इंडिया गेट, गेटवे ऑफ इंडिया और बुलंद दरवाज़ा की तरह बिहार में भी है एक गेट, क्या आपने घूमा ?
बिहार के सभ्यता द्वार का 20 मई 2016 को निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ था। सभ्यता द्वार का उद्घाटन 1 दिसंबर 2018 को हुआ। अगर आप पटना में बने सभ्यता द्वारा का दीदार करना चाहते हैं तो सुबह 11 बजे से शाम 6 बजे तक...
पटना, 3 सिंतबर 2022। आपने दिल्ली का इंडिया गेट, मुम्बई का गेटवे ऑफ इंडिया और फतेहपुर सिकरी का बुलंद दरवाजा तो देखा ही होगा। बिहार की राजधानी पटना में गेटवे ऑफ इंडिया से 6 मीटर ऊंचा बिहार का सभ्यता द्वार है, क्या आपने देखा ? अगर नहीं तो एक बार ज़रूर देखें। सभ्यता द्वार पर पहुंचते ही आपको बिहार के प्राचीन गौरव का नज़ारा दिखेगा। आईए बिहार की राजधानी में मौजूद सभ्यता द्वार के बारे में विस्तार से जानते हैं ।

1 दिसंबर 2018 को हुआ था सभ्यता द्वार का उद्घाटन
बिहार के सभ्यता द्वार का 20 मई 2016 को निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ था। सभ्यता द्वार का उद्घाटन 1 दिसंबर 2018 को हुआ। अगर आप पटना में बने सभ्यता द्वारा का दीदार करना चाहते हैं तो सुबह 11 बजे से शाम 6 बजे तक यहां घूम सकते हैं। पटना में एख जगह से कई आप शानदार नज़ारे ले सकते हैं वह सभ्यता द्वार क्योंकि यहां गार्डन के साथ-साथ गंगा ड्राइव की भी दीदार हो जाएगा। गंगा किनारे बनाया गया सभ्यता द्वार अब लोगो के लिए पर्यटक स्थल बन गया है। आप इस गेट को देखने के बाद यही कहेंगे की फतेहपुर सिकरी का बुलंद दरवाज़ा, दिल्ली का इंडिया गेट और मुम्बई का गेटवे ऑफ इंडिया की तरह ही बिहार का सभ्यता द्वार बना है।

सभ्यता द्वार पर भगवान बुद्ध के संदेश
गांधी मैदान के पास बेशुमार ज्ञान भवन और बापू सभागार के बीच गंगा किनारे सभ्यता द्वार का ज़िक्र अब हर किसी के ज़ुबान पर है। गांधी मैदान के उत्तर और अशोका इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर परिसर के पीछे बने सभ्यता द्वार खूबसूरती प्राचीन काल की याद दिलात है। सभ्यता द्वार पर तरफ सम्राट अशोक, महात्मा बुध और दूसरी तरफ महावीर और मेगास्थनीज की वाणी को जगह दी गई है। सभ्यता द्वार के सामने साम्राट अशोक की प्रतिमा भी स्थापित की गई है। इसके साथ ही इस पर जैन तीर्थंकर वर्द्धमान महावीर के संदेश और भगवान बुद्ध के भी संदेश हैं।

गेटवे ऑफ इंडिया से भी ऊंचा है सभ्यता द्वार
सभ्यता द्वार का निर्माण सम्राट अशोक कन्वेंशन केंद्र कैंपस में करवाया गया है। इस द्वार को बनाने में पांच करोड़ रुपए की लागत आई। 32 मीटर ऊंचे और 8 मीटर चौड़ा सभ्यता द्वार मुंबई के गेट वे ऑफ इंडिया से भी 6 मीटर ज्यादा ऊंचा है । वहीं पटना के गोलघर से 3 मीटर ज़्यादा ऊंचा है। एक एकड़ परिसर में फैले इस सभ्यता द्वार हमेशा में शांत जिंगल्स बजते रहते हैं। ग़ौरतलब है कि सभ्यता द्वार घूमने के लिए आपको कुछ भी चार्ज नहीं देना होगा। बिहार के गौरव सभ्यता द्वार को देखने के लिए ज़्यादातर लोग शाम में पहुंचते हैं।

बिहार के गौरवशाली दौर का नज़ारा
सभ्यता द्वार के दीदार पर आपको ऐसा महसूस होगा जैसे आप गौरवशाली दौर नज़ारा ले रहे है। आपको उस वक्त की कल्पना में डूब जाएंगे जब पाटलिपुत्र अंतर्राष्ट्रीय व्यापार केन्द्र था। बिहार और प्राचीन पाटलिपुत्र के गौरव का अहसास कराने वाली सभ्यता द्वार बिहार के प्राचीन इतिहास को बयान करती है। पर्यटन के ऐतबार से इस द्वार की तुलना मुंबई, दिल्ली और फतेहपुर सिकरी में बने द्वार से की जा रही है। पटना में बने सभ्यता द्वार घूमने के बाद आपको लगेगा की प्राचीन बिहार का आपने भी दीदार कर लिया। अभी तक आप ने नहीं घूमा है तो एक बार ज़रूर घूमने जाएं।
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