9th क्लास के स्टूडेंट ने बनाए तीन धांसू ऐप, गूगल ने लाखों में खरीद लिए

पटना। बिहार में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। बिहारी प्रतिभा की इस किताब में 14 साल के स्टूडेंट ने एक और अध्याय जोड़ने का काम किया है। नौंवी क्लास में पढ़ने वाले छात्र आर्यन ने गूगल के लिए तीन ऐप बनाए हैं जिसके लिए गूगल ने उसे प्रसंशा पत्र भेजा है। इतना ही नहीं गूगल ने ऐप की स्टडी कर इसे लोगों के लिए उपयोगी बताया और आर्यन को दो लाख रुपये देने की पेशकश की लेकिन आर्यन ने गूगल से ये पैसे लेने के लिए मना कर इन पैसों को गरीब बच्चों की पढ़ाई में खर्च करने की बात कही है। आर्यन की इस उपलब्धि के बाद उसकी हर जगह प्रशंसा हो रही है।

गर्मी की छट्टियों में बनाए ऐप

गर्मी की छट्टियों में बनाए ऐप

आर्यन ने मार्च-अप्रैल में स्कूल की छुट्टी का सही इस्तेमाल किया और छुट्टी के समय ही तीन ऐसे ऐप बनाए जो जन उपयोगी साबित हुए। आर्यन ने मोबाइल शॉर्ट कट, कम्प्यूटर शॉर्ट कट और वाट्सएप क्लीनर लाइट तैयार किया। तीनों ऐप को गूगल प्ले स्टोर पर अपलोड करने के लिए भेज दिया। उसके बाद वह अपनी पढ़ाई में व्यस्त हो गया। उधर गूगल ने उसके तीनों ऐप की जांच की तो पाया कि ये अच्छे और कारगर ऐप हैं। गूगल ने दो ऐप को अप्रैल में अपने प्ले स्टोर में अपलोड कर दिया है। एक माह में प्ले स्टोर से आर्यन के ऐप को दस हजार लोगों ने डाउनलोड किया है।

सेंट माइकल स्कूल का छात्र है आर्यन

सेंट माइकल स्कूल का छात्र है आर्यन

आर्यन पटना के सेंट माइकल स्कूल दीघा में पढ़ते हैं और उनके आदर्श उनके पिता और स्कूल के प्रिंसिपल हैं। आर्यन का सपना आईआईटी में पढ़ने का है। वहीं आज आर्यन का पूरा परिवार उसकी इस उपलब्धि से बेहद खुश है। इतनी कम उम्र में मिली सफलता आर्यन को और आगे बढ़ने की प्रेरणा देगा। आर्यन ने बताया की उसने यह सॉफ्टवेर इसलिए बनाया जिससे लोगों को मोबाइल और कंप्यूटर पर काम करने में आसानी हो और जल्दी से काम हो सके। वहीं व्हाट्सएप को फ़ास्ट करने के लिए भी एक सॉफ्टवेर बनाया। आगे आर्यन का लक्ष्य आईआईटी की पढ़ाई कर इंजीनियर बनना और देशहित में काम करना है।

पिता हैं पुलिस में

पिता हैं पुलिस में

आर्यन पटना के पत्रकार नगर के थानाध्यक्ष संजीत कुमार सिन्हा और ग्रहणी माँ नीतू कुमारी के बेटे हैं। पिता संजीत ने कहा कि अपने बेटे के इस कारनामे से वे काफी खुश हैं। उन्होंने बताया की बेटे द्वारा बनाए गए ऐप को वह भी इस्तेमाल कर रहें हैं। वही माता नीतू का कहना है कि आर्यन हमेशा कंप्यूटर पर काम करता रहता था और जब देखती तो कहती यह ना जाने कंप्यूटर पर क्या करता रहता है। जब गूगल ने मेल भेजा तो पता चला की बेटे ने कितना बेहतर काम किया है।

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