नीतीश का सफल हुआ ये दांव तो पीछे रह जाएंगी सभी पार्टियां!
हालांकि इस अभियान में समर्थन किसी भी पार्टी के नेता का हो लेकिन क्रेडिट जेडीयू के नेता और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को ही मिलेगा। तो दूसरी तरफ नीतीश कुमार के इस फैसले को लेकर तमाम पार्टियां अभी
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पटना। देश की तमाम राजनीतिक पार्टियां मिशन 2019 की सफलता में लग चुकी हैं। मिशन 2019 में जनता को लुभाने के लिए तमाम पार्टियों के नेता बंद कमरे में बैठक कर गुप्त प्लान बनाते हुए जनता को अपने खेमे में लुभाने की कोशिश कर रहे हैं। इसी तरह बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आने वाले लोकसभा चुनाव में जनता को लुभाने के लिए कई तरह के प्लान कर चुके हैं। जिसमें सबसे सक्सेसफुल उनका शराबबंदी अभियान है। इसी के जरिए अबतक वो जनता के बीच खास उपलब्धियां हासिल कर रहे हैं और अपने इस फैसले को ऐतिहासिक फैसला बताते हैं। शराबबंदी के बाद अब नीतीश कुमार बाल विवाह कानून और दहेज विरोधी कानून के खिलाफ जमकर आवाज उठाएंगे। इन मुद्दों को शायद ही कोई पार्टी का नेता विरोध करे और इस अभियान से नीतीश कुमार को आने वाले चुनाव में कई फायदे हो सकते हैं।

अब नीतीश चलाएंगे ये अभियान और छा जाएंगे!
शराबबंदी में मिले भरपूर समर्थन के बाद अब जेडीयू नेता 2 अक्टूबर से दहेज मुक्त बिहार और बाल विवाह के खिलाफ अभियान छेड़ने की तैयारी में लगे हुए हैं। इस अभियान के खिलाफ किसी भी पार्टी का कोई नेता विरोध नहीं करेगा। ऐसा जदयू का मानना है और हमेशा से ही नीतीश कुमार कुछ ऐसे फैसले लेते हैं जिससे उनके विरोधियों की जुबान बंद हो जाती है। इसी तरह बाल विवाह और दहेज बंदी कानून को प्रमुखता से लागू करने के लिए 2 अक्टूबर से नीतीश के नेता बिहार में हुंकार भरेंगे और अपने विरोधियों से भी इसके लिए समर्थन मांगेंगे।

कोई पार्टी नहीं करेगी विरोध!
हालांकि इस अभियान में समर्थन किसी भी पार्टी के नेता का हो लेकिन क्रेडिट जेडीयू के नेता और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को ही मिलेगा। तो दूसरी तरफ नीतीश कुमार के इस फैसले को लेकर तमाम पार्टियां अभी से ही रास्ता ढूंढने में लगी हुई हैं। और तो और विपक्ष ने जदयू के इन मुद्दों के बहाने राजनीति का आरोप लगाना शुरू कर दिया है। जदयू के नेताओं का कहना है कि इस मुद्दे से बिहार की जनता को लाभ मिलेगा और ये फैसला भी बिहार के लिए ऐतिहासिक फैसला साबित होगा। तो दूसरी तरफ इतने बड़े मुद्दे को लेकर जेडीयू के नेता सड़कों पर निकलेंगे तो इसका सामाजिक और राजनीतिक लाभ मिलना तय है। बस इसी वजह से जहां जदयू के नेता मन ही मन उत्साहित हो रहे हैं और अन्य राजनीतिक पार्टियों को इस मुहिम में शामिल होने का आग्रह कर रहे हैं।

लोकसभा 2019 की बन जाएंगे बड़ी पसंद
बिहार की राजनीति का ऐसा इतिहास रहा है कि जिस किसी भी पार्टी ने जनता से जुड़े मुद्दे को पहले उठाया है, उसका राजनीतिक फायदा हमेशा देखने को मिली है। इसी को लेकर अन्य पार्टियां सबसे पहले जरूर इस मुद्दे को हर हाल में अपना बताकर इसका फायदा उठाना चाह रही है। तो नीतीश के सहयोगी समर्थक इस मुद्दे के जरिए जनता के बीच अपने आप को उनका हमदर्द बना रही है। वहीं दूसरी तरफ विपक्षी पार्टी राजद के नेताओं द्वारा इस मुद्दे के बहाने राजनीति का आरोप लगाया जा रहा है। तो महागठबंधन में शामिल कांग्रेस इस मुद्दे को अपना मुद्दा बता रही है और नीतीश की मंशा पर सवाल उठा रही है। अब हालात ऐसे हैं कि इस मुद्दे को लेकर बिहार की राजनीति एक बार फिर गर्म हो जाएगी। जहां नेता एक दूसरे के खिलाफ तूतू-मैंमैं की लड़ाई लड़ेंगे। हालांकि जो भी हो इस मुद्दे से राजनीतिक फायदा तो बिहार की जनता को ही मिलने वाला है।












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