शराबबंदी को लेकर बिहार सरकार को हाई कोर्ट की फटकार,पाबंदी को लागू करने में फेल, लोगों की जान जोखिम में डाल रहे

बिहार में आधिकारिक रूप से शराब पूरी तरह से प्रतिबंधित है। शराब की बिक्री पर बिहार सरकार ने वर्ष 2016 में पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा दिया था, लेकिन बावजूद इसके गैरकानूनी तरह से प्रदेश में शराब की बिक्री की वजह से कई तरह की घटनाएं सामने आ चुकी है। जहरीली और मिलावटी शराब की बिक्री की वजह से प्रदेश में कई लोगों की जान जा चुकी है। अब इस पूरे मामले पर पटना हाई कोर्ट में बिहार सरकार को फटकार लगाई है। पटना हाई कोर्ट ने सख्य लहजे में कहा कि बिहार में लोगों के जीवन को जोखिम में डाल दिया गया है, इसकी वजह है कि प्रदेश सरकार बिहार में पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने में विफल रही है।

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    Patna High Court ने शराबबंदी पर उठाए सवाल, Bihar Government को फटकारा | वनइंडिया हिंदी |*News
    nitish kumar

    पटना हाई कोर्ट ने कहा कि प्रदेश के लोगों का जीवन जोखिम में है क्योंकि प्रशासन बिहार में लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा नहीं कर पा रहा है, प्रदेश में पूर्ण प्रतिबंध लगाने में विफल रहा है। जिसकी वजह से लोगों के जीवन की रक्षा नहीं हो पा रही है। बता दें कि अप्रैल 2016 में बिहार सरकार ने प्रदेश में पूर्ण रूप से शराब बंदी का ऐलान किया था। हालांकि जहरीली शराब पीने से प्रदेश में कितने लोगों की मौत हुई है इसका कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं है, लेकिन इस साल तकरीबन 50 लोगों की जहरीली शराब पीने से मौत हो चुकी है।

    कोर्ट ने कहा कि आंकड़े दर्शाते हैं कि 2015 से पहले ड्रग से जुड़ी शायद ही कोई घटना सामने आती थी, लेकिन 2015 के बाद इस तरह के मामले काफी तेजी से बढ़े हैं। अधिक चिंता की बात यह है कि जो मामले सामने आ रहे हैं उसमे अधिकतर की उम्र 25 साल से कम की है, यहां तक कि 10 साल की उम्र के बच्चे भी ड्रग का शिकार हो रहे हैँ। गांजा, चरस और भांग और गांजा की दुकानें बंद हो गई हैं। प्रदेश सरकार पूरे बिहार में ड्रग्स की तस्करी को रोकने में विफल रही है।

    मुजफ्फरपुर के रहने वाले नीरज सिंह की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कोर्ट ने यह टिप्पणी की है। नीरज सिंह पिछले साल नवंबर माह से जेल में बंद है। जस्टिस पुरनेंदु सिंह ने कहा कि शराब की स्मगलिंग का ट्रेंड काफी बढ़ा है, इसकी बड़ी वजह है अधिकारी जानबूझकर ऐसा होने दे रहे हैं। जस्टिस ने सुप्रीम कोर्ट के जज संजय किशन कौल और एमएम सुंद्रेश के फैसले का भी जिक्र किया जिसमे ड्रग्स से जुड़े तमाम मामलों को एकसाथ करने का आदेश दिया था।

    कोर्ट ने नशे के चलते बीमार होने वाले लोगों को इलाज नहीं मिल पाने पर भी सवाल खड़ा किया है। हाई कोर्ट ने कहा प्रदेश सरकार स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोटोकॉल बनाने में विफल रही है कि कैसे इससे प्रभावित मरीजों का इलाज किया जाए। इनके इलाज के लिए कोई तय तरीका है ही नहीं है। जहरीली शराब से बीमार पड़ने वाले लोगों के इलाज के लिए ना तो कोई अलग से स्वास्थ्य केंद्र है ना ही रिहैब सेंटर है। हर दिन शराब बंदी के बाद लोगों द्वारा जहरीली शराब पीने का मामला सामने आता है। यह सबसे ज्यादा चिंता का विषय है।

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