराबबंदी में रोज सर्जिकल स्ट्राइक करना होता है। उनकी कही यह बात सही साबित होती है। क्यूंकि शराबबंदी कितनी सफल हुई है और कितनी नहीं, इस घटना से साफ़ पता चल जाता है।












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