यहां हनुमानजी का चमत्‍कारिक प्रसाद खाने से नहीं होता कैंसर!

हनुमान चलीसा में एक चौपाई है, 'नासे रोग हरे सब पीरा जपत निरंतर हनुमत बीरा', यानी भगवान हनुमान का नाम लेने से सभी तरह के रोग और बीमारियां दूर हो जाती हैं।

पटना। हनुमान चलीसा में एक चौपाई है, 'नासे रोग हरे सब पीरा जपत निरंतर हनुमत बीरा', यानी भगवान हनुमान का नाम लेने से सभी तरह के रोग और बीमारियां दूर हो जाती हैं। बिहार में पटना रेलवे स्टेशन के पास स्थित यह हनुमान मंदिर का प्रसाद इसी चौपाई को चरितार्थ करता है। इस मंदिर में प्रसाद के जरिए कैंसर जैसी भयानक बीमारियों का इलाज किया जाता है। रोज हजारों की संख्या में लाइन में लगकर लोग इस मंदिर का प्रसाद ग्रहण करते हैं।

मंदिर का क्या है इतिहास?

मंदिर का क्या है इतिहास?

आज से करीब सौ साल पहले हनुमानजी की प्रतिमा कुछ भक्तों ने स्थापित की थी तब शायद ही किसी ने यह कल्पना की होगी कि आने वाले समय में यह हजारों लोगों का भरण पोषण कर कैंसर जैसी असाध्य बीमारियों का इलाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इस मंदिर के सचिव एवं न्यास समिति के आचार्य किशोर कुणाल का कहना है कि साल मंदिर मंदिर की न्यास समीति ने 1989 में कंकडबाग में पहले महावीर आरोग्य संस्थान की नीव डाली। यहां पर गरीबों का इलाज के लिए बेहतर काम किया जाने लगा। आचार्य के अनुसार डॉक्टरों के प्रयास और लोगों के विश्वास ने हमें और मजबूत बनाया। इसके बाद फुलवारी शरीफ में 12 दिसंबर 1998 को महावीर कैंसर संस्थान की स्थापना हुई। इसका उद्घाटन बौद्ध धर्म गुरु दलाई लामा ने किया था। यहां गरीब और असहाय लोगों के इलाज का खर्च महावीर मंदिर करने लगा।

कैंसर पीड़ित मरीजों के लिए बना संजीवनी

कैंसर पीड़ित मरीजों के लिए बना संजीवनी

एक तरह से कहा जाए तो हनुमान मंदिर में चढ़ने वाला नैवेद्यम प्रसाद, कैंसर जैसे असाध्य रोगों से पीड़ित मरीजों के लिए संजीवनी बूटी बनकर उभरा। कैंसर संस्थान में मरीज का कम कीमत में इलाज तो होता ही है, साथ ही तीन वक्त का भोजन भी निशुल्क मिलता है। यहां सौ रुपए प्रति यूनिट खून उपलब्ध कराए जाते हैं। 18 साल तक के लोगों के इलाज का पूरा खर्च न्यास की ओर से मिलता है। मंदिर की राशि से बच्चों के इलाज के लिए भी महावीर वात्सल्य हॉस्पिटल बनाया गया है। अब मंदिर की योजना मरणासन के हालत वाले मरीज के लिए मुमुक्षु भवन का निर्माण कराने की है।

12 करोड़ रूपए सलाना आय है इस मंदिर का

12 करोड़ रूपए सलाना आय है इस मंदिर का

हनुमान मंदिर की सालाना आय लगभग 12 करोड़ रूपए है। इसे मंदिर के रख-रखाव और विभिन्न अस्पतालों पर खर्च किया जाता है। आचार्य कुणाल का कहना है कि यह पैसे दरिद्र नारायण भोजन, 18 वर्ष तक के कैंसर मरीजों के इलाज और देखभाल में खर्च होते हैं। आपको बता दें कि यह उत्तर भारत की सबसे बड़ी धार्मिक न्यास समिति है जो धार्मिक कार्यों के साथ ठोस रूप से परोपकार परोपकार का काम करती है।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+