NDA की जीत से गदगद शॉटगन ने कह दी बड़ी बात, क्या हो गया है शत्रुघ्न सिन्हा की घरवापसी का वक्त?
Shatrughan Sinha: बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों ने राज्य की राजनीति का पूरा माहौल बदल दिया है। एनडीए को 202 सीटों के साथ बंपर जीत मिली है। भाजपा और जेडीयू ने 101-101 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिनमें भाजपा को 89 और जेडीयू को 85 सीटें मिलीं। इस एकतरफा जीत ने न सिर्फ विपक्ष को चौंकाया है, बल्कि उन नेताओं को भी बैकफुट पर ला दिया है जो कुछ समय पहले तक नीतीश कुमार और एनडीए पर सवाल उठा रहे थे।
चुनाव से पहले कई राजनीतिक विश्लेषक यह कह रहे थे कि बिहार में नीतीश कुमार का दौर खत्म हो रहा है। लेकिन नतीजों ने यह साफ कर दिया कि राज्य की राजनीति और जनता की नब्ज को समझने में नीतीश कुमार आज भी सबसे आगे हैं। जीत के बाद कई पुराने बागी नेता भी नीतीश और भाजपा की तारीफ करते नजर आ रहे हैं। इस बदलते रुख में सबसे चर्चित नाम है टीएमसी सांसद और बॉलीवुड अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा का।

बिहार की राजनीति और भाजपा के पुराने दौर में अहम भूमिका निभा चुके शत्रुघ्न सिन्हा ने एनडीए की इस बड़ी जीत पर दिल खोलकर बधाई दी। उन्होंने एक्स पर लिखा कि बिहार की जनता ने अपनी पसंद की सरकार चुनी है और सबसे सम्मानित व सज्जन नेता नीतीश कुमार पर एक बार फिर भरोसा जताया है। उन्होंने नीतीश कुमार को बिहार का सबसे आजमाया हुआ और सफल मुख्यमंत्री बताया। साथ ही एनडीए के सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं को शुभकामनाएं दीं।
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हाल के महीनों में भी दिखाई दी नरमी
यह पहला मौका नहीं है जब शत्रुघ्न सिन्हा ने भाजपा नेतृत्व के लिए सकारात्मक शब्द कहे हों। इससे पहले उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर एक पुरानी तस्वीर साझा की थी और उन्हें बधाई दी थी। उस पोस्ट में उन्होंने लिखा था कि एक बार के दोस्त हमेशा दोस्त होते हैं। राजनीतिक गलियारों में इस पोस्ट को भी उनके नरम रुख का संकेत माना गया था।
भाजपा के साथ रहा है लम्बा सफर
शत्रुघ्न सिन्हा भाजपा के उन नेताओं में रहे हैं जिन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी के दौर में पार्टी को मजबूत किया। वह 1980 के दशक में भाजपा से जुड़े और 1990 में पहली बार दिल्ली की न्यू दिल्ली सीट से सांसद चुने गए। 1991 में भी उन्होंने इसी सीट से जीत हासिल की। इसके बाद वाजपेयी सरकार में उन्हें बड़ी जिम्मेदारियाँ मिलीं। 2002-03 में वे जहाजरानी राज्य मंत्री बने और 2003-04 में स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्री के रूप में कैबिनेट में शामिल हुए। 2009 और 2014 में उन्होंने पटना साहिब सीट से भाजपा के टिकट पर जीत हासिल की।
मतभेदों के बाद छोड़ी भाजपा, अब बदलता रुख
2019 में पार्टी नेतृत्व के साथ उनके मतभेद बढ़ गए और उन्हें पटना साहिब से टिकट नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने भाजपा छोड़कर टीएमसी का दामन थाम लिया। 2024 के आम चुनाव में वह टीएमसी के टिकट पर आसनसोल से सांसद बने। लेकिन पिछले कुछ महीनों से जिस तरह वह भाजपा और एनडीए नेतृत्व की तारीफ कर रहे हैं, उससे यह अटकलें तेज हो गई हैं कि वह आने वाले समय में घर वापसी पर विचार कर सकते हैं। हालांकि इस पर उन्होंने कोई सीधी टिप्पणी नहीं की है, लेकिन उनके बयान राजनीति में नई हलचल पैदा कर रहे हैं।
राजनीतिक गलियारों में कई सवाल
एनडीए की रिकॉर्ड जीत के बाद बिहार की राजनीति में कई समीकरण बदल रहे हैं। शत्रुघ्न सिन्हा जैसे पुराने दिग्गज नेताओं के बदलते तेवर आने वाले समय में बड़े राजनीतिक संकेत दे रहे हैं। क्या वह फिर से भाजपा के साथ जाएंगे या यह सिर्फ राजनीतिक शिष्टाचार है, इस पर फिलहाल कयास ही लगाए जा रहे हैं।
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