'कहां से आएंगी इतनी सरकारी नौकरी?' सवाल सुनते ही तेजस्वी ने साधी चुप्पी, इस बार तारीख का भी कर दिया वादा!
Bihar Election 2025: राष्ट्रीय जनता दल (RJD) नेता तेजस्वी यादव ने बिहार चुनाव से ठीक पहले एक बार फिर सरकारी नौकरियों को लेकर बड़ा वादा किया है, लेकिन जब उनसे यह पूछा गया कि इतनी बड़ी संख्या में नौकरियां कहां से आएंगी? तो वह इस सवाल का जवाब देने से बचते दिखे। उन्होंने सवाल को टालते हुए अपनी पुरानी बात को ही मजबूती से दोहराया।
तेजस्वी से एक रिपोर्टर ने सवाल किया कि- सर, कहां से आएंगी इतनी नौकरी? तो इसका सीधा जवाब देने के बजाय, तेजस्वी यादव ने सिर्फ इतना कहा, 'जिस परिवार में सरकारी नौकरी नहीं है, उस परिवार को सरकारी नौकरी मिलेगी, और 14 नवंबर के बाद से बिहार की जनता बेरोजगारी से मुक्ति पाएगी।'

तेजस्वी का यह बयान उस समय आया है जब उनका 'एक परिवार-एक सरकारी नौकरी' का वादा बिहार की राजनीति का सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है। सवाल यह है कि क्या यह वादा केवल चुनावी घोषणा है या इसके पीछे कोई ठोस आर्थिक योजना भी है?
वादा दमदार, पर रोडमैप गायब?
तेजस्वी यादव का यह वादा उनकी चुनावी रणनीति का केंद्र बिंदु है। चुनाव से पहले उन्होंने घोषणा की थी कि अगर महागठबंधन सत्ता में आता है, तो वे सरकार बनने के 20 दिनों के भीतर इस वादे को लागू करने के लिए एक कानून (Legislation) लाएंगे और 20 महीनों के भीतर हर घर तक सरकारी नौकरी सुनिश्चित करेंगे।
रोडमैप पर सवाल: विपक्षी दल लगातार यह सवाल उठा रहे हैं कि राज्य के सीमित संसाधनों और वित्तीय स्थिति को देखते हुए, हर परिवार को नौकरी देने के लिए करोड़ों रुपये का फंड और लाखों पद कहां से सृजित किए जाएंगे।
तेजस्वी का दांव: इन सवालों को टालते हुए तेजस्वी सिर्फ इतना कह रहे हैं कि यह कोई 'जुमलेबाजी' नहीं है और यह वादा डेटा पर आधारित है। उनके अनुसार, इच्छाशक्ति (Willpower) हो तो यह वादा पूरा किया जा सकता है।
निशाने पर NDA: उन्होंने सत्ताधारी NDA गठबंधन पर हमला करते हुए कहा कि 20 सालों से वे बेरोजगारी को मुद्दा नहीं मानते थे और अब नौकरियों की जगह केवल बेरोजगारी भत्ता देने की बात करते हैं।
अब 14 नवंबर को वोटों की गिनती होनी है। यह देखना दिलचस्प होगा कि बिहार की जनता तेजस्वी के इस रोडमैप-रहित, लेकिन दमदार वादे पर कितना भरोसा करती है, और क्या वह वाकई '14 नवंबर के बाद बेरोजगारी से मुक्ति' पा सकती है।
यह चुनाव विनाश बनाम विकास पर आधारित है- पप्पू यादव
दूसरी ओर महागठबंधन में सीटों के बंटवारे पर पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने कहा कि, 'कांग्रेस नेता राहुल गांधी अपनी पार्टी और कार्यकर्ताओं के सम्मान के साथ जीते हैं। गठबंधन का सिद्धांत सर्वोपरि है, चाहे वह छोटी पार्टी हो या बड़ी। गठबंधन महत्वपूर्ण है, बिहार की जनता महत्वपूर्ण है, और इंडिया गठबंधन की जीत महत्वपूर्ण है; सीटें महत्वपूर्ण नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि, 'यह चुनाव विनाश बनाम विकास पर आधारित है। यह चुनाव राहुल गांधी के प्रेम, विकास और संघर्ष के बल पर लड़ा जाएगा।' वे आगे कहते हैं, 'अब पार्टियां 'तकनीकी' होती जा रही हैं। सरकार ज़मीन से कम जुड़ी हुई है। हमें ऐसी चीज़ों से बचना चाहिए और पार्टी कार्यकर्ताओं का सम्मान करना चाहिए।'
बिहार विधानसभा 2025 चुनाव से जुड़े सवालों के जवाब यहां जानें...
बिहार में कुल कितने चरणों में चुनाव होंगे?
चुनाव दो चरणों (121 + 122 = 243 सीटों) में होंगे।
वोटिंग किस-किस तारीख को होगी?
पहले चरण की वोटिंग 6 नवंबर 2025 को और दूसरे चरण की वोटिंग 11 नवंबर 2025 को होगी।
मेरे इलाके में कौन सी तारीख को मतदान होगा, यह कैसे पता चलेगा?
आपको अपने विधानसभा क्षेत्र के हिसाब से देखना होगा कि वह पहले चरण (6 नवंबर) में है या दूसरे चरण (11 नवंबर) में।
अगर कोई उम्मीदवार नामांकन भरता है, तो वह अपना नाम कब तक वापस ले सकता है?
पहले चरण के लिए 20 अक्टूबर तक और दूसरे चरण के लिए 23 अक्टूबर तक नाम वापस लिया जा सकता है।
चुनाव का अंतिम फैसला कब आएगा?
वोटों की गिनती और चुनाव परिणाम 14 नवंबर 2025 को घोषित किए जाएंगे।












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