Inspirational Story: जितेंद्र शार्दुल की बहुत ही तंगी में गुज़री है ज़िंदगी, पत्नी के साथ ने बनाया कामयाब
Viral Teacher Jitendra Shardul: बिहार के सरकारी स्कूलों में अव्यवस्था की ख़बर सुनकर आपको मायूसी होती होगी। लेकिन आज हम आपको एक ऐसे सरकारी स्कूल के शिक्षक के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनके बारे में आप जानकर फख्र महसूस करेंगे की आज की तारीख में भी शिक्षा की लाज रखने वाले लोग ज़िंदा है।
हम बात कर रहे हैं वायरल टीचर जितेंद्र शार्दुल कि, जो कि पढ़ाने के अपने अनोखे अंदाज़ बच्चों के दिलों पर राज कर रहे हैं। हमेशा नए-नए अनोखे अंदाज़ (गाना गाकर, डांस कर पढ़ाई) में पढ़ाने से बच्चे उनकी क्लास में खूब दिलचस्पी से पढ़ते हैं। शार्दुल ने अपनी ज़िंदगी मे काफी मुसीबते झेलीं, लेकिन हिम्मत नहीं हारे और आज लोगों के लिए मिसाल बन चुके हैं।

वन इंडिया हिंदी से ख़ास बातचीत में जितेंद्र शार्दुल ने अपनी संघर्ष भरी कहानी साझा कि, उन्होंने बताया कि किस तरह से मुश्किलों का सामना करते हुए वह यहां तक पहुंचे। जितेंद्र शार्दुल ने बताया कि जब वह मैट्रिक के छात्र थे, तो उस दौरान एक हादसे में उनके पिता का साया सिर से उठ गया।
पिता के मौत के बाद आर्थिक स्थिति बहुत ही ख़राब हो गई, नतीजा यह हुआ कि जितेंद्र की पढ़ाई छूट गई और नह मज़दूरी करने लगे। चुनौतियों से जूझ रहे थे, इसी दौरान साल 2002 में संजना से उनकी शादी हुई। पत्नी का साथ मिला और धीरे-धीरे हालात सुधरते चले गए।
संजना (जितेंद्र की पत्नी) ने अपने पति को पढ़ाने के लिए अपने गहने, ससुराल से मिले बर्तन (कांसे, पीतल) तक बेच दिए। इसके बाद जितेंद्र को इंटर और फिर ग्रेजुएशन की डिग्री दिलवाई। साल 2007 में जितेंद्र और उनकी पत्नी की मेहनत रंग लाई, जितेंद्र को बतौर शिक्षक सरकारी नौकरी मिली।
संजना ने भी मेहनत और मशक्कत कर 2014 में सरकारी नौकरी हासिल की, आज की तारीख में वह ग्रामीण आवास सहायक के पद पर खैरा प्रखंड (जमुई) में कार्यरत हैं। जितेंद्र ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए बताया कि बिजली विभाग में संजना के पिता मुंगेर में बतौर लाइन इंस्पेक्टर कार्यरत थे। उन्हें कोई कोई बेटा नहीं था।
संजना से जब शादी हुई तो ससुर ने घर जमाई बनने के लिए कहा, आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के बावजूद जितेंद्र ने ससुर के प्रस्ताव को ख़ारिज कर दिया। ख़ुद मेहनत की और पत्नी के साथ मुसीबतों का सामना करते चले गए। जितेंद्र ने बताया कि घर खाना कम होता था तो संजना उन्हें (जितेंद्र) को खिला देती थी और खुद भूखे सो जाती थी।
जितेंद्र ने बताया कि एक बार तो ऐसे हालात थे कि घर में जलावन नहीं था, मां ने सड़क किनारे फेंके प्लास्टिक के चप्पल चुने और उसके जलावन के तौर पर इस्तेमाल कर रोटी बनाती थी। पत्नी संजना पति की तारीफ करते हुए कहा कि जितेंद्र की यह अच्छी बात है कि वह जो काम ठान लेते हैं, उसे पूरा ज़रूर करते हैं।
बच्चों से उनका हमेशा लगाव रहा है, यही वजह है कि शिक्षा के क्षेत्र में जाना चाहते थे। आज जितेंद्र और संजना खुशहाल ज़िंदी गुज़ार रहे हैं। सोशल मीडिया पर दोनों साथ में कई रील्स वायरल हो रहे हैं। इसके साथ ही लोग उनके कामों की खूब सराहना कर रहे हैं।












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