Bihar Politics: NDA की तीर से JDU घायल!, नीतीश कुमार को CM पद से किनारा करने का प्लान क्या हो गया सेट?

Bihar Politics: बिहार में विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक माहौल गरमा गया है, सभी पार्टियां इस साल के अंत में होने वाले चुनावी महासंग्राम के लिए रणनीति बनाने में जुटी हैं। इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए राजनीतिक तनाव बढ़ता जा रहा है।

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने घोषणा की है कि नीतीश कुमार उनके अभियान का नेतृत्व करेंगे। हालांकि, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की हालिया टिप्पणी ने आग में घी डालने का काम किया है। सैनी ने कहा कि हरियाणा की सफलता के बाद, सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार विजय पताका फहराने की कतार में है।

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नायब सैनी के इस समय बयान दिए गए बयान पर संभावनाओं की सियासत को हवा मिल गई है। यह चर्चा है कि जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पहले पुष्टि की थी कि एनडीए आगामी चुनाव नीतीश कुमार के नेतृत्व में लड़ेगा। इसके बाद क्या नीतीश कुमार को किनारा करने की प्लानिंग हो चुकी है।

इससे पहले भाजपा नेता ने नीतीश कुमार को उपप्रधानमंत्री बनाने की बात कही थी, अब नायब सैनी ने सम्राट चौधरी के नेतृत्व में विजय का परचम लहराने की बात कही है। जबकी बिहार में NDA का परचम JUD की बदौलत ही बुलंद है। सैनी के बयान के बाद गठबंधन के भीतर संभावित तनाव के बारे में अटकलें लगाई जा रही हैं।

हालाँकि एनडीए नेताओं ने लगातार कुमार को चुनावों के लिए अपना नेता बताया है, लेकिन इस बारे में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है कि अगर वे जीतते हैं तो वे मुख्यमंत्री बने रहेंगे या नहीं। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने गुरुग्राम में अखिल भारतीय सैनी सेवा समाज द्वारा आयोजित 'राष्ट्रीय जागरूक महासम्मेलन' के दौरान यह बात कही।

सभा को संबोधित करते हुए सैनी ने जोर देकर कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वे बिहार में जीत हासिल करेंगे और सम्राट चौधरी इसका नेतृत्व करेंगे। खास बात यह है कि इस घोषणा के दौरान चौधरी भी मौजूद थे, जिससे सैनी की बातों को अक्टूबर-नवंबर में होने वाले चुनावों के मद्देनजर वजन मिला।

सैनी की टिप्पणियों ने बिहार में राजनीतिक हलचल को तेज कर दिया है क्योंकि पार्टियां चुनाव के लिए रणनीति बना रही हैं। वहीं एनडीए के भीतर नेतृत्व की गतिशीलता में संभावित बदलाव का संकेत दे रहा है। हालांकि नीतीश कुमार एक केंद्रीय व्यक्ति बने हुए हैं, लेकिन चुनाव के बाद उनकी भूमिका को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

चुनावी जंग की तैयारी कर रहे राजनीतिक दलों की निगाहें इन घटनाक्रमों पर टिकी हैं। सबका ध्यान इस बात पर है कि ये बयान, बिहार में मतदाताओं की भावनाओं और गठबंधनों को किस तरह प्रभावित करेंगे। सभी दलों की रणनीति तैयार करने के साथ ही राजनीतिक परिदृश्य में एक दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल सकता है।

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