Sanjay Singh: कौन हैं तेज प्रताप को हराने वाले संजय सिंह? अब इनाम में मिला बिहार का मंत्री पद
Sanjay Singh: बिहार की राजनीति में महुआ सीट इस बार सिर्फ एक विधानसभा क्षेत्र नहीं रही, बल्कि कई बड़े राजनीतिक संदेशों का केंद्र बन गई। जिस सीट से कभी तेजप्रताप यादव ने अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत की थी, उसी सीट पर इस बार ऐसा उलटफेर हुआ कि पूरे प्रदेश की नजरें यहां टिक गईं। लोजपा (रामविलास) के संजय सिंह ने न केवल तेजप्रताप को बेहद पीछे छोड़ा, बल्कि आरजेडी की मजबूत पकड़ वाले इस गढ़ को पहली बार अपने नाम कर इतिहास रच दिया।
पहली बार यह सीट आरजेडी के हाथों से निकल गई और सीधे लोजपा (रामविलास) की झोली में चली गई। अब चर्चा है कि इस जीत का सीधा फायदा संजय सिंह को मिला है और उन्हें नई सरकार में जगह मिली है। माना जा रहा है कि महुआ की इस अप्रत्याशित जीत ने उन्हें सत्ता के प्रमुख गलियारों में एक नई पहचान दिला दी है।

तेजप्रताप की पुरानी सीट पर बड़ा उलटफेर
महुआ वह सीट है, जहां से तेजप्रताप यादव ने 2015 में अपना पहला चुनाव जीता था। 2020 में वह यहां से चुनाव नहीं लड़े और आरजेडी के मुकेश कुमार रौशन ने जीत दर्ज की। इस बार तेजप्रताप को आरजेडी से बाहर किए जाने के बाद उन्होंने फिर से यहीं से किस्मत आजमाई, लेकिन माहौल बदल चुका था। संजय सिंह ने न सिर्फ आरजेडी के मुकेश रौशन को करीब 20 हजार वोटों से हराया, बल्कि तेजप्रताप को तीसरे नंबर पर धकेल दिया। इससे लोजपा (रामविलास) की इस सीट पर पकड़ मजबूत हुई और पार्टी को एक बड़ा प्रतीकात्मक फायदा भी मिला।
2015 में तीसरे नंबर पर, 2025 में पहले
संजय सिंह 2020 में लोजपा (रामविलास) से महुआ सीट पर चुनाव लड़ चुके थे, लेकिन तब वह तीसरे स्थान पर रहे थे। इस बार उन्होंने अपनी पिछली हार का पूरा हिसाब बराबर कर दिया। महुआ सीट की राजनीतिक जमीन हमेशा उतार-चढ़ाव भरी रही है। यहां कांग्रेस ने शुरुआती दौर में जीत जरूर दर्ज की, लेकिन 1977 में सीट पुनः अस्तित्व में आने के बाद वह फिर कभी जीत नहीं पाई। अब तक यहां RJD को 5 बार, जनता दल और जनता पार्टी को 2-2 बार, वहीं JDU और लोक दल को 1-1 बार जीत मिली है। इस बार लोजपा (रामविलास) ने पहली बार अपनी मजबूत दस्तक दी।
किसान और उद्योगपति, करोड़ों की संपत्ति
एडीआर की 2020 की रिपोर्ट के अनुसार, संजय सिंह पेशे से किसान और उद्योगपति हैं। वह वैशाली जिले के महुआ इलाके के रहने वाले हैं और उनके पिता स्वर्गीय रामनाथ सिंह थे। रिपोर्ट में उनके खिलाफ धोखाधड़ी और रिश्वत जैसे मामलों से जुड़े 9 क्रिमिनल केस दर्ज बताए गए हैं। संजय सिंह बीआर एंबेडकर यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट हैं और उनके पास 4 करोड़ 60 लाख रुपए की चल-अचल संपत्ति है।
महुआ सीट का वोटर समीकरण
2020 के विधानसभा चुनाव में महुआ में 2,86,501 रजिस्टर्ड वोटर्स थे। इनमें से अनुसूचित जाति के वोटर्स 21.17% और मुस्लिम वोटर्स करीब 15.10% थे। 2024 लोकसभा चुनाव तक यहां मतदाताओं की संख्या बढ़कर 2,97,532 हो गई। यह सीट हमेशा जातीय और सामाजिक समीकरणों के आधार पर चर्चाओं में रहती है, और इस बार इन समीकरणों ने संजय सिंह के पक्ष में काम किया।
कैबिनेट में एंट्री की चर्चा तेज
संजय सिंह ने महुआ सीट पर आरजेडी की लगातार पकड़ को तोड़ा और तेजप्रताप जैसे बड़े चेहरे को पीछे छोड़ा। इस जीत को लोजपा (रामविलास) और एनडीए के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि महुआ की इस ऐतिहासिक जीत और आरजेडी का किला गिराने के बाद संजय सिंह को मंत्री पद देकर राजनीतिक इनाम दिया जा सकता है।
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