Mahua Election 2025: तेज प्रताप के लिए इस बार महुआ जीतना होगा मुश्किल! तीन तरफा मुकाबले में फंसा रण
Mahua Assembly Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में वैशाली जिले की महुआ विधानसभा सीट फिर सुर्खियों में है। 6 नवंबर को यहां मतदान है। इस बार मुकाबला जितना राजनीतिक है, उतना ही भावनात्मक भी। कभी इसी सीट से जीतकर राजनीति में कदम रखने वाले तेज प्रताप यादव अब अपनी ही जमीन पर संघर्ष करते दिख रहे हैं।
राजद से बाहर निकलने और परिवार से टकराव के बाद वे अपनी नई पार्टी जनशक्ति जनता दल (JJD) के टिकट पर मैदान में हैं। लेकिन इस बार उनके सामने चुनौती सिर्फ विपक्ष की नहीं, बल्कि पुराने साथियों की भी है। तेज प्रताप के लिए इस बार महुआ जीतना मुश्किल होगा।

🔵 तेज प्रताप बनाम राजद बनाम लोजपा -बना 'त्रिकोणीय' मुकाबला
🔹 तेज प्रताप यादव (JJD): लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और राज्य के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तेज प्रताप अब अपनी पार्टी के सिंबल पर चुनाव लड़ रहे हैं। परिवार और राजद दोनों से अलग होने के बाद वे इसे अपने "राजनीतिक अस्तित्व की परीक्षा" मान रहे हैं।
🔹 डॉ. मुकेश कुमार रौशन (राजद): मौजूदा विधायक और राजद के उम्मीदवार हैं। 2020 में इन्होंने तेज प्रताप को महुआ से मात दी थी और अब पार्टी का पूरा नेतृत्व उनके समर्थन में जुटा है।
🔹 संजय कुमार सिंह (LJP-रामविलास): व्यवसायी से राजनेता बने संजय सिंह एनडीए के उम्मीदवार हैं। जातीय समीकरणों में वे सवर्ण और राजपूत वोटों पर भरोसा कर रहे हैं।
महुआ सीट पर मुकाबला इस बार त्रिकोणीय हो गया है। इस सीट पर अब राजद और तेज प्रताप के बीच सीधा मुकाबला नहीं, बल्कि तीन दिशाओं में वोटों की खींचतान है।
🔵 पारिवारिक विवाद ने बिगाड़ा समीकरण
तेज प्रताप और तेजस्वी यादव के बीच सार्वजनिक विवाद ने महुआ में राजद समर्थकों को उलझा दिया है। एक ओर यादव वोट परंपरागत रूप से राजद के साथ हैं, वहीं तेज प्रताप की भावनात्मक अपील और अलग छवि कुछ वोटों में सेंध लगा सकती है। लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भाईयों की तकरार ने दोनों का नुकसान किया है, और इससे तीसरे उम्मीदवार को बढ़त मिल सकती है।
🔵 NDA की उम्मीदें और लोकसभा का असर
महुआ विधानसभा क्षेत्र में 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान चिराग पासवान ने बड़ी बढ़त बनाई थी। अब जब लोजपा (रामविलास) एनडीए में वापस है और नीतीश कुमार से सुलह हो चुकी है, तो एनडीए इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत मान रहा है। लोजपा उम्मीदवार संजय सिंह को चिराग फैक्टर और एनडीए के एकजुट होने का फायदा मिल सकता है।
🔵 Mahua Vidhan Sabha Chunav 2025: महुआ का इतिहास
वैशाली जिले में स्थित महुआ सिर्फ राजनीति ही नहीं, बल्कि अपनी उपजाऊ जमीन और पारंपरिक उद्योगों के लिए भी जाना जाता है। यहां धान, मक्का और दालों की खेती के साथ-साथ महुआ फूलों से तेल और औषधीय उत्पाद बनाए जाते हैं। 1951 में स्थापित महुआ विधानसभा सीट ने 1977 में दोबारा चुनावी नक्शे पर जगह बनाई। कांग्रेस के शुरुआती दबदबे के बाद यहां राजद का प्रभुत्व कायम रहा है। तेज प्रताप ने 2015 में यहां से जीत दर्ज की थी, लेकिन 2020 में सीट राजद के ही दूसरे उम्मीदवार मुकेश रौशन के पास चली गई।
🔵 नतीजा जो भी हो, महुआ बना रहेगा 'पॉलिटिकल हॉटस्पॉट'
महुआ विधानसभा इस बार बिहार चुनाव की सबसे रोचक और भावनात्मक सीटों में गिनी जा रही है। एक तरफ लालू परिवार की दरार है, दूसरी तरफ एनडीए की एकजुटता और तीसरी तरफ जनता का मूड। तेज प्रताप यादव के लिए यह चुनाव सिर्फ जीत-हार का नहीं, बल्कि स्वाभिमान और अस्तित्व की लड़ाई बन गया है।












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