सीएम नीतीश कुमार के बाद तेजस्वी यादव ने जातिगत जनगणना को लेकर पीएम मोदी को लिखा पत्र
पटना। बिहार में इन दिनों जातिगतण जनगणना की राग को राजनीतिक लोग खूब अलाप रहे हैं। एक तरफ जहां जदयू और राजद इसके पक्ष में दिख रहे हैं तो वहीं भाजपा खुलकर इस मुद्दे का समर्थन नहीं कर रही है। इसी कड़ी में राजद नेता और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने जातिगत जनगणना को लेकर केंद्र और राज्य की नीतीश सरकार पर निशाना साधा है। तेजस्वी यादव ने कहा कि सीएम नीतीश कुमार ने जातिगत जनगणना के मामले पर 4 अगस्त को पत्र लिखकर पीएम मोदी से मिलने का समय मांगा था। लेकिन आज तक समय नहीं मिला। तेजस्वी यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री बंगाल और पंजाब के मुख्यमंत्री से मिल रहे हैं लेकिन जिस बिहार ने उन्हें 39 सांसद दिये, उस राज्य के सीएम से नहीं मिल रहे हैं। ये बिहार के सीएम का अपमान है। ये बात सीएम नीतीश कुमार समझें।
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तेजस्वी यादव ने कहा कि जातिगत जनगणना को लेकर हमारी मांग शुरुआत से रही है। राजद के लोगों ने इसके लिए सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष किया है। बिहार विधानमंडल से दो बार जातिगत जनगणना के लिए प्रस्ताव पारित हुआ और उसमें भाजपा भी शामिल थी। हमने मांग की थी कि सीएम के नेतृत्व में एक कमेटी प्रधानमंत्री से जाकर मिले, इसको लेकर हमने सीएम से मुलाकात भी की थी। लेकिन नीतीश कुमार को पीएम मिलने के लिए समय नहीं दे रहे हैं। तेजस्वी यादव ने कहा कि हमें उम्मीद है कि देश हित और जनहित की हमारी इस मांग को सुना जाएगा। उन्होंने ओबीसी आरक्षण बढ़ाने की भी मांग की।
तेजस्वी ने कहा कि सदन से अभी जो ओबीसी बिल पास किया गया है, उससे राज्य सरकारों को किसी को भी ओबीसी की कैटेगरी में शामिल करने का अधिकार मिल गया है, जो कमरा 4 लोगों के लिए बना है, अगर उसमें 15 लोग डाले जाएंगे तो कमरे को भी बढ़ाने की जरूरत है। मेरी मांग है कि OBC आरक्षण को 27 फीसदी से बढ़ाया जाए।
इसके अलावा तेजस्वी यादव ने ट्वीट कर लिखा कि जातिगत जनगणना की माँग को लेकर आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। अगर जातीय जनगणना नहीं कराई गई तो वंचित उपेक्षित व गरीब जातियों की शैक्षणिक, सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक स्थिति का सही आंकलन नहीं हो पाएगा और ना ही उनकी वर्तमान दयनीय स्थिति में परिवर्तन।
इसके अलावा ट्वीट कर तेजस्वी यादव ने लिखा कि पिछड़ा-अतिपिछड़ा विरोधी मोदी सरकार देश की पिछड़ी-अतिपिछड़ी जातियों की गणना कराने से क्यों डर रही है? क्या इसलिए कि हज़ारों पिछड़ी जातियों की जनगणना से यह ज्ञात हो जाएगा कि कैसे चंद मुट्ठी भर लोग युगों से सत्ता प्रतिष्ठानों एवं देश के संस्थानों व संसाधनों पर कुंडली मार बैठे है?












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