Inside Story: तेज प्रताप के बाद बगावती तेवर में Rohini 15 घंटे में बदला रुख, क्यों किया एक्स अकाउंट लॉक?
Inside Story Rohini Acharya: पटना की सियासत इन दिनों सिर्फ चुनावी बयानबाज़ी से नहीं, बल्कि लालू यादव परिवार के अंदरूनी तनाव से भी गरम है। तेज़स्वी यादव के नेतृत्व वाली राजद में अचानक उठे विवाद ने सबको चौंका दिया है। शुक्रवार शाम से शनिवार सुबह तक सिर्फ 15 घंटे में जो घटनाक्रम हुआ, उसने संकेत दे दिया कि परिवार में मतभेद गहराने लगे हैं।
तेज प्रताप बनाम संजय यादव: शुरुआती दरार
सबसे पहले पेंच फंसा तेज प्रताप यादव और तेजस्वी यादव के भरोसेमंद सलाहकार संजय यादव के बीच। तेज प्रताप लंबे समय से संजय पर अप्रत्यक्ष हमले करते रहे हैं, कई बार उन्हें "जयचंद" तक कह चुके हैं। आरोप है कि तेजस्वी के करीबियों में संजय यादव का दबदबा इतना बढ़ गया है कि परिवार के वरिष्ठ सदस्य खुद को दरकिनार महसूस कर रहे हैं।

रोहिणी की एंट्री: सोशल मीडिया से बढ़ा तनाव
अब लालू की छोटी बेटी रोहिणी आचार्य भी उसी मोर्चे पर दिखीं। उन्होंने शुक्रवार शाम एक्स (ट्विटर) पर कई पोस्ट किए। एक रिपोस्ट में संकेत था कि "फ्रंट सीट हमेशा शीर्ष नेता के लिए सुरक्षित है, किसी और को वहां बैठने का हक़ नहीं।" माना जा रहा है कि ये तंज संजय यादव पर था, जिन्हें तेजस्वी की 'बिहार अधिकार यात्रा' के रथ पर अगली सीट पर बैठे देखा गया।
इसके बाद रोहिणी ने लिखा-
"मैंने एक बेटी और बहन के तौर पर अपना कर्तव्य एवं धर्म निभाया है और आगे भी निभाती रहूंगी। मुझे किसी पद की लालसा नहीं, न कोई राजनीतिक महत्वाकांक्षा है। मेरे लिए आत्मसम्मान सर्वोपरि है।"
पितृ-समर्पण और आत्मसम्मान का संदेश
रोहिणी ने अपने पिता को किडनी डोनेट करने की पुरानी तस्वीर साझा करते हुए यह भी लिखा कि "जो जान हथेली पर रखकर कुर्बानी देता है, उसके लहू में बेखौफी और खुद्दारी बहती है।" यह संदेश साफ करता है कि वह खुद को सिर्फ एक समर्पित बेटी और बहन ही नहीं, बल्कि सम्मान की राजनीति करने वाली मान रही हैं।
अकाउंट प्राइवेट क्यों?
लेकिन इन पोस्ट्स के महज 15 घंटे के भीतर शनिवार सुबह रोहिणी ने अचानक अपना एक्स अकाउंट प्राइवेट कर दिया। राजनीतिक गलियारों में दो वजहें बताई जा रही हैं-
परिवार और पार्टी की असहजता: लगातार वायरल हो रहे पोस्ट से राजद के अंदरूनी मतभेद खुलकर सामने आ रहे थे। दबाव में आकर रोहिणी ने विवाद शांत करने के लिए कदम पीछे खींचा।
व्यक्तिगत आलोचना से बचाव: सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाओं से बचने और निजी स्पेस सुरक्षित करने के लिए उन्होंने यह रास्ता चुना।
डैमेज कंट्रोल की कोशिश
विवाद बढ़ते ही राजद ने तुरंत दो दलित नेताओं-शिवचंद्र राम और रेखा पासवान-को फ्रंट पर लाकर संतुलन साधने की कोशिश की। लेकिन पार्टी के भीतर की दरारें साफ दिख रही हैं। इसका खामियाज़ा चुनाव में भुगतना पड़ सकता है।
राजनीतिक मायने क्या हैं
राजद में संजय यादव का बढ़ता कद तेजस्वी की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, लेकिन परिवार के अन्य सदस्यों को यह स्वीकार्य नहीं लग रहा। तेज प्रताप पहले से नाराज़ हैं और अब रोहिणी का खुला विरोध, यह बताने के लिए काफी है कि 2025 के विधानसभा चुनाव से पहले राजद को सबसे बड़ा खतरा बाहर से नहीं, अंदर से मिल सकता है।
उत्तराधिकार और नेतृत्व की राजनीति
लालू प्रसाद यादव के परिवार में यह घटनाक्रम सिर्फ बहन-भाई या सलाहकार का विवाद नहीं, बल्कि उत्तराधिकार और नेतृत्व की राजनीति की झलक है। तेज प्रताप की नाराज़गी के बाद अब रोहिणी की नाराज़गी ने ये साफ कर दिया है कि राजद में "एकजुटता" का दावा जितना बाहर से चमकदार दिखता है, भीतर से उतना ही दरक रहा है। आने वाले दिनों में यह कलह पार्टी की रणनीति और चुनावी गणित दोनों को प्रभावित कर सकती है।












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