बिहार में बीजेपी ने क्यों घोषित नहीं किए एक भी नाम, एनडीए में कहां अटक रही है बात, किन सीटों पर फंसा है पेच
Bihar BJP Candidate list: बीजेपी ने अपनी पहली लिस्ट में बिहार से एक भी उम्मीदवार के नाम की घोषणा नहीं की है। जबकि, जिन 15 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश की 195 लोकसभा सीटों के लिए शनिवार को प्रत्याशियों की घोषणा की गई है, उनमें पड़ोसी यूपी और पश्चिम बंगाल की सीटें भी शामिल हैं।
बिहार उन राज्यों में शामिल है, जहां 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को 100% सफलता मिली थी। भाजपा एनडीए के तहत सीट बंटवारे में राज्य की 40 लोकसभा सीटों में 17 पर चुनाव लड़ी थी और सभी जगहों से जीती थी। लेकिन, पहली लिस्ट में जगह बनाने में बिहार पिछड़ गया है तो इसके पीछे कोई तो वजह रही होगी!

बिहार में एनडीए का बढ़ गया कुनबा, इसलिए बंटवारा उलझा!
इसकी वजह ये मानी जा रही है कि इस बार बिहार में एनडीए दलों में सीटों का बंटवारा थोड़ा उलझा हुआ है। पिछले चुनाव में सिर्फ तीन पार्टियां मिलकर लड़ी थीं, बीजेपी, जेडीयू और एलजेपी। लेकिन, अबकी बार इनकी संख्या 6 हो चुकी है और एक सातवीं पार्टी से भी बातचीत चलने की खबरें हैं।
यानी भाजपा सिर्फ अपनी 17 सीटों पर उम्मीदवार घोषित कर देगी, ऐसा सीन नहीं रह गया है। जानकारी के मुताबिक बिहार चुनाव समिति ने पर्यवेक्षकों के माध्यम से जीती हुई 17 सीटों के लिए तीन-तीन संभावित नामों की लिस्ट पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति को सौंप दी है।
लेकिन, एनडीए में बाकी दलों की एंट्री की वजह से सीटों की अदला बदली की सूरत भी बन सकती है, इसलिए फिलहाल इसपर घोषणा नहीं हो पायी है।
एलजेपी के बंटने उलझ रहा है मामला
बिहार में जेडीयू पिछली बार 16 सीटों पर चुनाव लड़ा था और वह इस बार भी उतनी ही सीटों पर दावेदारी कर रहा है। जबकि, एलजेपी दो हिस्सों में बंट चुकी है। एक की कमान रामविलास पासवान के बेटे और सांसद चिराग पासवान के हाथों में है और दूसरी की अगुवाई इनके चाचा पशुपति कुमार पारस कर रहे हैं।
पिछली बार संयुक्त एलजेपी 6 सीटों पर लड़ी थी और सभी जीत गई थी। जानकारी के मुताबिक चिराग अभी भी उतनी ही सीटों पर दावेदारी कर रहे हैं। जबकि, उनकी लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के वे अकेले एकमात्र सांसद हैं। उधर उनके चाचा की राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी को भी अधिक से अधिक सीटें चाहिए। उनके पास 5 सांसद हैं, तो उनकी दावेदारी भी कम नहीं होगी।
मांझी, कुशवाहा के लिए भी चाहिए सीटें
इनके अलावा हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के जीतन राम मांझी की ओर से भी दो सीटों की दावेदारी की चर्चा है। वहीं उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक जनता दल को भी दो सीटों का दावेदार बताया जा रहा है।
कुछ सीटों पर दो-दो दावेदार
यही नहीं, इन दलों की ओर से कुछ सीटों के लिए तो पूरी तरह से ताल ही ठोक दिया गया है। जैसे हाजीपुर सीट को लेकर चिराग पासवान अड़े हुए बताए जा रहे हैं, जबकि यहां से उनके चाचा पारस सांसद हैं।
शनिवार को पीएम मोदी के मंच से जिस तरह से खुद को उनका हनुमान बताने वाले चिराग गायब रहे, उससे भी तरह-तरह की अटकलें लग रही हैं।
इसी तरह मांझी दो सीटों में एक गया सीट के भी दावेदार बताए जा रहे हैं, जो कि अभी जेडीयू के पास है। वहीं काराकाट सीट पर कुशवाहा की नजर टिकी हुई है और यह सीट भी नीतीश कुमार की पार्टी के ही पास है। इनके अलावा नवादा और वैशाली लोकसभा सीटों पर भी मामला उलझा हुआ बताया जा रहा है।
सीटों की अदला बदली की भी बढ़ गई है संभावना
एक चर्चा मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी के फिर से एनडीए में वापसी की भी है। ऐसे में भाजपा की चुनौती है कि कुल 40 सीटों पर कैसे सहयोगी दलों को खुश भी करे और कहां पर अपने उम्मीदवारों को भी एडजस्ट करे। ऐसे में सीटों की अदला बदली की संभावना काफी ज्यादा बढ़ गई है।
कहा जा रहा है कि भाजपा को सहयोगी पार्टियों के निशान पर अपने उम्मीदवारों को उतारने के विकल्प पर भी विचार करना पड़ सकता। शायद यही वजह है कि पार्टी एनडीए में सीटें तय होने से पहले अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित नहीं कर पा रही है।












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