'मंदिर मानसिक गुलामी का रास्ता', पोस्टर ने मचाया बिहार में घमासान, JDU-RJD के बीच तनाव
रोहतास के डेहरी से राष्ट्रीय जनता दल (राजद) विधायक फतेह बहादुर सिंह उर्फ फतेह बहादुर कुशवाहा हाल ही में विद्या की देवी मां सरस्वती पर आपत्तिजनक टिप्पणी कर के चर्चाओं में बने हुए थे। अब राजद विधायक ने मंदिरों को "मानसिक गुलामी का रास्ता" बताने वाले पोस्टर्स लगवा कर नया विवाद खड़ा कर दिया है।
दिलचस्प बात ये है कि ये पोस्टर्स राजद सुप्रीमो लालू यादव के पटना स्थित आवास के बाहर लगाए गए हैं। ये पोस्टर सामाजिक सुधारवादी और देश की पहली शिक्षिका सावित्री बाई फुले की जयंती के उपलक्ष्य में लगाए गए हैं।

इन पोस्टर में स्कूलों को "जीवन में ज्ञानोदय" का मार्ग बताते हुए मंदिर को "मानसिक गुलामी का मार्ग" बताते हुए सावित्री देवी के एक क्वोट को लिखा गया है। इस पोस्टर पर राजद सुप्रीमो लालू यादव के साथ-साथ उनकी पत्नी और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, और डिप्टी सीएम तेजस्वी की तस्वीर भी लगाई गई है।
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इन पोस्टर्स ने बिहार की सियासत में हलचल मचा दी है। महागठबंधन के घटक दल जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के नेताओं ने इस पोस्टर से किनारा कर लिया है। जेडीयू नेता नीरज कुमार ने इस पोस्टर से खुद को दूर करते हुए कहा कि धर्म का मुद्दा आस्था का विषय है और इस पर ऐसी टिप्पणी नहीं करनी चाहिए।
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उन्होंने कहा, "हम नहीं जानते कि पोस्टर किसने लगाया है या यह किस बारे में है। मैं उन्हें सलाह दूंगा कि धार्मिक मुद्दे आस्था का विषय हैं। यदि ऐसे मुद्दों पर टिप्पणी की जाती है, तो घोषणा सार्वजनिक मंच पर की जानी चाहिए। यह संबंधित होना चाहिए सभी अनुष्ठानों के लिए... ऐसा दोहरा मापदंड काम नहीं करेगा।'' हालांकि जेडीयू नेता ने कहा की ये राजद का आधिकारिक पोस्टर नहीं है।
राष्ट्रीय जनता दल की ओर से अभी तक इस मुद्दे पर कोई बयान नहीं आया है।
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