Bihar Election 2025: प्रशांत किशोर का जनसुराज की उम्मीदवारों को लेकर बड़ा ऐलान, खुद किस सीट से लड़ेंगे चुनाव?
Bihar Election 2025 Prashant Kishor: बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा धमाका हुआ है। चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर (PK) ने आखिरकार यह साफ कर दिया है कि वह इस बार बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में खुद मैदान में उतरेंगे। मंगलवार (07 अक्टूबर) को पटना में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने ऐलान किया कि उनकी पार्टी 'जनसुराज' 9 अक्टूबर को अपने उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी करेगी, और इस लिस्ट में उनका नाम भी शामिल होगा।
उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा- "आपको 9 अक्टूबर को पता चलेगा कि मैं कहां से चुनाव लड़ रहा हूं, लेकिन इतना तय है कि मैदान में रहूंगा और जीतकर दिखाऊंगा।" बिहार में चुनाव इस बार दो चरणों 6 और 11 नवंबर को होंगे, वहीं नतीजे 14 नवंबर 2025 को जारी किए जाएंगे। ऐसे में आइए जानते हैं प्रशांत किशोर किस सीट से चुनाव लड़ सकते हैं।

किस विधानसभा सीट से चुनाव लड़ सकते हैं प्रशांत किशोर
प्रशांत किशोर ने संकेत देते हुए कहा कि वह अपनी जन्मभूमि करगहर (रोहतास जिला) से चुनाव लड़ना चाहते हैं। कुछ दिनों पहले हुए एक पीसी में उन्होंने कहा था, "मैं हमेशा मानता हूं कि किसी को दो जगह से चुनाव लड़ना चाहिए-एक उसकी जन्मभूमि से और दूसरी उसकी कर्मभूमि से। मेरी जन्मभूमि करगहर है।"
उनके इस बयान के बाद करगहर विधानसभा सीट अचानक सुर्खियों में आ गई है। यह सीट ब्राह्मण बहुल इलाका है और अब यह सीट बिहार की सबसे 'हॉट सीट' मानी जा रही है।
9 अक्टूबर 2025 को जनसुराज की पहली लिस्ट
प्रशांत किशोर ने बताया कि जनसुराज पार्टी 9 अक्टूबर को अपने उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी करेगी। उन्होंने कहा, "यह लिस्ट सबको चौंका देगी, क्योंकि इसमें ऐसे चेहरे होंगे जिन्हें देखकर लोग सोचेंगे कि बिहार की राजनीति में अब नया दौर शुरू हो चुका है।"
हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि पार्टी कुल कितनी सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी, लेकिन यह जरूर कहा कि जनसुराज इस चुनाव में "तीसरा विकल्प नहीं, बल्कि निर्णायक ताकत" बनकर उभरेगा।
चुनाव की तारीखों के बीच आया बड़ा एलान
यह घोषणा ठीक मुख्य चुनाव आयुक्त के बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान के बाद हुआ। राज्य में दो चरणों में मतदान होगा-पहला 6 नवंबर को और दूसरा 11 नवंबर को। नतीजे 14 नवंबर को आएंगे। प्रशांत किशोर के ऐलान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, क्योंकि अब यह साफ हो गया है कि जनसुराज सिर्फ सलाह देने वाली टीम नहीं, बल्कि सत्ता में आने का सपना देख रही पार्टी है।
वोटों का पूरा गणित समझाया
प्रशांत किशोर ने कहा, "पिछले चुनाव में NDA और महागठबंधन-दोनों को मिलाकर करीब 72% वोट मिले थे। बाकी बचे 28% वोट ऐसे लोगों के हैं जिन्होंने किसी को वोट नहीं दिया। इस बार जनसुराज उन्हीं 28% का प्रतिनिधित्व करेगा।" उन्होंने दावा किया कि दोनों गठबंधनों के वोट बैंक में भी सेंध लगेगी। "हम इतना वोट काटेंगे कि दोनों की हालत खराब हो जाएगी," उन्होंने कहा।
प्रशांत किशोर का दावा- यह नीतीश कुमार का आखिरी चुनाव होगा
प्रशांत किशोर ने नीतीश कुमार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा- "यह नीतीश कुमार का आखिरी चुनाव होगा। मैं पूरे आत्मविश्वास से कह रहा हूं कि अगली मकर संक्रांति (जनवरी 2026) को नीतीश जी मुख्यमंत्री आवास में दही-चूड़ा नहीं खा पाएंगे।" उन्होंने जोड़ा कि बिहार की जनता अब बदलाव के मूड में है। यह चुनाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि 'बिहार के भविष्य को नया रास्ता देने वाला चुनाव' होगा।
''बिहार की निकम्मी सरकार अब जाएगी''
प्रशांत किशोर ने कहा, "यह चुनाव बिहार के लिए बदलाव की शुरुआत है। बिहार की निकम्मी सरकार अब जाने वाली है। जनसुराज इस बार एक मजबूत विकल्प बनकर उभरेगा और दोनों गठबंधनों को कड़ा झटका देगा।" उनके मुताबिक, अगर NDA और महागठबंधन दोनों का सिर्फ 10-10% वोट भी घट गया तो जनसुराज की सरकार बनना तय है।
प्रशांत किशोर ने यह भी दावा किया कि इस बार चुनाव त्रिकोणीय होगा। उन्होंने कहा, "जनता अब एनडीए और महागठबंधन दोनों से ऊब चुकी है। दोनों ने सिर्फ कुर्सी की राजनीति की है। लेकिन अब जनता तीसरे विकल्प की तलाश में है और वह जनसुराज है।
चिराग पासवान को लेकर उन्होंने कहा, "चिराग जाति और धर्म की राजनीति नहीं करते, यह अच्छी बात है। लेकिन वे बिहार की असली समस्याओं से जुड़े नहीं हैं, इसी वजह से हम उनसे राजनीतिक रूप से सहमत नहीं हैं।"
'छठ के बाद चुनाव रखना साजिश है'
जनसुराज के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय सिंह ने भी इस मौके पर कहा कि चुनाव आयोग ने जानबूझकर छठ पूजा के बाद की तारीखें रखीं ताकि बाहर से आने वाले लोग वोट न डाल सकें। लेकिन उन्हें भरोसा है कि "जो लोग आएंगे, वे बिना वोट डाले नहीं लौटेंगे।" उन्होंने कहा कि जनसुराज दो चरणों में होने वाले इस चुनाव का स्वागत करता है, क्योंकि इससे "एनडीए और महागठबंधन दोनों को पहले ही समझ में आ जाएगा कि जनता अब बदलाव चाहती है।"












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