Bihar Chunav 2025: RJD ने 27 नेताओं को पार्टी से निकाला, क्या टूटने लगा है लालू यादव का संगठनात्मक नियंत्रण?

Bihar Chunav 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, राज्य की सियासत में हलचलें तेज़ होती जा रही हैं। सत्ता की कुर्सी तक पहुंचने की इस जंग में अब अनुशासन, निष्ठा और संगठनात्मक नियंत्रण सबसे बड़ा हथियार बन गया है।
ताज़ा उदाहरण है राजद का बड़ा एक्शन, जिसमें पार्टी ने एक ही झटके में 27 नेताओं को छह साल के लिए निष्कासित कर दिया।

कब और क्यों उठाया गया यह कदम?
यह कदम उस वक्त उठाया गया जब कई नेता या तो बागी तेवर में थे, या फिर अपने ही उम्मीदवारों के खिलाफ मैदान में उतर चुके थे। पार्टी की दलील साफ़ है कि अनुशासनहीनता किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। लेकिन बड़ा सवाल यह भी है कि इतने बड़े पैमाने पर असंतोष आखिर पैदा क्यों हुआ?

Tejashwi Bihar Elections 2025

टिकट बंटवारे से उठा असंतोष
दरअसल, टिकट बंटवारे से लेकर क्षेत्रीय समीकरणों तक, हर दल के भीतर असंतुलन की आवाज़ उठ रही है। जेडीयू और बीजेपी पहले ही बागी नेताओं पर कार्रवाई कर चुके हैं, और अब राजद ने भी वही रास्ता अख़्तियार किया है। इसका राजनीतिक संदेश साफ़ है कि 2025 का चुनाव 'डिसिप्लिन बनाम डिसिडेंट्स' (अनुशासन बनाम बागियों) का भी चुनाव बनता जा रहा है।

राजद के दिग्गज भी बने बगावत का शिकार
परसा के सिटिंग विधायक छोटे लाल राय, पूर्व विधायक रितू जायसवाल, राम प्रकाश महतो, अनिल सहनी, सरोज यादव जैसे नामों का निष्कासन बताता है कि पार्टी भीतर से किस तनाव से गुजर रही है। ये सभी नेता कभी राजद के जनाधार का हिस्सा रहे हैं, जिनकी नाराज़गी अब विपक्ष के लिए अवसर बन सकती है।

बागियों की नई पनाहगाह - छोटे दल और निर्दलीय मोर्चा
बिहार की राजनीति में यह पहला मौका नहीं जब चुनाव से ठीक पहले बड़े पैमाने पर निष्कासन हुए हों। लेकिन इस बार का परिदृश्य अलग है, कई बागी नेता या तो निर्दलीय मैदान में हैं, या VIP, लोजपा (रामविलास) और अन्य छोटे दलों के साथ नई राजनीतिक दिशा तलाश रहे हैं। ऐसे में 'बागियों की लहर' कई सीटों पर समीकरण बदल सकती है।

सख्ती का संदेश और संगठन के भीतर की चुनौती
राजद के इस कदम से एक संदेश तो ज़रूर गया है कि पार्टी अनुशासन के सवाल पर सख्त है, लेकिन साथ ही यह भी उजागर हुआ है कि भीतर का असंतोष गहराता जा रहा है। अगर लालू यादव की पार्टी इस असंतोष को समय रहते शांत नहीं कर सकी, तो चुनावी नुकसान से बच पाना कठिन होगा।

राजद से निष्कासित 27 नेताओं की सूची
प्रमुख नाम
छोटे लाल राय- विधायक, परसा (सारण)

रितू जायसवाल- पूर्व विधायक, परिहार (सीतामढ़ी)

राम प्रकाश महतो- पूर्व विधायक, कटिहार

अनिल सहनी- पूर्व विधायक, मुजफ्फरपुर

सरोज यादव- पूर्व विधायक, बड़हरा (भोजपुर)

गणेश भारती- पूर्व विधान पार्षद, मुजफ्फरपुर

मो. कामरान- विधायक, गोविंदपुर (नवादा)

अनिल यादव- पूर्व विधायक, नरपतगंज (अररिया)

अक्षय लाल यादव- पूर्व प्रत्याशी, चिरैया (पूर्वी चंपारण)

राम रखा महतो- जिला प्रधान महासचिव, चेरिया बरियारपुर (बेगूसराय)

संगठनात्मक और जिला पदाधिकारी
अवनिश कुमार- राज्य परिषद सदस्य, भागलपुर

भगत यादव- शेरघाटी (गया)

मुकेश यादव- संदेश (भोजपुर)

संजय राय- जिला प्रधान महासचिव, वैशाली

कुमार गौरव- अतिपिछड़ा प्रकोष्ठ के उपाध्यक्ष, दरभंगा

राजीव कुशवाहा- जिला महासचिव, दरभंगा

महेश प्रसाद गुप्ता- जाले (दरभंगा)

वकील प्रसाद यादव- जाले (दरभंगा)

पूनम देवी गुप्ता- मोतिहारी (पूर्वी चंपारण)

सुबोध यादव- किसान प्रकोष्ठ के पूर्व अध्यक्ष, मोतिहारी

जिला और प्रखंड स्तर के नेता
सुरेन्द्र प्रसाद यादव- प्रदेश महासचिव, सेनपुर (सारण)

नीरज राय- जगदीशपुर (भोजपुर)

अनिल चन्द्र कुशवाहा- प्रदेश महासचिव, वैशाली

अजीत यादव- जिला प्रवक्ता, भागलपुर

मोती यादव- भागलपुर

रामनरेश पासवान- चिरैया प्रखंड अध्यक्ष, पूर्वी चंपारण

अशोक चौहान- पताही प्रखंड अध्यक्ष, पूर्वी चंपारण

संगठन बनाम स्वार्थ की जंग
बिहार की राजनीति इस वक्त "संगठन बनाम स्वार्थ" के दो छोरों पर खड़ी है। जो दल अनुशासन बचा पाएंगे, वही शायद सत्ता तक पहुंच पाएंगे। लेकिन जनता का मूड अब केवल वफादारी नहीं, बल्कि विश्वसनीयता और विकास के आधार पर तय होगा और यही असली परीक्षा होगी 14 नवंबर को, जब नतीजे सामने आएंगे।

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