Bihar Politics: शीतकालीन सत्र में महागठबंधन के विधायक ही बढ़ाएंगे सरकार की मुश्किलें, जानिए मामला
राजद विधायक सुधाकर सिंह महागठबंधन के सहयोगल दल का हिस्सा होते हुए भी अपनी ही सरकार के खिलाफ बयानबाज़ी करते हुए नज़र आ जाते हैं। शीतकालीन सत्र में वह अपने ही सरकार को घेरते हुए नज़र आ सकते हैं।

Bihar Politics: बिहार में सत्ता परिवर्तन के बाद जहां सियासी पार्टियां अपनी राजनीतिक ज़मीन मज़बूत करने में जुटी हैं, वहीं महागठबंधन के नेताओं में आपसी मतभेद पर वीराम ही नहीं लग पा रहा है। मंगलवार से शुरु हो रहे पांच दिवसीय शीतकालीन सत्र में महागठबंधन के विधायक ही सरकार की मुश्किलें बढ़ाने वाले हैं। सत्ता पक्ष के नेता ही सरकार को घेरने की रणनीति तैयार कर चुके हैं। राजद के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह के बेटे और पूर्व कृषि मंत्री सुधाकर सिंह का नाम इस सूची में सबसे ऊपर है।

सत्ता पक्ष के विधायक बढ़ाएंगे सरकार की मुश्किलें
सुधाकर सिंह महागठबंधन सरकार का हिस्सा तो हैं लेकिन वह अपनी ही सरकार के खिलाफ बयानबाज़ी करते हुए नज़र आ जा जाते हैं। मंडी कानून को लेकर सुधाकर सिंह प्राइवेट मेंबर बिल लाने की रणनीति तैयार करने में जुट गए हैं। 44 साल के विधान सभा इतिहास में यह पहली बार होगा की किसी विधायक ने प्राइवेट मेंबर बिल लाने पर ज़ोर दिया हो। सत्त पक्ष की तरफ़ से बिहार विधान सभा में यह मुद्दा गूंजने के आसार नज़र आ रहे हैं। विधानसभा के अध्यक्ष अवध बिहारी चौधरी प्राइवेट मेंबर बिल पर कार्यवाही चलाएंगे या नहीं इस पर अटकलों का बाजार गर्म है। अगर प्राइवेट मेंबर बिल पर सकारात्मक कार्यवाही नहीं हुए तो सुधाकर सिंह धरना भी दे सकते हैं।

सुधाकर सिंह ने तैयार की बिल की पूरी रूपरेखा
प्राइवेट मेंबर बिल लाने की प्रोसेस की बात करें तो इसके लिए बिल की पूरी रूपरेखा विधायक को ही तैयार कर के देनी होती है। ग़ौरतलब है कि सुधाकर सिंह बिल की पूरी रूपरेखा तैयार कर इसका नाम 'कृषि उपज और पशु विपणन एंव मंडी स्थापना कानून' रखा है और बिल विधानसभा को सौंप चुके हैं। बिल में हर 10 किलोमीटर के क़रीब मंडी व्यवस्था की बात कही गई है। इस बाबत आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ लघु कृषि मंडी पर भी ध्यान देने की बात कही गई है।

'कृषि उपज और पशु विपणन एंव मंडी स्थापना कानून'
'कृषि उपज और पशु विपणन एंव मंडी स्थापना कानून' के तहत लघु कृषि मंडी के संचालन के लिए कर्मियों से लेकर अधिकारियों तक की नियुक्ति के साथ ही इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर जोर दिया गया है। इन सबके अलावा मंडियों में केन्द्र सरकार की तरफ़ से तय एमएसपी पर ही अनाज खरीदी की बात कही गई है। एमएसपी नियम तोड़ने पर जुर्माना का भी प्रावधान रखा जाए। नाप-तौल के लिए बेहतर इंतजाम हो। निजी कृषि मंडी स्थापित करने वाले को सरकार सब्सिडी दे। निजी बाजार प्रांगण की मनमानी पर रोक के लिए मॉनिटरिंग समिति आदि गठित करने जैसी मांग की गई है।

धरना प्रदर्शन भी कर सकते हैं सुधाकर सिंह
शीतकालीन सत्र में कई और मुद्दे भी सत्ता पक्ष की तरफ़ से उठाए जा सकते हैं, जैसे की किसानों को मिलने वाली बिजली का मुद्दा, बिजली कनेक्शन लेने में पोर्टल से मिलने वाली सुविधा और युवाओं के लिए रोज़गार जैसे मुद्दे पर सरकार को घेर सकते हैं। अगर उनके द्वारा उठाए गए मुद्दे पर सकारात्मक बात नहीं कही गई तो वह धरना प्रदर्शन कर सकते हैं। सूत्रों की मानें तो उनके साथ कई और विधायक भी सत्ता पक्ष को घेरने की रणनीति तैयार कर चुके हैं।
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