Indian Railways: रसगुल्ले की मिठास से मुसीबत, बिहार में सैकड़ों ट्रेनें क्यों हुईं कैंसिल या डायवर्ट ? जानिए
लखीसराय (बिहार), 3 जून: बिहार के लखीसराय जिले में पिछले महीने के आखिर में रसगुल्ले की मिठास की वजह से ऐसा आंदोलन हुआ कि सैकड़ों ट्रेनों को या तो कैंसिल करना पड़ गया या फिर डायवर्ट करना पड़ गया। क्योंकि, यह आंदोलन देश के व्यस्तम रेल मार्गों में से एक दिल्ली-हावड़ा मेन लाइन पर किया गया। इस आंदोलन की वजह से ट्रेनें करीब 40 घंटे तक लेट हो गईं। सुनने में थोड़ा अजीब जरूर लग रहा है कि रसगुल्ले की मिठास ने आखिर वहां के लोगों के में मन में क्या कड़वाहट ला दी थी कि उन्होंने ट्रेनों की आवाजाही ही ठप कर दी। आइए जानते हैं पूरा मामला क्या है ?

रसगुल्ले पर ट्रेनों से संग्राम!
रसगुल्ले का जन्म बंगाल में हुआ या ओडिशा में या फिर बिहार में, यह अब बहस का कोई मुद्दा नहीं है। क्योंकि, पूरे भारत में इस स्पंजी मिठाई का नाम लेते ही किसी के भी मुंह में पानी आ जाता है। शादी-विवाह हो या कोई भी समारोह, बिना रसगुल्ले के मेहमान की खातिरदारी पूरी हो ही नहीं सकती। खासकर बिहार, बंगाल, ओडिशा या फिर उत्तर प्रदेश में तो मिठाइयों में इसकी लोकप्रियता कभी कम हो ही नहीं सकती। लेकिन, यही रसीली और स्पंजी मिठाई हाल ही में बिहार में सैकड़ों ट्रेनों के हजारों यात्रियों के लिए मुसीबत बन गई। क्योंकि, इसकी वजह से ऐसा हंगामा मचा कि ट्रेनें या तो कैंसिल करनी पड़ गईं या फिर उन्हें डायवर्ट करना पड़ा।

बड़हिया स्टेशन पर रेलवे ट्रैक पर तंबू गाड़कर बैठे थे प्रदर्शनकारी
दरअसल, बिहार के लखीसराय जिले के बड़हिया में स्थानीय लोगों ने कम से कम 10 एक्सप्रेस ट्रेनों की स्टॉपेज की मांग को लेकर जो जोरदार प्रदर्शन किया। अपनी मांगों को लेकर उन्होंने रेलवे लाइन पर ही तंबू गाड़कर विरोध करना शुरू कर दिया। स्थानीय प्रशासन ने उनसे विनती की कि ट्रेनों की आवाजाही ना रोकें। लेकिन, प्रदर्शनकारी मानने को राजी नहीं थे। उन्हें तो हर हाल में पहले अपनी मांगों पर मुहर लगवानी थी। वैसे बड़हिया इस तरह के प्रदर्शनों के लिए दशकों से चर्चित रहा है, जिसके निशाने पर अक्सर ट्रेनें ही आती रही हैं। लेकिन, इस बार बड़हिया स्टेशन पर हुए प्रदर्शन की वजह से दिल्ली-हावड़ा मेन लाइन पर करीब 24 घंटे तक ट्रेनें कैंसिल रही हैं और इसके चलते 100 से ज्यादा ट्रेनों को रूट बदलकर चलाना पड़ा। इसके कारण 40 घंटे तक ट्रेनें लेट भी हुईं।

रसगुल्ले की सप्लाई के लिए एक्सप्रेस ट्रेनों की स्टॉपेज की मांग
इंडिया डॉट कॉम ने लखीसराय के जिलाधिकारी संजय कुमार के हवाले से जानकारी दी है कि कई एक्सप्रेस ट्रेनों के बड़हिया में हाल्ट बनाने को लेकर रेलवे ट्रैक पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग जुट गए थे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि ट्रेनों के हॉल्ट होने से स्थानीय लोगों को सुविधा होगी। लेकिन, आप जानकर हैरान रह जाएंगे कि इस पूरे प्रदर्शन के जड़ में रसगुल्ले हैं, जिसके लिए इलाके में बड़हिया मशहूर रहा है। यहां बनने वाले रसगुल्ले दूर-दूर तक जाते हैं। अकेले बड़हिया में रसगुल्लों की 200 से ज्यादा दुकानें हैं, जहां से यह बिहार, झारखंड के आसपास के शहरों और गांवों से लेकर बंगाल तक पहुंचते हैं।

एक्सप्रेस ट्रेनों की स्टॉपेज की मांग
दरअसल, कोरोना महामारी की वजह से इलाके के रसगुल्ला कारोबार पर बहुत असर पड़ा है और ऊपर से सभी ट्रेनों के नहीं ठहरने से इसकी ढुलाई में भी दिक्कत आती है। लोगों की नाराजगी इसी बात को लेकर है कि सभी ट्रेनों के ठहराव नहीं होने की वजह से वह अपना स्टॉक देश के दूसरे हिस्सों में नहीं भेज पाते। जिन ट्रेनों से कारोबारी रसगुल्ला पटना तक भेज देते थे, उन्हें एक आदमी के लिए 55 रुपये का किराया देना पड़ता है और सिर्फ दो घंटे लगते हैं। लेकिन, यही अगर सड़क के रास्त भेजते हैं तो पब्लिक ट्रांसपोर्ट से भी उन्हें कम से कम 150 रुपये लग जाते हैं और ऊपर से समय भी दोगुना लग जाता है। लिहाजा, वह ज्यादा से ज्यादा ट्रेनों के हॉल्ट की मांग कर रहे हैं, खासकर एक्सप्रेस ट्रेनों की।

रेलवे के आश्वसान के बाद खत्म हुआ रसगुल्ले वाला प्रदर्शन
मोटे अनुमान के मुताबिक बड़हिया में रोजाना 25 क्विंटल रसगुल्ले का कारोबार होता है। शादी-विवाह या इस तरह के कार्यक्रमों के समय में इसकी बिक्री और ज्यादा बढ़ जाती है। जानकारी के मुताबिक जब रेलवे ने प्रदर्शनकारियों को एक्सप्रेस ट्रेनों के ठहराव का लिखित भरोसा दिया, तब जाकर प्रदर्शनकारियों ने ट्रेनों की आवाजाही शुरू होने दी। इस आंदोलन की वजह से करीब 40 घंटे दिल्ली-हावड़ा मेन लाइन पर ट्रेनों की आवाजाही बाधित रही।(कुछ तस्वीरें- प्रतीकात्मक)












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