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Makar Sankranti Special: बिहार के इस ज़िले में बेटियों को नहीं दिया जाता तिल का प्रसाद, जानिए क्यों ?

Makar Sankranti के लिए सिर्फ 1 दिन बच गया है, पूरे देश में इस पर्व की धूमधाम से तैयारियां की जा रही है।इसी क्रम में हम आपको बिहार के मुजफ्फरपुर ज़िले की संक्रांति से जुड़ी रोचक खबरों से रूबरू करवा रहे हैं।

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Makar Sankranti Special: मकर संक्रांति में एक दिन बचे हैं, 14 तारीख को संक्रांति मनाने की तैयारी ज़ोरों पर चल रही है। प्रदेश के कई जिलों में संक्राति से जुड़ी रोचक तथ्यों की खबर देखने को मिल रही है। इसी क्रम में आज हम आपको मुजफ्फरपुर जिले के बाज्जीकांचल इलाके की मान्यता से जुड़ी खबर से रूबरू करवाने जा रहे हैं। संक्रांति के पर्व को बज्जिकांचल में तिलसकरात के नाम मनाया जाता है। इस पर्व की तैयारी के लिए स्थानीय लोग काफी दिन पहले ही घर में लाई और तिलकुट बनाने की तैयारी शुरू कर देते हैं।

'संक्रांति के दिन होता है मकर राशि में सूर्य का प्रवेश'

'संक्रांति के दिन होता है मकर राशि में सूर्य का प्रवेश'

मकर संक्रांति त्योहार मनाने के लिए आज भी मुजफ्फरपुर जिले के किसान अपने खेतों में उगाए गए चूड़े, तिल और गुड़ मिलाकर लाई और तिलकुट बनाते हैं। वहीं इस पर्व को लेकर पुरोहितों का कहना है कि, यह मान्यता है कि इस इस दिन सूर्य का प्रवेश मकर राशि में होता है। यही वजह है कि पूरे देश में इस पर्व को धूमधाम से मनाया जाता है। वहीं स्थानीय लोग यह भी मानते हैं कि इस दिन ठंड बहुत ज्यादा होती है। इसलिए तिल और गुड़ का सेवन करने से इंसान के शरीर का तापमान मेंटेन होता है। संक्रांति पर्व के दिन वातावरण में तिल जितनी गर्मी आ जाती है।

बेटियों से नहीं भरवाई जाती है तिलकट

बेटियों से नहीं भरवाई जाती है तिलकट

संक्रांति के दिन मुजफ्फरपुर जिले के लगभग सभी परिवार के लोग सुबह सवेरे नहाकर तिलकट भरते हैं। इसके साथ ही हर परिवार अपने कुलदेवता पर तिल, गुड़ और चावल का प्रसाद चढ़ाते हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि तिलकट भरने की परंपरा काफी दिनों से चली आ रही है। इसके जरिए परिवार के बेटे और बहू अपने परिवार के सदस्य और बुज़ुर्ग की जिंदगी भर ज़िम्मेदारी लेने का संकल्प लेते हैं। वहीं बेटियों को तिलकट भरने नहीं दिया जाता है, इसके पीछे की मान्यता है कि शादी के बाद बेटियों को ससुराल जाना होता है। बेटियों की ज़िम्मेदारी ससुराल के लिए ज़्यादा हो जाएगी और मायके के लिए कम। इसलिए परिवार के बेटे और बहू को तिलकट भरने की परंपरा निभानी होती है।

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    चूड़ा,दही, गुड़ और कोहड़ा की सब्जी का नाश्ता

    चूड़ा,दही, गुड़ और कोहड़ा की सब्जी का नाश्ता

    मकर संक्रांति के पर्व को खास भोजन का त्योहार भी कहा जाता है। सुबह-सवेरे नहाकर चूड़ा,दही, गुड़ और कोहड़ा की सब्जी के साथ हिंदू समुदाय के लोग नाश्ता करते हैं। इसके साथ ही भोजन में लाई और तिल का तिलकुट शामिल करना भी ज़रूरी माना जाता है। वहीं रात के भोजन के लिए खिचड़ी तैयार की जाती है। स्थानीय लोगों ने बताया कि वह लोग सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को ही रात के भोजन में खिचड़ी बनाते हैं।

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