Land for Job Case: फिर लटका लैंड फॉर जॉब केस का फैसला, कोर्ट ने CBI से मांगी कौन सी रिपोर्ट?
Land for Job Case Update: लैंड फॉर जॉब घोटाला एक बार फिर सुर्खियों में है। राउज़ ऐवन्यू कोर्ट में आज वह फैसला आना था, जिसका इंतजार न सिर्फ बिहार की राजनीति कर रही थी, बल्कि पूरे देश की निगाहें इस केस पर टिकी थीं। लालू यादव और उनके परिवार से जुड़े इस मामले ने वर्षों से राजनीतिक बहस को गर्म रखा है। गुरुवार को पूरा देश इस मामले पर राउज एवेन्यू कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहा था, लेकिन अदालत ने आदेश को आगे बढ़ाते हुए सुनवाई का रुख अचानक बदल दिया।
अदालत ने CBI से साफ कहा कि इतने बड़े केस में आरोपियों की सही स्थिति बताना जरूरी है, क्योंकि कई लोग अब इस दुनिया में नहीं हैं। इसी अपडेट के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी। इस बीच एक बार फिर यह मामला राजनीतिक हलचल बढ़ा रहा है। इस फैसले के टलने से मामला एक बार फिर लंबे कानूनी रास्ते में चला गया है। इस मामले में लालू प्रसाद यादव, राबडी देवी, तेजस्वी यादव जैसी बड़ी राजनीतिक हस्तियों के नाम शामिल हैं।

कई आरोपियों की मौत, कोर्ट ने मांगा स्टेटस
अदालत ने कहा कि आरोपियों की संख्या बहुत अधिक है और उनमें से कुछ की मौत हो चुकी है। ऐसे में कोर्ट ने CBI से साफ जानकारी देने को कहा कि 103 आरोपियों में से कौन जीवित है और किसकी मौत हो चुकी है। कोर्ट ने यह स्टेटस रिपोर्ट 8 दिसंबर तक दाखिल करने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई भी उसी दिन होगी।
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CBI की चार्जशीट में बड़े भ्रष्टाचार के आरोप
CBI ने इस मामले में बड़ा दावा किया है कि रेलवे में भर्तियों के दौरान बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ। एजेंसी के अनुसार कई नियुक्तियों के बदले जमीन ली गई और इन जमीनों की खरीद में ज्यादातर लेनदेन कैश में किया गया। CBI ने इस मामले में IPC की धारा 120B, 420, 468, 467, 471 और प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट, 1988 की धारा 8, 9, 11, 12, 13 के तहत चार्जशीट दायर की है। चार्जशीट में 103 लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिनमें से चार की मौत हो चुकी है।
राबडी देवी ने केस ट्रांसफर करने की उठाई थी मांग
राबडी देवी ने इस केस को किसी दूसरी अदालत में ट्रांसफर करने की भी मांग की थी। इससे पहले भी 10 नवंबर की सुनवाई में कोर्ट ने आदेश टाल दिया था और नई तारीख दी थी। CBI ने अपनी चार्जशीट में लालू यादव, राबडी देवी, तेजस्वी यादव और अन्य पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
कब और कैसे हुआ था कथित घोटाला
CBI का आरोप है कि साल 2004 से 2009 के बीच, जब लालू यादव रेल मंत्री थे, तब रेलवे के ग्रुप-डी पदों पर भर्ती के नाम पर गड़बड़ी हुई। आरोप है कि जिन लोगों को नौकरी दी गई, उनसे या उनके परिवार से जमीनें ली गईं। ये नियुक्तियां मुख्य रूप से मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित पश्चिम मध्य रेलवे में हुई थीं।
CBI का दावा है कि कई जमीनों की रजिस्ट्री लालू यादव के परिवार या उनसे जुड़े लोगों के नाम पर कराई गई, और इसके बदले उन लोगों को रेलवे में नौकरी मिली। अब इस मामले में अगला कदम CBI की स्टेटस रिपोर्ट पर निर्भर करेगा। कोर्ट 8 दिसंबर को यह तय करेगा कि आरोप तय करने की प्रक्रिया आगे कैसे बढ़ेगी।












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