‘शादी से पहले जनाज़ा आया’, कुवैत अग्निकांड ने दिया नहीं भूलने वाला दर्द, 14 दिन बाद पहुंचा शव
Kuwait Fire: बिहार के दरभंगा ज़िले का एक बेटा घर की ज़िम्मेदारियों का बोझ लिए विदेश में नौकरी करने गया। उसे किया पता था कि इस बार का सफर उसका आखिरी सफ़र है, अब वह नहीं आएगा। परिवार वालों को वह रोता छोड़ जाएगा। कुवैत में हुए अग्रनिकांड ने बिहार के एक परिवार को ज़िंदगी भर का गम दे दिया है।
दरभंगा जिला के नैनाघाट (सदर प्रखंड) के रहने वाले कालू खान की कुवैत अग्निकांड में मौत हो गई थी। हादसे के 14 दिन बाद उनका शव कुवैत से पैतृक गांव पहुंचाया गया। गांव में शव के पहुंचते परिवार के लोगों पर तो जैसे पहाड़ सा टूट गया।

कुवैत अग्निकांड में पहचान नहीं हो पाने की वजह से परिजनों तक शव नहीं पहुंच पा रहा था। घर के लोगों को उम्मीद थी कि उनका बच्चा ज़िंदा होगा, काफ़ी मशक्कत के बाद जब शव की शिनाख्त हुई तो घर वालों के उम्मीदों की डोर भी टूट गई। 14 दिनों के बाद शव पहुंचा, जिसके बाद उसका कफन-दफन किया गया।
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कालू खान के परिजनों और नैनाघाट के ग्रामीणों ने सरकार से उचित मुआवज़ा के पीड़ित परिवार के किसी एक को सरकारी नौकरी देने की मांग भी की है। परिजनों ने बताया कि अगले महीने 6 जुलाई को कालू की शादी होने वाली थी। निकाह के लिए भारत लौटने वाला था, उसके आने की ख़बर के इतज़ार में थे।
कालू का शव पहुंचा। अल्लाह को शायद यही मंज़ूर था। शादी से पहले ही जनाज़ा आ गया। आपको बता दें कि कुवैत के मंगफ इलाके में हुए अग्निकांड में 42 भारतीय की मौत हुई है। इसमें बिहार के दरभंगा के रहने वाले कालू खान भी शामिल थे। वह करीब 7 साल से कुवैत में सेल्समैन का काम कर रहा था।












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