Bihar Politics: बिहार की ‘नई सरकार’! स्पीकर और मंत्रालयों को लेकर BJP–JDU की टकराहट, शपथ से पहले बढ़ी हलचल
NDA Bihar Politics: बिहार में नई एनडीए सरकार के गठन से पहले सत्ता संतुलन का सबसे संवेदनशील मुद्दा विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) का पद बन गया है। बीजेपी और जेडीयू-दोनों-इस पद पर बराबर की दावेदारी पेश कर रहे हैं, लेकिन बीजेपी का रुख सबसे कठोर माना जा रहा है। पिछली विधानसभा में यह पद बीजेपी के पास था और पार्टी चाहती है कि वह इस बार भी इसे किसी भी कीमत पर न छोड़े।
जेडीयू का तर्क है कि मुख्यमंत्री उनका है, इसलिए सदन की कमान उन पर होनी चाहिए, जबकि बीजेपी इसे सत्ता संतुलन और संख्या बल के मद्देनज़र रणनीतिक रूप से अपने पास रखना चाहती है। यही कारण है कि मंगलवार को दिल्ली में होने वाली बैठक का सबसे बड़ा मुद्दा यही पद बन चुका है।

दिल्ली में निर्णायक बैठक का महत्व
नई दिल्ली में आज होने वाली बीजेपी-जेडीयू की बैठक को सरकार गठन की दिशा में निर्णायक माना जा रहा है। इस बैठक में स्पीकर पद के साथ-साथ प्रमुख मंत्रालयों का बंटवारा भी तय हो सकता है। दोनों दलों की अपनी-अपनी प्राथमिकताएँ हैं। बीजेपी गृह, वित्त, स्वास्थ्य और सड़क निर्माण जैसे प्रभावशाली मंत्रालय चाहती है, जबकि जेडीयू ग्रामीण विकास, ऊर्जा, शिक्षा और जल संसाधन जैसे विभाग अपने पास बनाए रखना चाहती है। सत्ता के इस नए समीकरण में कौन-सा मंत्रालय किसे मिलेगा, इसका फैसला इसी बातचीत से स्पष्ट होगा।
प्रमुख मंत्रालयों पर सौदेबाजी
स्पीकर पद से इतर, प्रमुख विभागों को लेकर भी दोनों दलों के बीच तीखी चर्चा चल रही है। बीजेपी का मानना है कि विकास और प्रशासनिक डिलीवरी से जुड़े बड़े मंत्रालय उसके पास होने चाहिए ताकि सरकार की जनता के बीच मजबूत छवि बन सके। दूसरी ओर, जेडीयू इन मंत्रालयों को अपनी प्रशासनिक पहचान और 'गुड गवर्नेंस' मॉडल से जोड़कर देखती है। इसीलिए ये मंत्रालय सिर्फ पद नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रभाव और भविष्य की रणनीति का हिस्सा माने जा रहे हैं।
छोटे सहयोगियों की भूमिका 'मैनेज' लेकिन अहम
लोजपा (रामविलास), हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा जैसे छोटे सहयोगियों के साथ बीजेपी नेतृत्व की बातचीत लगभग पूरी मानी जा रही है। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान लगातार इन दलों से संवाद में हैं और सूत्रों का दावा है कि सभी को उनकी "संतुलित हिस्सेदारी" का भरोसा दे दिया गया है। छोटे दल चाहते हैं कि उन्हें एक-एक सम्मानजनक मंत्रालय और कुछ बोर्ड-निगम में जगह मिले, ताकि गठबंधन में उनका राजनीतिक वजूद बचा रहे। NDA इस बार किसी भी तरह का असंतोष खुलकर सामने नहीं आने देना चाहता।
शपथ ग्रहण से पहले राजनीतिक गणित19 नवंबर को होने वाली बीजेपी, जेडीयू और संयुक्त NDA विधायक दल की बैठकों को सरकार गठन की अंतिम तैयारी माना जा रहा है। इन बैठकों में नेतृत्व, कैबिनेट सूची और शक्ति संतुलन की औपचारिक मुहर लग जाएगी। इसके बाद 20 नवंबर को पटना के गांधी मैदान में शपथ ग्रहण समारोह होना है, जहाँ नीतीश कुमार नौवीं बार मुख्यमंत्री का पद ग्रहण करेंगे। लेकिन शपथ से पहले होने वाली आज की चर्चा यह तय करेगी कि NDA सरकार आने वाले पाँच सालों में किस तरह के आंतरिक समीकरणों और सत्ता-संतुलन के साथ काम करेगी।
सत्ता समीकरण की असली परीक्षा
बिहार में सरकार गठन की प्रक्रिया केवल औपचारिक नहीं है, बल्कि यह सत्ता के दायरे में आने वाले पाँच वर्षों के राजनीतिक संतुलन की असली परीक्षा है। स्पीकर पद और मंत्रालयों का बंटवारा NDA में किसका पलड़ा भारी करेगा, यह सिर्फ आज की बातचीत तय नहीं करेगी, बल्कि आने वाले महीनों में सरकार की स्थिरता और गठबंधन की एकजुटता का संकेत भी बनकर उभरेगा।












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