Bihar Politics: NDA को रोशन करेंगे 'चिराग', सहनी को नहीं मिला सहारा, प्रदेश में कैसे बनेंगे सियासी समीकरण
Political Equation Of Bihar: लोजपा (R) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान के NDA में शामिल होने के बाद बिहार की सियासी फ़िज़ा के बदलने के आसार नज़र आ रहे हैं। मंगलवार को दिल्ली में होने जा रही एनडीए की बैठक में चिराग पासवान भी शामिल हो रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ मुकेश सहनी की पार्टी VIP, इस बैठक में शामिल नहीं होने की खबर के बाद सियासी गलियारों में चर्चाओं का बाज़ार गर्म है।
बिहार की राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज़ हो गई है कि एनडीए को चिराग 'रोशन' करेंगे, लेकिन सहनी को भाजपा ने सहारा नहीं दिया। अब प्रदेश के सियासी समीकरण बदलेंगे और एक अलग ही सियासत शुरू होगी। सूत्रों की मानें तो सहनी की जो मांग है, उसे पूरा करना मुमकिन नहीं है, इसलिए उन्हें बैठक में शामिल होने का न्योता नहीं मिला है।

आपको बता दें कि फिल्हाल मुकेश सहनी की पार्टी VIP की NDA के साथ बातचीत जारी है, पूरी तरह से मामले में फुलस्टॉप नहीं लगा है। दिल्ली में मंगलवार को हो रही बैठक में चिराग पासवान (लोजपा (R), अध्यक्ष), जीतन राम मांझी (संरक्षक, HAM पार्टी) और उपेंद्र कुशवाहा (RLJD, अध्यक्ष) को न्योता दिया गया है।
ग़ौरतलब है कि बिहार के जिन छोटे दलों को निमंत्रण मिला है, उनके अध्यक्ष को हाल ही में Y+ सुरक्षा दी गई है। इसमें मुकेश सहनी का भी नाम शामिल है। इसके बाद भी उन्हें बैठक का न्योता नहीं मिला। सहनी द्वारा बिहार सरकार के सरकारी बंगले के खाली करने के बाद से ही क़यास लगाए जा रहे थे कि वह NDA का दामन थामेंगे लेकिन NDA की बैठक का निमंत्रण नहीं मिलने के बाद फिर से सस्पेंस बरकरार हो गया है।
बिहार की सियासत में मुकेश सहनी ने अपनी पहचान सन ऑफ़ मल्लाह के तौर पर बनाई है। वह चुनाव में जीत दर्ज नहीं भी करें तो उनकी पार्टी 10 लोकसभा सीटों पर भाजपा के वोट बिगाड़ सकती है। यह बीजेपी आलाकमान बखूबी जानती है, पिछले चुनाव में उन्होंने अपने प्रदर्शन से यह साबित कर दिया है।
बिहार में इस समुदाय की 5 फीसदी से ज्यादा आबादी है, इसलिए सहनी विनिंग फैक्टर के तौर पर भी देखे जा रे हैं। NDA की बैठक में सहनी को न्योता नहीं मिलने पर भाजपा नेता किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने से परहेज़ कर रहे हैं। सेंट्रल कमेटी को फैसला लेने का अधिकार बताकर किनारा कर ले रहे हैं।
सूत्रों की मानें तो मुकेश सहनी की शीर्ष नेतृत्व से बातचीत चल रही है, हालांकि सहनी सभी मांगों को पूरा करने के मूड में भाजपा आलाकमान नहीं है। कुछ मुद्दे पर सहमति बन सकती है। सहनी की मांग है कि निषाद आरक्षण को लागू करने के लिए कोई बड़े नेता आश्वासन दें कि NDA सरकार निषाद आरक्षण लागू करेगी।
आरक्षण लागू करने की शर्त के अलावा लोकसभा चुनाव में बिहार, यूपी और झारखंड से पार्टी उम्मीदवार चाहते हैं। इसके साथ ही राज्यसभा और बिहार विधानसभा में 1-1 सीट चाहते हैं। उन्होंने कुछ दिन पहले तेजस्वी यादव के समर्थन भाजपा पर तंज़ कसा था, कि तेजस्वी के चार्जशीट पर सवाल पर उन्होंने कहा था कि भाजपा को अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। बीजेपी के कई नेता हैं जिसपर मुकदमा दर्ज है। सहनी की इन्ही तरह की बयानबाज़ी और मांगों को देखते हुए भाजपा नेता नाराज़ हैं, इसलिए पार्टी उनसे किनारा करते हुए नज़र आ रही है।












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